पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२६

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प्रेमिक-मष्यता २० प्रमिक (सं० पु० ) वह जो प्रेम करता हो, प्रेम करने प्ररणीय (सं० लि०) प्रईर-अनीयर् । १प्रेषणीय, भजने वाला। योग्य । २ प्रेरणा करने योग्य । किसी कामके लिये प्रवृत्त मिन ! सं० वि०) प्रेम अस्यास्तीति इनि । प्रेमी देखो। या नियुक्त करने लायक । प्रेमी (सं०१०).१ वह जो प्रेम करता हो, प्रेम करने- प्रेरयिता सं०१०) प्रेरणा करनेवाला, उभाडनेवाला। वाला। २ आशिक, आसक्त । २ भेजनेवाला। ३ आज्ञा देनेवाला। प्रेमीयमान- दिल्लीवासी एक मुसलमान-सम्तान । इन्होंने प्रेरित (सं० त्रि०) प्र-ईर-त । १प्रेषित, भेजा हुआ। 'अनेकार्थ' और नाममाला नामक दो उत्कृष्ट अभिधान २ उत्तेजित, जो किसी कामके लिये उभाड़ा गया हो । ३ अन्य बनाये हैं। इनका जन्मकाल १७४१ ई० माना धक्का दिया हुआ, ढकेला हुआ। जाता है। . प्रेरितृ (सं० त्रि०) प्र-ईर-तृच । प्रेरक, प्रेरणकारी। प्रेयामार्ग (सं० पु० ) वह मार्ग जो मनुष्यको सांसारिक : प्रवन (सं० पु०) प्रकर्षेण ईर्ते प्र-ईर गतौ (प्रनर-शदोस्तु- विषयों में फंसाता है, अविद्यामार्ग। टच । उण ४।११६) इति क्वनिप, तुड़ागाश्च । समुद्र । प्रेय (सं० पु० ) १ एक प्रकारका अलङ्कार। इसमें कोई प्रेवरी ( सं० स्त्री० ) प्रेवन (वगोरव । पा ४।१७) भाव किसी दूसरे भाव अथवा स्थायीका अङ्ग होता है। इति डीप रश्चान्तादेशः। नदी। (नि.) २ प्रिय, प्यारा। प्रेष ( सं० पु०) प्र-ईष-घम् । १ प्रेषण, भेजना।२ पीड़न, प्रेयर (अ॰ स्त्री० ) १ प्रार्थना, स्तुति । २ ईश्वरप्रार्थना । : - दुःख देना। प्रेयस् (सं० पु० ) अयमनयोरतिशपेन प्रियः प्रिय ईयसुन्, : प्रेषक (सं० लि०) प्र-ईष-ण्वुल । प्रेरक, भेजनेवाला । प्रादेशः । १ पति, स्वामी । संस्कृत पर्याय-दयित, ; 'प्रेषण (सं० क्ली० ) प्रेष-भावे-न्युट। १ प्रेरण करना । कान्त, प्राणेश, वल्लभ, प्रिय, हृदयेश । २ प्यारा व्यक्ति, २ भेजना, रवाना करना। प्रियतम। (त्रि.) ३ प्रिय, सबसे प्यारा। प्रेषयितृ (सं० वि० ) प्रष-णिच-तृच् । प्रेषयक, भेजने- प्रेयसी ( स० स्त्री०) प्रेयस-स्त्रियां छोए । प्रियतमा, वाला। प्यारी स्त्री। पर्याय-दयिता, कान्ता, प्राणेशा, वल्लभा, प्रेषित (सं० त्रि.) प्रेष-क्त। १ प्रेरित, भेजा हुआ। हृदयेश, प्राणसमा, प्रेष्ठा, प्रणयिनी। सप्रेरणा किया हुआ, उभाड़ा हुआ। (क्ली० ) ३ स्वर- प्रेयस्ता (सं० स्त्री० ) प्रेयसो भावः तल टाप् । प्रियता, साधनको एक प्रणाली। यह इस प्रकार है-सारे, रेग, प्रेयस्त्व । गम, मप, पध, धनि, निसा । सानि, निध, धप, पम, मग, प्रेयोपत्य (सं० पु० ) क्रौंच पक्षी। गरे, रेसा। प्रेरक (सं० वि० ) प्रेरणा करनेवाला, किसी काममें प्रेषितव्य (सं० त्रि०) प्रेष-तव्य । प्रेरणीय, भेजने- प्रवृत्त करनेवाला। योग्य। प्रेरण ( सं० क्ली०) प्र-ईर-णिच् ल्युट्। १ किसीको प्रष्ठ (सं०वि०) अयमेषामतिशयेन प्रिय इति इष्टन् प्रादेशः। किसी काममें लगाना, कार्य में प्रवृत्त करना। १प्रेषण, अतिशय प्रिय, बहुत प्यारा। भेजना। प्रेरणा (सं० श्री० ) प्र-ईर णिच (गयासश्रन्थो युच ।पा प्रष्ठा ( सं० स्त्री०) १ प्रेयसी, प्यारी स्त्री। २ जना, ३२२१०७ ) इति युच् । १ उत्तेजना देना, दबाव डाल जांध। रया उत्साह दे कर काममें लगाना। २ फलभावना, प्रेष्य ( सं० त्रि०) प्र.ईष-कर्मणि ण्यत् । १ प्रेरणीय, जो वधि । ३ दबाब, जोर। | प्रेषण करने योग्य हो। (पु०) २ दास, सेवक । ३ दूत । रणार्थक क्रिया (सं० स्त्री० ) क्रियाका वह रूप जिससे प्रेष्यकर (सं० त्रि०) प्रेष्य करोति क-ट। नियोगकारक, क्रयाके व्यापारके सम्बन्धमें यह सूचित होता है, कि वह नियोगकरनेवाला। की प्रेरणासे कर्त्ताके द्वारा हुआ है। प्रेष्यता ( सं० स्त्री० ) १ दासत्व । २ दूतत्व ।