पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/७३९

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तेजपत्ता दो प्रकारका ता-पता (Cinna-MATो जाती धीशाबा गुण momum Tama) पोर राम तेजपत्ता (Oinnamon भो दासांनी सानिमा बाट नौ। mum Obtusifolium) . .. वेज सतनको शलमा गुम हारमोनो सरोखा देखनम तेजपतका पोषा अधिक बड़ा नहीं होता। जिस पाताल काटन, वसता पोर बन्यो पादि खान पर कुछ समय तक पही वर्षा होकर पौरि सानोमयाबसाय होता है । पड़ती,वहां यह पैड़ पच्छी तरह बढ़ता है। हिमा- तेल-सको हालका अपरी भाग बी बाट बार लायके पूर्वी में यह भार फुटको बचाई पर अलग कर दिया जाता है, उसी प्रक प्रकार समक्ष पाया जाता , दारजिलि कांगड़ा, जयन्तिया, तिल गमता १. और मैं सनमम हाय खासिया, प्रदेश और पन्दामन सीपमें यह पहुत ज्य-तम निकलता है। यह तेल देखने मान, पोतब जता है। मिन्धुके किनारसे ले कर पतंद्र के किनारे तक तथा दारचोगो समान गन्धविविधता किन्न भी इसका पेड़ कहीं बरी देखनम पाता है। जय गुपदारमोनोके तबसे मुहोस तलने पास लिया पोर पासियाम रसकी वितो होतो म पर साबुन ( Military soap ) बनाया जाता है। पौजको सात सात फुटकी दूरी परं बोते है। पोषाक और फल-मका फल और फलोक लवा जब पांच वर्षका हो जाता है, तब उसे दूसरे स्थान पर सा होता है। फल बढ़ने नहीं दिया जाता भी गेप देत है। जब तक एमके पौधे छोटे रस्ते, सब हालको गाई गुचविषिष्ट है। प्राचीन कालम मियो.. तक विशेष रक्षाकी. पावश्यकता होती है। धूप पादिः स ( Hippocrus) नामक सुगन्ध मयसीम बनाया से बचाने के लिए उन्हें भाडियोको छायाम रख देते। बाता। यरोप में या Cssiabnd नाममें और बला- पांच वर्षमै जब यह दूसरे स्थान पर रोपा जाता है, सभी में काली नागकेशर मामले मशहर है। और इसके पत्ते काममें पाने योग्बी जाते। दक्षि'भारतक्मे याबरको मित्रा जातानीमा' सकी छाल और पत्तियां दोनों ही काममें माई पर 'मलवारी' नामसे सके दो भेद। इपिण जाती है। दारचीनीको माई तेजयतको शलभी प्रदेशको मुसलमान लोग व्यसनादिको समन्धित परीक सुगन्धित होती है और बहुत कुछ दारचीनी के साथ लिये ममासिकी तरह काममें लाते। .. : मिलती जुलती भी है। छालसे एक प्रकारका पत्ता- पनकी पत्तियामाधारणत: भारतवर्ष में और साबुन तथा पत्तियोंसे एक प्रकारका रंग बनाया था तरकारी पादिम मसालेको तरस पालो जातो. जाता। .. . पोर पोषधक काममें भी लाई नामी । प्रतिवर्ष ।-दाचीनोको माई सके धड़ और मोटी सुधारसे प्रगान तक और कहीं कहीं पान तक डानियोंने छाल निकाल कर उसे टारगोनोको तह रसकी पत्तिया तोड़ी जाती है। साधरणाची प्रति काममें लाते हैं। दारचोनोको, अपेक्षा इसकी छाल वर्ष, और पुराने तथा दुबलो मे प्रति दूसरे को पतली होतो इसहो, पर उस तमिले नहीं होतो, पत्तियां ली जातो । प्रत्येक क्षों ने प्रति वर्ष १०से वरन् ठगे गोलमाल जमी रहतो । दारचोनोकी २५ मेर तक पत्तियां निकलतो बोटवार बनाने छालका जपरी भाग यत्नपूर्वक जितना काट कर भाग समय इसकी पत्तियों को हड़, वडा घोर विरीके कर दिया जाता है, उतना इसी सो वारण 'साथ मिला होते है जिससे रंग का होगा। इसी इसमें कई जगह अपरी भाम भी समापी गोयसे प्रतिवर्ष ५०००० मन पत्तियोंकी गमगली दौख पड़ता है। इसको माला वा-यासोशलको 'पौर सरदा मध्यवर्ती खानोंसे रफ तो होती है। अपचा मूलतन्तको हाली हारचोनो गन्ध पक्षिका औषपसको शाम पोर पजिया वात रोममें सतो है। मधिपुर प्रान्तमें पौधेको र मल ज क रूपसे एवं उदरामबोर पामामय में बस