पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/१६७

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बत्तक-बदनतौल १६१ बत्तक (हिं० स्त्री०) बराव देखो। बदइंतजामी (फा० स्त्री० ) अव्यवस्था, कुप्रबन्ध । बत्तिस ( हिं० वि०) व नीम देखो। बदकशी--बदाकसानवामी अफगान-जाति । चिखल, बत्ती ( हि स्त्री० ) १ सूत, रुई, कपड़े आदिको पतली काफरिस्तान आदि स्थानवासियों के साथ इनका आचार छड. चिराग जलानेके लिये रुई या सूतका बटा हुआ ध्यवहार बहुत कुछ मिलता जुलता है। ये लोग कट्टर लच्छा। २ प्रकाश, दीपक। ३ पगड़ी या चीरेका मुसलमान नहीं है, आकृतिगत साद्श्य देखनेसे आर्य- ऐंठा हुआ कपड़ा। ४ कपड़े के किनारेका वह भाग जो जातिके-से प्रतीत होते हैं। ये लोग हिन्दू और इराणी सोनेके लिये मरोड़ कर पकड़ा जाता है। ५ कपड़े की जातिके मध्यवती हैं। लंबी धजी जो घावमें मवाद साफ करनेके लिये भरते बदकारी फास्त्रो०) १ कुकर्म। २ध्यभिचार। हैं। ६ फुसका पूला जिसे मोटो बत्तीके आकार में बदकिस्मत ( फा० वि० ) मन्दभाग्य, अभागा। वांध कर छाजनमें लगाते हैं, मूठा । ७ पलीता, फलीता। बदखत ( फा० पु० ) १ बुरे अक्षर, बुरा लेख । ( वि० )२ ८ बत्तोकी शकलकी कोई चीज, पतली छड़ या सलाईके बुरा लिखनेवाला, जिसका लिखनेमें हाथ न बैठा हो। आकारमें लाई हुई कोई वस्तु। मोमबत्ती । बदखाह (फा० वि० ) अनिष्ट चाहनेवाला, बुरा चाहने- बत्तीस (हि० वि०) १ तीससेदों अधिक, जो गिनतीमें वाला। तीसले दो ज्यादा हो । ( पु० ) २ तीससे दो अधिकको बदगुमान ( फा० वि० ) म देहकी दृष्टिसे देखनेवाला। संख्या। ३ उक्त संख्याका अङ्क जो इस प्रकार लिखा बदगुमानी ( फा० स्त्री०) किसोके ऊपर मिथ्या संदेह, जाता है -३२। झूठा शुबहा। बत्तीसा (हिं पु० ) एक प्रकारका लाडू जिसमें पुष्टईके बदगोई ( फा० स्त्री० ) १ निन्दा, शिकायत । २ चुगली। बत्तीस मसाले पड़ते हैं। बदचलन (फा० वि०) कुमागी, बुरे चालचलनका। बत्तीसी (हिं० स्त्री० ) १ बत्तीसका समूह। २ मनुष्यके बदचलनी (फा० स्त्री०) १ दुश्चिरित्रता, बदचलन होनेकी नीचे ऊपरके दांतोंकी पंक्ति जिनकी पूरी संख्या बत्तीस क्रिया या भाव। २ व्यभिचार । होती है। बदजवान (फा० वि० ) कटुभाषी, गाली गलौज करने- बथान ( हि पु० ) गोगृह, गायोंके रहनेकी जगह । वाला। बथुआ (हिं पु० ) जौ, गेहूं आदिके खेतोंमें होनेवाला बदजात ( फा० वि० ) नीच, ओछा। एक छोटा पौधा । लोग इसका साग बना कर खाते हैं। बदतमीज (फा० वि०) जो शिष्टाचार न जानता हो, गवार, इसकी पत्तियां छोटी छोटी और फूल घुडोके आकारके बेहदा । होते हैं जिनमें काले दानेके बीज पड़ते हैं। वैद्यकमें बदतर (फा० वि० ) किसीकी अपेक्षा बुरा, और भी बथुआ जठराग्निजनक, मधुर, पित्तनाशक, क्षार, अर्श और बुरा । कृमिनाशक, नेत्रहितकारी, स्निग्ध, मलमूत्रशोधक और बददियानती (फा० स्त्री०) विश्वासघात, धोखेबाजी, कफके रोगियोंको हितकारी माना गया है। बेईमानी । बद (फा० स्त्री०) १ गरमीकी बीमारीके कारण या यों बददुआ (फा० स्त्री०) अहित कामना जो शब्दों द्वारा प्रकट ही सूजी हुई जाँघ परको गिलटी, बाघी। २ चौपायों की जाय, शाप । को एक छूतकी बीमारी । इसमें उनके मुंहसे लार बदन (फा० पु०) शरीर, देह । बदन देखो। बहती है, उनके खुर और मु हमें दाने पड़ जाते हैं । ३ बदनतौल ( फा० स्त्री० ) मलखम्भकी एक कसरत । इसमें बुरे आचरणका मनुष्य, दुष्ट, नोच। ३ पलरा, एवज । हत्थी करते समय मलखम्भको एक हाथसे लपेट कर (वि.) ४ निकृष्ट, खराब । | उसीके सहारे सारा वदन ठहराते या तौलते हैं। इसमें बझमली (हि स्त्री०) राज्यका कुप्रबन्ध, हलचल। । सिर नीचे और पैर ऊपरकी ओर रहते हैं। Vol. AV, 41