पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१०८

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


१०२ फुरफुराना-फुलकिया उत्पन्न हो। २ उड़नेमें परोंकी फरफराहटसे उत्पन्न अपने नाम पर एक नगर बसाया (२) अनन्तर हयत् खाँ शब्द। और इसाखाँ नामक दो मुसलमान सरदारोंसे पराजित फुरफुराना ( हिं० कि० ) १ फुर फुर करना, उड़ कर परों- हो वे अपने मेहराज राज्यका परित्याग करनेको वाध्य का शब्द करना । २ हलकी वस्तुका लहराना । ३ पर या हुए। क्रमशः निज दलपुष्टि करके उन्होंने इसाके पुत्र और कोई हलकी वस्तु हिलना जिमसे फुरफुर शब्द हो। दौलत खाँ और भाटनके सरदार हयत् खाँको हराया ४ कानमें रुईकी फुरेरी फिराना। और निज राज्यका पुनः उद्धार किया। अब वे प्रताप- फुरफराहट (हिं० स्त्री०) फुर फुर शब्द होनेका भाव । पंख शाली सरदार हो दिल्लीको अधीनताकी उपेक्षा करने फड़फड़ानेका भाव । लगे। जाप्रांवके शासनकर्ताको राजस्व न दे कर उल्टे फुरफुरी ( हिं० स्त्री० ) फुरफुराहट देखो। उन्हें युद्ध में परास्त और अब रुद्ध किया था। किन्तु इसके फुरमान (फा० पु०) १ राजाज्ञा, अनुशासनपत्र । २.आज्ञा, सिवा उन्हें और किसी प्रकारका कप्ट नहीं दिया गया। आदेश। ३ मानपत्र, सनद । गुरु हरगोविन्दको भविष्य वाणी सच निकली, फुरसत ( अ० स्त्री०) १ अवसर, समय । २ निवृत्ति, अव वास्तविक ये प्रतापशाली हो उठे। उनके सात पुत्र काश। ३ बीमारीसे छुटकारा, आराम । पतियाला, किन्द, नाभा, भदोर, मलोद, लन्दधरिया और फुरहरी ( हिं० स्त्री० ) १ परको फुला कर फड़फड़ाना। जियान्दन वंशके प्रतिष्ठाता हो फुलकिया नामसे परिचित कपड़े आदिके हवामें हिलनेकी क्रिया या शब्द, फरफरा- हुए। हट। ३ फड़कनेका भाव, फड़कना । ४ फुरेशी देखो। १६५२ ई०को ७० वर्षकी उमरमें फुलको मृत्यु हुई । ५ कम्प और रोमाञ्च, कंपकंपी। कोई कहते हैं, कि वे योगाभ्यास करते थे । सरहिन्दके फुराना ( हिं० कि० ) १ सच्चा ठहराना। २ प्रमाणित शासनकर्ताको जब समय पर कर नहीं मिला, तब उन्होंने करना। फुलको अबरुद्ध किया। उस समय वे ईश्वरचिन्तामें फुरेरी (हिं० स्त्री०) १ रोमाञ्चयुक्त कम्प, सरदी, मय आदि- योगमग्न हो गये और लोगोंने उसीको मृत्युको कल्पना के कारण थरथराहट होना और रोंगटे खड़े होना।२ कर ली। फिर किसीका कहना है, कि अवरोधके समय सींक जिसके सिरे पर हलकी रुई लपेटी हो और जो सरदी गरमीके मारे उनकी मृत्यु हुई थी। तेल, इत्न, दवा आदिमें डुबा कर काममें लाई जाय। मृत्युके बाद उनके द्वितीय पुत्र रामचाँद फुलकिया फुती (हिं० स्त्री० ) फुरती देखो। दलके सरदार बनाये गये। उन्होंने हसन खाँको परास्त फुसंत (अ० स्त्री०) फुरसत देखो। कर भट्ट राज्यको लूट लिया । पीछे इसा खाँ और कोटका फुलका ( हिं० पु० ) १ फफोला, छाला। २ एक छोटा मुसलमानो राज्य जीत कर मोटी रकम इकट्ठी की। १७१४ कड़ाह जो चीनीके कारखानेमें काम आता है । ३ हलकी : ई०में ७५ वर्ष की उमरमें वे अपने सरदार चेतसिंहके और पतली रोटियां, चपाती। पुत्रोंसे मारे गये। इसके बाद रामके तृतीय पुत्र आला- फुलकिया---एक सिख-मिसल वा दल। सिन्धुदेशवासी सिंह सरदार वने । ये पतियालावंशके प्रतिष्ठाता थे। जाटवंशीय(१) फुल नामक एक सग्दारसे यह दल प्रति- १६६५ ई०में उनका जन्म हुआ था । आलासिंहकी ष्ठित हुआ। ये रूपचाँदके ३य पुत्र थे। १६१६ ईमें मेह- मृत्युके बाद १७६५ ई में अमरसिंह राजा हुए। उन्होंने राज प्राममें उनका जन्म हुभा था । सम्राट शाहजहान्के मुसलमानोंको परास्त कर मणिमाजरा और कोटफपुर फरमान मुताबिक वे पितृपद पर अधिष्ठित हुए। उन्होंने : पर अधिकार किया। १७८१ ई०में उनकी मृत्यु हुई। पीछे उनके लड़के साहेब सिंह और साहेबके बाद उनके (१) यह व्याक्त राजपूताने के अन्तगत जयसलमीर- (२) अभी । मगर नामा राज्य के अन्तभुक हो राजवंशके प्रतिष्ठाता जयशलराजसे १३ पीढी नीचे थे। गया है।