पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१४०

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बैंक यह दूधकी तरह सफेद है। इसका गला और दोनों पैर वेष्ट मोरलेसमें इस प्रकार पक्षियों का विवाद देखा है। लम्बे, चोच लंबी, चाल धीरी और पूछ इतनी छोटी होती : पहिले युद्ध में एक वृक्ष नष्ट हुआ एवं दूसरे युद्ध में बगुलेने हैं, कि देखने में नहीं आती। गला इसका इतना कोमल ! जय-लाभ पा कर द्रोण काकके अधिकृत स्थानमें होता है, कि उसकी तुलनाका अन्य कोई भी पदार्थ नहीं अन्यान्य घोंसला बनाया। अन्तमें इस विरोधी दलके है । यह साधारणतः ही मूल्यवान है। कोई इसे अपने बीच संधि हो गई। यह स्वभावसे ही पोस मानता माथेका सुहाग समझते हैं। है, पालने पर वह इतना परच जाता है, कि पालकके पास- वैज्ञानिक लोगोंने इस जातिके पक्षिको Arclct को से कभी अलग नहीं होता। यह मत्स्यसे भिन्न अन्य श्रेणीमें शामिल किया है। आयुवेद शास्त्रकारोंके मतमें द्रव्य भी खाता हुआ देखा गया है। यह हंसादिकी यह प्लब-जातिका है, क्योंकि यह तालावों के किनारों पर! तरह स्पष्ट रूपसे तैर नहीं सक्ता, तो भी जलके ऊपर पंख ही सदा बैठा रहता है । इंगलैण्ड आदि यूरोपीय देशोंमें रख कर और पैरके बलसे उड़ता हुआ अभीष्ट स्थानमें इस जातिके पक्षीको Heron ( Ardea cfnera) कहते चला जाता है। किसी किसी समय वह १० या १२ हैं। किंतु इसके शरीरका आकार इस बगुलेसे बड़ा होता फीट तैर कर पार करता हुआ देखा गया है। है। जब वह तालावके तट पर रहता है तब बहुत तीन वर्ष तक बच्चोंके माथे पर रोए नहीं निकलते, निस्पृह मालूम होता है और स्थिर हो गला नीचा कर इसके बाद मस्तकके ऊपरी भाग पर ही कितने रोएँ मछलियोंकी बाट जोहता है। ज्यों ही छोटी मछली जल निकलते दिखाई देते हैं । गलेके रोएँ सफेद और पर तैरती दिखाई देती हैं त्यों ही लंबी चोंचसे उसे पकड़ अत्यन्त कोमल होते हैं। चोंच जन्मसे ही पीली होती निगल जाता है। विलायती बगुले जलके चूहे, मेढ़क, है। पैरों का रंग पक्का होता है, इस समय बच्चों का सरी सृपादिके बच्चोंको पकड़ खाता है । पेट भरनेके लिये शारीरिक गठन इतना सुन्दर नहीं होता, किंतु तीन वर्षके बगुला समस्त दिन नदीके तट पर चुपचाप बैठा रहता है बाद ही उनका यौवन प्रारम्भ होने लगता है। नर और और रात्रिको वृक्षोंकी डालियों पर सोता है । जब इसके मादा स्वः विसे ही चिकने बालों से वेष्टित रहने के कारण अंडे देनेका समय आता है तब वह अन्य स्थानमें उड़ देखनेमें सुंदर लगती हैं। यूरोपमें पहिले बगुलेका जाता है । आकाशमें यह इतना ऊपर उड़ता है, कि नीचेसे शिकार संभ्रान्त व्यक्तियों की क्रीड़ामें गिना जाता था। हमें वह बहुत छोटा श्वेतकाय दीखता है । वह एकान्तमें शिकार करते समय यदि किसी व्यक्तिसे अण्डा नष्ट हो वृक्ष पर घोंसला बनाता है। यहां तक, कि किसी किसी जाता था, तब उसे एक पौंड अर्थ दंड देना पड़ता था। वक्ष पर इसके घोसलों की संख्या अस्सीसे अधिक देखी बगुलेका मांस सुखाद्य आहार है। इंगलैंडमें ४र्थ गई है। इसका घोंसला छोरी मोटी लकड़ियों से एडवर्ड के राज्यकालमें योर्कके आर्कविशप जार्ज नेभिलके बड़ा और चिपरा बना होता है। मध्य भाग कोमल पशम, . अभिषेकके समय बहुतसे बगुले मारे गये थे। राजा रेशम आदि अन्य द्रव्योंसे ढका रहता है । इसके ऊपर वह टम हेनरोके विवाहके समय बकमांसका प्रचार था। हरे नीले, ४-या ५ अंडे देता है। आजकल रुचिके परिवर्तनसे इंगलैंडमें बकमांसका अन्यान्य पक्षियोंकी तरह इसके अंडोंका खोल अधिक प्रचार नहीं रहा। चमकता हुआ नहीं होता। अंडेके फूट जाने पर और २ स्वनामख्यात पुष्पवृक्ष, अगस्तफूल । पर्याय--- बच्चेके बाहिर निकल आने पर वह प्रायः ६ सप्ताह शिवपल्ली, पाशुपत, एकाष्ठीला, बुक, बसुक, बकपुष्प, तक घोंसलेके भीतर ही रहता है । इस समय बद्ध पक्षी शिवमल्ली, काकशीर्ष, स्थूलपुष्प, शिवप्रिय, काकनामा, मछलीको पकड़ उसे खाने देते हैं। कभी कभी वृक्ष पर बसहट्ट, खपूरक, रक्तपुष्प, मुनितरु, अगस्ति, बंगसेनक, घोंसला बनाते समय द्रोण (कालेकौवे ) और बगुलेमें अगस्त्य, शीघ्रपुष्प, मुनिद्रुम, व्रणारि, दीर्घफिलक, बक्र विरोध हो उठता है । डाक्तर हेसमने (Der. Hey shum) | पुष्प, सुरप्रिय ( Se-bania grandiflora )