पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/११९

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ग फेर-पलटा-फैज अली ठीक चलनेकी शिक्षा देना, चाल चलाना। सबके १६६० ई०में अगरेजोंने इस नगरको अधिकार कर ध्वंस सामने ले जा कर रखना, घुमाना । १० प्रचारित करना, : कर डाला । यहां खपड़े का एक बड़ा कारखाना है । घोषित करना। ११ पलटना, बदलना। १२ पोतना, फेरौरी ( हिं० स्त्री० ) टूटे फूटे खपरेलोंको छाजनसे तह चढ़ाना । १३ पार्श्व परिवर्तन करना, एक ही स्थान निकाल कर उनके स्थानमें नये नये खपरेले रखनेकी पर स्थिति बदलना । १४ स्थान वा क्रम बदलना। क्रिया। १५ अभ्यस्त करना, बार बार दोहराना । फेल ( सं० क्ली० ) फेल्यते दूरे निक्षिप्यते इति फेल-घञ्। फेर-पलटा ( हि० पु. ) द्विरागमन, गौना। भुक्त समुज्झित, उच्छिष्ट द्रव्य, जूठा । फेरफार (हि० पु० ) १ परिवर्त्तम, उलट फेर। २ चक्कर, फेल ( अ० पु. ) कार्य, काम । घुमाव फिराव । ३ अन्तर, बीच । ४ टालमट्टल, बहाना। फेल ( अं० पु० ) अकृतकार्य, जिसे काजमें सफलता न फेरव (सं० पु०: के इति रवि यस्य । १ शृगाल, गीदउ । हुई हो। २ राक्षस। (त्रि०) ३ धूर्न, चालबाज । ४ हिंस्र, दुःख फेलक ( स० पु. ) फेल स्वार्थे संज्ञायां कन् । उच्छिष्ट, पहुंचानेवाला। जूठा। फेरवट ( हिं० स्त्री० ) १ फिरनेका भाव । २ लपेटनेमें एक फेला ( स० स्त्री० ) फेल्यते इति फेल ( गुरेष हलः । पा एक बारका घुमाव । ३ घुमाव फिराव, पेच । ४ अन्तर, ३३१०६ ) इति अ, टाप् । उच्छिष्ट वस्तु, जूठा फर्क । पदार्थ। फेरवा (हिं० पु०, मोनेका वह छल्ला जो तारको दो तीन फेलि ( स० स्त्री० ) फल-इन् । उच्छिष्ट, जूठा । बार लपेट कर बनाया जाता है, लपेटुआ। फेलिका (स० स्त्री० ) फेलिरेव स्वार्थे कन् टाप् । उच्छिष्ट, फेरा (हिं० पु० । १ परिक्रमण, चक्कर । २ लौट कर फिर जूठा।। आना, पलट कर आना। ३ इधर उधरसे आगमन । ४ फेली ( संस्त्री० ) फेलि-डीप । उच्छिष्ट, जूला। लपेट, मोड़। ५ बार बार आना जाना। फेलो ( अं० पु. ) सभासद, सभ्य । फेराफेरी ( हिं० स्त्री० ) हेरा फेरो, इधरका उधर । फेल्ट ( अं० पु० ) जमाया हुआ ऊन, नमदा । फेरी ( हिं० स्त्री० ) १ प्रदक्षिण, परिक्रमा । २ फे। देखो। फेस ( ० पु० ) १ चेहरा, मुंह। २ सामना । ३ घड़ी- ३ फेर देखो। ४ वह चरखी जिस पर रस्सी पर ऐंठन का सामना भाग जिस पर सुई और अङ्क रहते हैं। ४ चढाई जाती है। ५ योगी या फकीरका किसी बस्तीमें टाइपका वह ऊपरी भाग जो छपने पर उभरता है। भिक्षाके लिये बराबर आना। ६ कई बार आना जाना, फेहरिस्त ( हिं० स्त्री० ) फिहरिस्त देखो। चक्कर। फैंसी ( अ० स्त्री० ) १ देखनेमें सुन्दर, रूप रंगमें मनोहर । फेरीवाला ( हिं० पु० ) घूम घूम कर सौदा बेचनेवाला , २ दिखाऊ, तड़क भड़क का । व्यापारी।

फैकृरी ( अ० स्त्री० ) कारखाना ।

फेरु (सं० पु० ) के इति शब्देन रौतीति रु मितद्र वा- फैज ( अ० पु० ) १ वृद्धि, लाभ । २ परिमाण फल । दित्वात् डु। शृगाल, गीदड़। फैज अलो-दिल्लीवासी एक मुसलमान कवि। इनका फेरुआ (हिं० पु०) फेवा देखो। नाम मोर फैजमली है। इनके पिता मीर महम्मद तकि फेरोख-मन्द्राज प्रदेशके मलवार जिलेका एक नगर। यह भी एक विख्यात कवि थे। दोनों ही १७८५ ई०को दिल्ली- अक्षा० २३१ उ० तथा देशा० ६०२५ पू०के मध्य अव- नगरमें विद्यमान थे। स्थित है। जनसंख्या चार हजारके करीब है। १७८६ २ दीवान फैज नामक पारस्य-भाषाके संगीतग्रन्थ- ई में महिसुरराज रीपूसुलतान इस नगरको उक्त जिलेकी रचयिता। ये लखनऊ-राज महम्मद अली शाहके सम- रामधानो कायम कर कलिकर-वासियोंको वहां ले गये थे। सामयिक थे। Vol. xv. 29