पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२६३

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बहादुरशाह-बहादुरशाह श्म २५७ चांदबीबीको परास्त न कर सकने पर, तथा बीजापुर | वहां जा कर उन्होंने सुना, कि दीऊ द्वीपके पास ही एक और गोलकुण्डाकी सेनाके युद्धक्षेत्रमें पहुंच जाने पर यूरोपीय 'मीर बहरी' है। ये उनके नौ-सेनापतिकी हत्या मुरादको सन्धि करनी पड़ी। इस सन्धिकी शौके करनेकी मनसासे सेना ले कर उधर अग्रसर हुए। वहां अनुसार उन्हें चांदबीबीसे कुछ रुपये और बरारराज्य | पोत्तु गोजोंके शस्त्राघातसे बेहोश हो कर समुद्रकी गोदमें, प्राप्त हुआ था। १५६६ ई०में सन्धिपत्रके अनुसार १५३७ ई०में सदाके लिए सो गये। बीस वर्षको उनमें पहादुरशाह चावन्दके कारागारसे लाये गये और चांद राज्याधिकारी हो कर इन्होंने ११ वर्ष राज्य किया था, बीवीने इच्छा नहीं होने पर भी उन्हें सिंहासन पर अभि- इस प्रकार ३१ वर्ष की अवस्थामें इस युवकको मृत्यु किया। परन्तु अपने प्रिय आमात्य महम्मद खांको मन्त्रि- पद पर नियुक्त कर सुलतानाने बड़ी बेवकूफीका काम बहादुरशाह १म--(शाह-आलम बादशाह) मुगलसम्राट किया था। महम्मद णांकी क्षमता वृद्धिके साथ साथ श्म आलमगीरके द्वितीय पुत्र। पे अमीर तैमूरसे बारह चांदबीबीका प्रभुत्व घटता जाता था। उसी वर्ष महम्मद पीढ़ी नीचे थे। ( १०५३ हि० ) बरहनपुरमें इनका खांके दमनके लिये इब्राहिम आदिलशाहने चांदबीबीके जन्म हुआ था। युवराज मुआजिम या कुतुब-उद्दीन प्रार्थनानुसार सोहल खांको सेनाके साथ भेज दिया। शाह आलम नामसे इनकी प्रसिद्धि थी। १११४ हि में, चार मास तक दुर्ग अवरोध करने पर महम्मद सुल जब अहमदाबादमें पिताको मृत्यु हुई थी, तब ये काबुलमें तानाका आश्रय प्रहण करनेको बाध्य हुए। उस समय | थे। इनके छोटे भाई आजमशाह मौका पाकर राजधानीमें निहरु खाने मंत्री बन कर राजकार्य चलाया था। अपनेको भारत साम्राज्यका अधीश्वर घोषित किया। १६०० ई०में मुगलोंकी सेनाने अहमदनगर फ़तह उधर युवराज मुआजिमने भी काबुल में रहते हुए ही, कर बहादुरको परिवार सहित ग्वालियरके किले में बंद बाहादुरशाह नाम प्रहण कर राजमुकुट धारण किया था। रखा और वहीं पर उनकी मृत्यु हुई। इसके बाद दो राज्याधिकारको ले कर दोनों भाइयोंमें विवाद हुआ। एक वंशधर नाममात्रको राजा हुए थे। चांदबीवी, अकबर और निजामशाही देखो। दोनों पक्षों में युद्धकी तैयारियां होने लगीं। आगराके बहादुरशाह-बङ्गालके एक अफगानी शासनकर्ता, मह- पास धौलपुरमें दोनों तरफकी सेनाए इकट्ठी हुई और मूद शाहके पुत्र । ५ वर्ष स्वाधीनतासे राज्य करनेके (१११६ हिमें ) बड़ा भारी युद्ध हुआ, जिसमें राजपुल बाद ये १५३६ ई०में सलीम शाह द्वारा राज्यच्युत हुए आजम और उनके दो पुत्र बेदार वखत और बलाजा मारे गये। फिर इन्होंने राजदण्ड प्रहण कर ५ वर्ष तक राज्य किया। वजीर मुनाइम खां आदिको सहायताले बहादुरशाह (सुलतान)-गुजरातके एक शासनकर्ता, इन्हों ने दिल्ली, आगरा, जोधपुर, उदयपुर आदि राज्य श्य मुजफ्फर शाहके द्वितीय पुत्र। पिताकी मृत्युके हस्तगत किये थे। “शाह आलम बहादुर शाह"के नामसे समय पे जौनपुरमें थे, अतः इनके छोटे भाई महमूदशाह अपने ज्येष्ठ सहोदर सिकन्दर शाहकी हत्या कर राजा इन्होंने मुद्राङ्कन करा कर खुतवा पढ़वाया था। इनके राज्यके दूसरे वर्ष राजपुत महम्मद कामबक्स अपने बन बैठे। वहादुरको मालूम पड़ते ही उन्होंने अपने राज्यमें अधिकारसे च्युत हुए जिससे झुलफिकर खांकी प्रतिष्ठा लौट कर महमूदको सिंहासनसे उतार दिया और १५२६ | ईमें स्वयं पितृ-सिंहासन पर आरूढ़ हुए। १५३१ ई०में | बढ़ गई और इनके प्रयत्नसे महाराष्ट्रपतिने सरपेश- इन्होंने मालव जीत कर वहां के राजा सुलतान श्य मह- मुखी लेनेके लिए आवेदन किया था। मूदको बन्दी, फिर हत्या की थी। १५३६ ई०में सम्राट् इनके राजत्वके ३२ वर्षमें (११२१ हि में) गुरु गोविन्द हुमायूद्वारा पे मालवमें पराजित हुए और सम्राटको सिंहकी मृत्युसे उत्तेजित हो सिख लोग बन्दाकी अपी- अपना राज्य समर्पण कर काम्वेकी तरफ भाग गये। नतामें विद्रोही हो गये थे। किन्तु खान, बानाके प्रया- Vol xv. 5