पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष नवम भाग.djvu/८०

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ठाइरद्वाग-डाहरवंश ठाकरतारा (हि.पु.) १ देवालय देवस्थान। २ पुरु• गये है। इसके लिए ' म को पोरने में १००० षोत्तमधाम, पुरोमें जगवाथका मन्दिर । रु०की सहायता मिली थो। ठाकुरद्वारा-युकप्रदेशके मुरादाबाद जिलान्तर्गत दमी ये बड़े मिलनसार, सरलवित्त और समख । नामकी तहमोलका एक शहर । यह अक्षा. २८.१२७० हिन्दी में व्यापार सम्बन्धो पुस्तकको लिख कर ये रतने और देशा०७८५२ पू० पर मुगदाबाद शहरसे २७ मौन प्रसिद्ध हो गये हैं। . उत्तरमें अवस्थित है। लोकसंख्या प्रायः ६११९ है। ठाकुरप्रसाद त्रिपाठो-सस्कृत के एक विहान् । गयबरेली यह शहर मुरम्मदशाह शासन-काल में (१७१८-४४१०) जिलेके किरानदामपुरमें इनका घर था। १८२२ ई में बमाया गया था। १८७५ ईमें पिगड़ारी-नामक इनका जन्म हुआ था। 'रमचन्द्रोदय' नामक संस्कृत अमोरवनि पमे लूटा था। यहां एक तहमोलो, पुन्निम ग्रन्थ इन्हींका बमाया हुआ है। इनके पाम भाषा- स्टेशन, अस्पताल और American Metholist साहित्यका पच्छा पुस्तकालय था। mission की एक शाखा है। ठाकुरप्रसाद त्रिवेदी-ये भी एक अच्छे विहान थे। ठाकुरप्रमाद (हि.पु.) १ नैवेद्य । २ भादा और इनको जन्मभूमि "मेरी जिन्ने के अलीगञ्जमें थो । १८८३ पाश्विनके मध्य में होनेवाला एक प्रकारका धान। ई में ये विद्यमान थे। इन्होंने "चन्द्रशेखर" काव्यको ठाकरप्रसाद खत्रो-हिन्दोके एक धुर धर तथा निष्कपट रचना की है। विद्वान् । इनका जन्म मन् १८६५को काश में हुआ था। ठाकुरप्रसाद मिय-अवध देशान्तर्गत पयासीके एक स्वनामधन्य बाबू विश्वेश्वरप्रसाद जो काशीके सरकारी ब्रह्मग कवि। एनको कविता बड़ी भोजस्विनी और कोषागारमें हेड लक रहे, इनके पिता थे। हिन्दो तया मरस होती थी। ये महागज मानसिंह अयोध्या-नरेश के फारमोमें उनको अच्छो पंठ थो। अंग्रेजोमें इन्होंने यहां रहते थे। इनकी एक कविता नाचे दी जाती है। १८८५ ई० में कलकत्ता युनिमिटीको इंट्रेम परीक्षा "भाजे भुजदंडके प्रचंड चोट भजे पाम की थी। ट्रेभ होने पर भी अंगरेजो में इनका बीर सुन्दरी समेत से- मदरकी कंदरी। पूरा दग्वन था। पिताके मरने पर कई पदों पर काम करने मुगल ठान सेख से द असेख धीर बा दये पुन्निश कोषाध्यक्ष बना दिये गये। पुलिश विभाग- भावत हमारन बजार कैसे चाधरी। में इन्होंने कई वर्ष कार्य किए तथा कई अच्छे प्रशसा पंडित प्रवीन कहै मानसिंह भूरति कमान वे पत्र भी प्राप्त किये थे। अन्त में इनकी रुचि इम पोरसे अगेपत यों तीनों तीर कैबरी। हट गई और ये अपभा समय पढ़ने लिखनमें व्यतीत निंधके ससेटे गज बाज के लपेटे लवा करने लगे : 'लखनऊको नवायो' नामको पुस्तक उन्हों. तैसे भूल भूतल चकतनकी चाकरी ॥" को लिखी हुई है। भूगर्भ विद्या, ज्योतिष और उत्तर. ठाकुरबाड़ी (हि. स्त्रो० ) देवालय, मन्दिर। ध्रवको यात्रा लेख पर इन्हें कायो-भागरी प्रचारिणो ठाकुरराम-हिन्दाकै एक कवि। मभासे चांदो तीन पदक मिले थे। ठाकुरवंश-कलकत्ताक विख्यात बामणव सम्बत कपड़े बुनन में भी ये बड़े मिझ हस्त थे । रम विषय सम्भ्रान्त पौराली गोष्ठी । वे गीजोंसे यथेष्ट सम्मानित पर इन्होंने देशोय करघा नामको एक पुस्तक भी लिखी होते थे। इससे किसी किमोको अंगरेजोंसे 'महाराज' है। इन्होंने विनोदवाटिका तथा 'जमींदार' नामका को उपाधि मिली है। ये अपनको महनारायण-वंशक पत्र कुछ काल तक के लिए निकाला था। दिनी दिन महात्मा हारिकानाथ ठार, प्रमजकुमार ठाकुर, बतलात कपड़ा सोनका मशोनाका प्रचार बढ़ते देख ये उसके हैं। इस वश महर्षि देवेन्द्रनाथ ठाकुर, महाराज साधारण दोष दूर करने के विषय पर 'जगत् व्यापारिक यतीन्द्रमोहन ठाकुर, राजा शौरोन्द्रमोहन ठाकुर प्रभृतिने पक्षयकोष' नामक एक उत्तम पोर उपयोगी अन्य लिख जमाण किया है। पीराली देखो।