पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२७

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प्रेस-बोटेस्टेण्ट प्रस (अ.पु.) १ वह कल जिससे कोई चीज दबाई या छिड़कनेवाला जल रहता है। २ कुशको मुद्रिका जो कसो जाय, पेंच। २ छापनेकी कल । ३ छापाखाना । होमादिके मय अनामिकामें पहनी जाती है। मुद्रायन्त्र देखो। प्रोक्षणीय (सं० वि० ) प्र उक्ष-अनीयर् । प्रोक्षणयोग्य । प्रेस-ऐक्ट (अ.पु.) वह कानून जिसके द्वारा छापे- प्रोक्षित ( स० त्रि०) प्र-उक्ष-क्त। १ निहत, मारा हुआ। खानेवालोंके अधिकारों और स्वतन्त्रता आदिका निय- २ सिक्त, सींचा हुआ। ३ जलका छींटा मारा हुआ। स्वण होता है। जो छापेखाने ऐसे नियमोंका भंग करते ४ वलिदान किया हुआ। (पु०) ५ यह मांस जो यज्ञके हैं, उन्हें इसी कानूनके द्वारा दण्ड दिया जाता है। लिये संस्कृत किया गया हो। ऐसा मांस खानेमें किसी प्रेसमैन ( पु०) वह जो प्रेस पर कागज छापता प्रकारका दोष नहीं माना जाता। "भक्षयेत् प्रोक्षितं मांसं सकृत् ब्राह्मणकाम्यया । प्रेसिडेंट (अं० पु०) किसी सभा या समिति आदिका दैवे नियुक्तः श्राद्ध वा नियमे तु विवर्जयेत् ॥" प्रधान, सभापति। (तिथितत्त्व) प्रेसिडेंसी ( स० स्त्री० ) १ प्रेसिडेंटका पद या काय, आरण्यक मृगादिपशुका प्रोक्षण आवश्यक नहीं है सभापतिका मोहदा। २ वृटिश भारतमें शासनको अर्थात् वन्यपशु अयशोय होने पर भी उसका मांस खाया जा सकता है। सुविधाके लिये कुछ निश्चित प्रदेशों या प्रांतोंका किया । ___"आरण्याः सर्वदैवत्याः प्रोक्षिताः सर्वशो मृगाः। हुआ विभाग। यह विभाग एक गवर्नर या लाटकी अधीनतामें होता है । बङ्गाल प्रेसिडेंसी, मदरास प्रेसि- अगस्त्येन पुरा राजन् मृगया पेन पूज्यते ॥" डेंसी और बम्बई प्रेसिडेंसी, ये तीन प्रेसिडेंसियां इस (तिथितत्त्व) प्रोक्षितव्य ( स० त्रि०) प्र-उक्ष-तव्य। प्रोक्षणयोग्य, जो समय भारतमें हैं। । प्रोक्षणके योग्य हो। प्रय (संपु०) प्रियका भाव, स्नेह, प्रेम। प्रोग्राम ( अं० पु० ) १ कार्यक्रम, होनेवाले कार्यों आदिका प्रयव्रत ( स० पु० ) वह जो प्रियवतके वंशमें हो। निश्चित कम। वह पत्र जिसमें इस प्रकारका कोई प्रेष (सं० पु०) प्र-इष-घञ् (प्र दृढोढ येषेप्येषु । पा ६।१।८६) : क्रम या सूची हो, कार्य-क्रम-सूचक पत्र । इत्यस्य वार्तिकोफ्त्या वृद्धिः । १ क्लेश, दुःख । २ मर्दन । प्रोच्चैस ( स० अव्य० ) अत्यन्त उच्च । ३ उन्माद, पागलपन। ४ प्रेषण, भेजना। ५ वह प्रोज्जासन ( स० क्ली० ) प्र-उद्-जस-णिच ल्युट् । शब्द या वाक्य जिसमें किसी प्रकारकी आज्ञा हो। मारण । प्रेष्य (स.पु.) १ दास, सेवक । २ दासत्व। ३ प्रोभित ( स० वि० ) प्र-उज्झ-कमणि-क्त । त्यक्त, छोड़ा प्रेष्यका भाव, दासकम । हुआ। प्रोक्त ( स० त्रि०) प्रकर्षेण उच्यते स्मेति क्त। १ प्रोझन ( स० क्लो०) प्र-उम्भ-ल्युट । प्रवर्जन, लोपन, कथित, कहा हुआ) (क्ली० )२ कहा हुआ वचन माजन । कहना। प्रोटेस्टेण्ट ( अं० पु० ) ईसाइयों का एक सम्प्रदाय । इसका प्रोक्षण ( सं० क्ली० ) प्र-उक्ष-सेचने ल्युट । १ यज्ञार्थ पशु-: आरम्भ यूरोपके १६वीं शताब्दीमें उस समय हुआ था हनन । यज्ञमें वधके पहले वलि पशु पर पानी छिड़क जब लूथरने ईसाई धर्मका संस्कार शुरू किया था। इस कर तब उसे वध करना होता है। २ श्राद्धादिमें उचित सम्प्रदायके लोग रोमन केथोलिक सम्प्रदायवालोंका और संस्कार, श्राद्ध आदिमें होनेवाला एक संस्कार । ३ वध, साथ ही पोपके प्रबल अधिकारोंका विरोध और मूर्ति- हिंसा। ४ सेचन. पानी छिडकना । ५ पानीका छींटा। पूजा आदिका निषेध करते हैं। कुछ दिनों तक यह ६ विवाहको परिछन नामक रोति । मत खूब बढ़ा चढ़ा था । अब भी ईसाई देशोंमें इस सम्प- प्रोक्षणी (सं०१०) १ यज्ञका वह पात्र जिसमें पशु पर दायके लोगोंकी संख्या अधिक है। Vol. xv. 6