पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२५४

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बसवास पसियाना अथवा ईश्वरके चरणों में स्थान पानेके लिये किसीकी भरणपोषणके लिये उन्हें लिङ्कायत समितिले तनखाह उपासना या यागयश, उपवास, तीर्थयात्रा आदि करनेकी मिलती है। बसवी परिचारिका और चलवड़ी परि- कोई आवश्यकता नहीं है। लिङ्गधारी नर नारी दोनों हो चारक नहीं रहनेसे लिगायत सम्प्रदाय अधूरा रह जाता बरावर हैं। पुरुषकी अपेक्षा स्त्रियोंको शक्ति किसी है। उनके कोई सन्तान नहीं रहने पर वे गोद ले प्रकार कम नहीं हो सकती। अतएव स्त्रियां विवाह- सकती हैं। योग्य होने पर अपने आप स्वामीको निर्वाचन कर सकती | बसह (हिं० पु० ) वृषभ, बैल। हैं। लिङ्गधारी शिवके उपासक जब सब समान हैं, तब बसहर–पञ्जाबप्रदेशके अन्तर्गत एक पार्वतीय राज्य । जातिभेदकी कोई आवश्यकता नहीं। लिङ्गधारी भक्त- यह अक्षा० ३१६ से ३२५ उ० तथा देशा० ७७३२ से गण किसी कामके करने पर कभी अशुद्ध नहीं हो सकते। ७६४ पू०के मध्य अवस्थित है । भूपरिमाण ३८२० जातकर्म, ऋतुधर्म, सूतक, पातक, उनको स्पर्श नहीं वर्गमील और जनसंख्या ८० हजारसे ऊपर है। इसमें कर सकता । मृत्युके बाद शिव-भक्तोंकी स्वर्गगति | ७० ग्राम लगते हैं। १८०३से १८१५ ई० तक यह राज्य होती है। वह पवित्र आत्मा फिर कभी नीचे नहीं आती, | गुरखा-सरदारके अधीन रहा। १८२५ ई०में अंगरेजोंके इसलिये उनको स्वर्ग प्राप्तिके लिये कोई भी अत्येष्टि | द्वारा गुरखा-प्रभाव क्षीण हो जाने पर यह स्थान पुनः किया करनेकी जरूरत नहीं। शिव ही एकमात्र जगत पूवतन राजकर पर समर्पित किया गया। १८४७ ई०में के कर्ता हैं। वे ही सब प्रकारसे लिङ्गधारियोंको रक्षा अङ्ग्रेजो ने निर्दिष्ट राजस्व घटा दिया। राजा समशेर- करते हैं । ज्योतिषशास्त्रोक्त प्रहदोष और भूतों का प्रभाव | सिंह बहादुर १८४६ ई०में राजसिंहासन पर अभिषिक लिङ्गयतोंके ऊपर नहीं चलता। हुए । ये राजपूतवंशीय हैं। युद्धके समय जरूरत पड़ने बसवास ( हि पु० ) १ निवास, रहना । २ निवास योग्य पर बसहरराजको अङ्गरेजोंकी सहायता करनी पड़ती है। परिस्थिति, रहनेका डौल या सुभीता। ३ स्थिति, रहने बसहरि-मध्यप्रदेशके सागरजिलान्तर्गत एक नगर । का ढंग। बसा (स. स्त्री० ) वसा देखो। बसवी-शिवोपासक रमणीमण्डलो। दाक्षिणात्यके धार- | बसा (हि स्त्री० ) १ बरे, भिड़, बरटी। वाड़ जिले में इस सम्प्रदायको बहुसंख्यक रमणियां देखी बसात (हि.पु०) विसात देखो। जाती हैं। बसबन्न और मल्लिकार्जुन इनके प्रधान बसाना (हि क्रि०) १ बसने देना, रहनेको ठिकाना देना। देवता हैं। धारवाड़ जिलेके प्रायः प्रत्येक ग्राममें उनकी २ स्थित करना, टिकाना, ठहराना। ३ जनपूर्ण करना, पूजा होती है । ये लोग मद्यपायी वा मांसभोजी नहीं हैं। आबाद करना। ४ बिठाना । ५ रखना। ६ वास देना। सभी निरामिष भोजन करते हैं। अलङ्कारादि पहननेमें बसालत्जङ्ग-दाक्षिणात्यके अदोनी प्रदेशके मुसलमान कोई रोक टोक नहीं है। गलेमें चांदीका लिङ्गधारण | शासनकर्ता, सलावत्जङ्ग के भाई। इन्होंने १७५६ ई०में और विभूतिमई न इन्हें अवश्य करना होता है। ये लोग बन्दिवासमें प्रथम युद्धके बाद फरासी-सेनापति खुसीके सबके सब परिष्कार परिच्छन्न, विनयी और आतिथेयी साथ मिल कर अगरेजोंका प्रभाव खर्व कर डालनेको हैं। जातीय सभा और विवाहादि कार्यमें ये गृहस्थ चेष्टा की थी। रमणियोंके साथ मिल कर शास्त्रीय क्रिया सम्पन्न करती बसिऔरा (हि.पु.) १ वर्षको कुछ तिथियां जिनमें हैं। बर और कन्याके सामने ये लोग बत्ती जला कर स्त्रियां बासी भोजन खाती और बासी पानी पीती हैं । २ आरती उतारती हैं। देवपूजाको परिचर्या और लिङ्गा- बासी भोजन। यतरमणी-सभाकी रमणियोंकी अभ्यर्थना करना इनका बसिया (हि. वि०) बासी देखो। प्रधान काय है। ये लोग विवाहादि करती हैं ; किन्तु बसियाना (हिं० कि० ) बासी हो जाना, ताजा न रह उपपति ग्रहणमें भी बाज नहीं आती । अपने अपने | जाना।