पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१५२

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१४६ वघंघर-बङ्गापुर मध्यवती स्थान। यह स्थान वस्त्र व्यवसायके लिये तथा ६५५६ ग्राम लगते हैं। सतना यहांका प्रधान प्रसिद्ध है। यहां जो कपड़े तैयार होते हैं वे बगड़ो वाणिज्य स्थान है। १८७१ ई. तक यह स्थान बुन्देल- नामसे तमाम मशहर हैं। खण्डके अधीन रहा। उसो सालसे यह बघेलखण्ड बघंबर ( हिं० पु.) १ बाघकी खाल जिस पर साधु लोग एजेन्सी कहलाने लगा है। बघेला नामक राजपूतोंके बैठ कर ध्यान लगाते हैं। २ बाघकी खालकी तरह बना वाससे इसका बघेलखण्ड नाम पड़ा है। बघेला-राजपूत हुआ कंबल। एक समय गुजरातमें राज्य करते थे। वघेला देखी। बधनहां ( हि० पु० ) १ एक प्रकारका हथियार। इसमें बघेला शिशोदीय वंशीय राजपूत जातिकी एक शाखा। नाखूनके समान चिपटे टेढ़े कांटे रहते हैं । इसे उंगलियों ये लोग पहले गुजरात प्रदेशमें राज्य करते थे। तिहुण. में पहनते हैं और हाथापाई होने पर इसमे शत्रको नोच पाल ( त्रिभुवनपाल), दुर्लभ और बल्लभके शासनके बाद लेते हैं। २ एक आभूषण जिसमें बाधके नाग्वून चांदी १३०२ सम्वत्में विशलदेव पटनाके सिंहासन पर बैठे। या मोनेमें मड़े होते हैं। इसे गलेमें तागेमें गृथ कर इनके १८ वर्ष राज्य करनेके बाद अर्जुनदेवने १३२० पहनते हैं। मम्बन्में राज्याधिकार प्राप्त किया। उसके बाद १३३३ बघार ( हिं० पु०) १ छौंक, तड़का ! २ बघरानेको महंक। सम्वन्में मारङ्गदेवका राज्यारोहण देखा जाता है । १३५३ बघारना ( हिं० क्रि० ) १ कलछी या चम्मच घीको आग सम्बन्से १३६० सम्बत् तक कर्णने गज्य किया। पर तपा कर और उसमें हींग, जीरा आदि सुगधित शेषोक्त संबत्में दिल्लीश्वर सुलतान अलाउद्दीनने दलबलके मसाले छोड़ कर उग्ने दाल आदिके बरतनमें मह ढांक माथ आ कर हिन्दू-राजवंशको तहस नहस कर डाला। कर छोड़ना जिसमें वह दाल आदि भी सुगधित हो विनारश्रेणी तथा प्रवचनपरीक्षा नामक ग्रन्थमें इस राज- जाय, छौंकना। २ अपनी योग्यतासे भधिक, विना वंशके राज्यकाल सम्बन्धमें बहुत सी बातें लिखी हैं। मौके या आवश्यकतामे अधिक चर्चा करना। रेवाको बघेलराज-अख्यायिकासे मालूम होता है, कि बघेग ( हिं० पु० ) लकड़बग्घा । अनहलवाड़के अधिपति सिद्धराय जयसिंह (११००- बघेलखण्ड --मध्यभारतके अन्तर्गत एक विस्तीर्ण एजेन्सी। १९५० ई०) के पुत्र व्याघ्रदेवने १२वीं शताब्दीमें यहां आ यह अक्षा० २२४० से २६१० उ० तथा देशा० ८० कर राज्य वसाया। व्याघ्रदेवके नामसे ही इनकी बघेला २५ से ८२ ४५ पू०के मध्य अवस्थित है। यह देशीय : संज्ञा पड़ी है। राजाओंके अधीन है तथा बडे. लाटके मध्यभारतके ' वघेली ( हिं० स्त्री० ) बरतन खरादनेवालोंका खूटा। एजेएटमे शासित होता है। भूपरिमाण १४३२३ वर्ग इसका ऊपरी सिरा आगेकी ओर कुछ बडा होता है । इस मील है जिनमेंसे १३००० वर्ग मील रेवाराज्यके अधीन है सिरेको घाई या नाक कहते हैं और इसी पर रख कर और शेष भाग ११ छोटे छोटे राज्योंमें विभक्त है। इन बरतन खगदा या कृना जाता है। ११ गज्यों के नाम हैं-.बरौंदा, नागोद, मैहर, सोहावल, बघेग ( हि० पु. ) बगेरी देखो। कोठी, जासो, पालदेव, पहरा, तरौन, भैसौंदा और बङ्गनेर -वालियर राज्यके अन्तर्गत एक प्रधान नगर । कामत रजौल। इसके उत्तरमें मिर्जापुर, इलाहाबाद यह माननदीके किनारे अवस्थित है। और बांदा जिला ; दक्षिणमें बिलासपुर, मण्डला और बकापुर - बम्बई प्रदेशके धारवार जिलान्तर्गत एक उप- जबलपुर ; पश्चिममें जव्वलपुर जिला और बुदेलखण्ड विभाग। यह अक्षा० १४५१ से १५१० उ० और देशा० ७५ एजेन्सी तथा पूरबमें छोटा-नागपुरका सामन्तराज्य है। ४ से ७५२८ पू०के मध्य अवस्थित है । भूपरिमाण ३४४ जनसंख्या साढ़े पन्द्रह लाखके करीब है जिनमेंसे हिन्दू- वर्गमील और जनसंख्या नब्बे हजारसे ऊपर है। इसमें एक को संख्या भौर वर्णोसे अधिक है। इसमें रेवा, सतना, शहर और १४४ ग्राम लगते हैं । जलवायु स्वास्थ्यप्रद है। मैहर, उमरिया, गोविन्दगढ़ और उनचहर नामके ६ शहर २ बम्बईके धारवार जिलान्तर्गत एक शहर। यह