पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२८

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पोदराज-मोहतूर प्रोढ़राज---काकतीय वंशीय वरंगुलके एक अधिपति, कर्तरि अच् वा। विकशित, अल्छी तरह खिला हुमा । सूर्यवंशीय घेत्मराज त्रिभुवनके पुत्र और रुद्रदेवके पिता। प्रोत्साह (सं० पु० ) प्र-उत्-सह-घम् । अतिशय उत्साह, इन्होंने १११०से ११६२ ई० तक राज्य किया था। इनकी बहुत अधिक उमंग। कोर्ति समूहके मध्य अपने नाम पर स्थापित जगति- प्रोत्साहक (सं० पु०) उत्साह बढ़ानेवाला, हिम्मत बाँधने- केशरी-तटाक ही प्रसिद्ध है। इन्होंने पश्चिम चालुक्य- वाला ।' राज ३य तैलपका राज्य दखल कर १म नैल नाम धारण प्रोत्साहन (सं० क्ली० ) प्रकर्षेण उत्साहनं। १ कर्तव्य- किया। कर्ममें अतिशय यत्न-सम्पादन, किसीके कर्त्तव्य कर्ममें प्रोढा (सं०स्त्री०) प्रौढा देखो। हिम्मत बंधाना या उत्तेजित करना । २ नाट्यालङ्कारभेद । प्रोण्ठ ( सं० पु० ) प्रकर्षेण अण्ठते निष्ठीवनादिकं प्राप्नो- प्रोत्साहित (सं० वि० ) प्रोत्साह-तारकादित्वादितच । १ तीति प्र-अठि-गती अन् । पतद्ग्रह, पीकदान, उगाल- : उत्साहयुक्त, जिसका उत्साह खूब बढ़ाया गया हो। २ उत्तेजित, जो खूब उत्तेजित किया गया हो। ३ प्रवर्तित, प्रोत (सं० क्ली०) प्र-वे-सूतौ-क्त यजादित्वात् सम्प्रसारणं। ठाना हुआ, चलाया हुआ। १ वस्त्र, कपड़ा। (त्रि०) २ खचित, किसीमें अच्छी तरह प्रोथ सं० पु० ) प्रोथते इति प्रोथ पर्याप्तौ ( सिवाय मिला हुआ। ३ स्यूत, सीया हुआ। ४ गुम्फित, गूंधा . प प्रायेण । पा ३३३३११८ ) इति घ, वा पुड़ गतौ (तिथपृष्ठ- छुआ। ५ प्रथित, गांठ दिया हुआ। ६ अन्तर्विद्ध। ७' गूथयूथमोथा । उण १।१२।) इति थक, निपातनात् गुणः । गर्भनिहित, छिपा हुआ। १ कटी, कमर । २ स्त्रीग, स्त्रीका गर्भाशय। ३ गत, प्रोतोत्मादन (सं० क्ली०) प्रोतेस्यूते सति प्रोतानां वस्त्राणां गड्ढा । ४ अश्वमुख, घोड़े का मुंह । ५ अश्वघोणा, घोड़े की वा उत्सादनं उत्तोलनं उच्चालनं वा यत्र । १ वस्त्रकुहिम, नाकके आगेका भाग । ६ पथिक, मुसाफिर । ७ शूकरका तंबू, खेमा। २ छत्र, छाता।

मुख, सूअरका थूथन । ८ शाटक, चिथड़ा । । हलका अग्र-

प्रोत्कट ( सं० वि० ) १ प्रकृष्टरूपसे उन्कट, बहुत कठिन । . भाग।१० नाभिके नीचेका भाग, पेडू । (त्रि०) १६ स्थापित, (पु० ) २ प्रिय वा श्रेष्ठ भृत्य । रखा हुआ । १२ भोषण, भयानक । १३ विख्यात, मश- प्रोत्कण्ठ ( सं० पु.) १ उन्नतकण्ठ, मुक्तकण्ठ । हर । प्रोत्कर्ष ( सं० क्ली० ) श्रेष्ठता, उत्तमता। प्रोथथ ( सं० पु० ) प्रोथ-बाहुलकात् अथ । अश्वमुखनिर्गत प्रोत्कृष्ट ( सं० क्ली० ) उच्चैःस्वर, गरजना। हृषा शब्द, घोड़े का हिनहिनाना । प्रोत्खात ( सं० क्ली०) खोदा हुआ, गड्ढा किया हुआ। प्रोथित ( सं० वि०) प्रोथ-क्त। भूगर्भनिहित, जमोनके प्रोत्तान (सं० त्रि०) प्रकृष्टरूपसे उत्तान, चितके भर लेटा । अन्दर गाड़ा.या छिपाया हुआ। हुभा। प्रोथिन् ( सं० पु० ) अश्व, घोड़ा। प्रोत्तङ्ग (सं० वि० ) अत्युम्नत, बहुप्त ऊँचा। प्रोगोर्ण ( सं० पु० ) प्रकृष्टरूपसे उद्गारित। उवमन, जो प्रोसेजित (सं० वि० ) अत्यन्त उत्तेजित किया हुआ, खूब · भीतरंसे बाहर आया हो । भड़काया हुआ। प्रोद्घोषणा ( सं० स्त्री०) उच्चैःस्वरसे घोषणा।। प्रोत्थित ( सं० नि , आधार पर रखा या टिका हुआ, प्रोहतूर-मन्द्राजप्रदेशके कड़ापा जिलान्तर्गत एक उप- ऊँचा किया हुआ। विभाग। भूपरिमाण ४७८ वर्गमील है। यहां प्रधानतः प्रोत्फल (सं० पु०) प्रकर्षण उत्फलतीति प्र-उत्-फल-अन्न् । नील और सईकी खेतो होती है । पेन्नर और कुन्दर नदीके वृक्षविशेष, ताड़की जातिका एक वृक्ष । पर्याय-सिहलां- किनारे धान भी अच्छा लगता है। गूल, छड़ी, छटा, पिञ्जा। २ उक्त उपविभागका एक प्रधान नगर । यह अक्षा. प्रोत्फुल ( सं० वि० ) प्रकर्षेण उत्फुल्ल प्र उत् कुल्ल-विकाशे १४४४ उ० और देशा० ७८.३३° पू०को मध्य अवस्थित