पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२७७

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२७१ बलादि-पहलपुर बहादि (संपु०) बहु आदि करके पाणिन्युक्त शब्दगण । मेण्टका राजकीय सम्बन्ध स्थापित हुआ। सन्धिपत्नमें गण यथा--बहु, पद्धति, अञ्चति, अङ्कति, अंहति, शकटि, शर्त यों थी, “गवर्मेण्ट आपद विपमें नवावको सहा. शक्ति, शारि, वारि, राति, राधि, अहि, कपि, यष्टि, मुनि, यता करेंगे और नवाब भी जरूरत पड़ने पर अगरेजोंको चण्ड, अराल, कृपण, कमल, विकट, विशाल, विसङ्कट, शत्र से लड़नेमें मदद पहुंचायगे । नवाबवंशधरगण भरुज, ध्वज, चन्द्रभाग, कल्याण, उदार, पूराण, अहन्, , यहांके एकमात्र अधिकारी रहेंगे। गवर्मेण्ट शासन कोड़, नख, खुर, शिखा, बाल, शफ, गुद, भग, गल और ! विषयमें कुछ भी छेड़छाड़ नहीं करेगी।" राग। प्रथम अफगान-युद्धमें नवाबने अङ्ग्रेजोंको खासी बहनशित्व (सक्लो०) १ वहाशिनो भावः त्व । बहु-: मदद पहुंचाई थी। १८४७ ई०के मूलतान युद्ध में उन्होंने भोजनकारीका काय वा भाव, बहुत भोजन। सेनापति सर हार्वर्ट एडवर्डिसके साथ मिल कर युद्ध बहाशिन् (सं. नि०) बहु अश्नातीति बहु-अश णिनि । बहु किया था। इस कार्य के पारितोषिक स्वरूप उन्हें ब्रिटिश भोजनशील, बहुत खानेवाला। सरकारकी ओरसे सब्जलकोट और भौङ्गप्रदेश तथा बह्वाश्चर्य ( स० वि०) बहु-आश्चर्ययुक्त । याजजीवन लाख रुययेकी वृत्ति मिली थी। उनकी बहीश्वर (सं० क्लो० ) नर्मदा तटस्थ एक पवित्र शैवक्षेत्र। मृत्युके बाद उनके इच्छानुसार य पुत्र राजा हुए; किन्तु बलपुर--पञ्जाबप्रदेशके अन्तर्गत एक सामन्तराज्य ।। उनके बड़े भाईने उन्हें राज्यच्युत करके सिहासन पर यह अक्षा० २७४ २ से ३० २५ उ० तथा देशा० ६६ कब्जा जमाया। अङ्ग्रेजोंका आश्रय पा कर ३य पुत्र बह- ३१ से.७४. १ पू०के मध्य अवस्थित है । भूपरिमाण वलपुरके राजस्वसे वत्ति पाने लगे। अगरेजोंके साथ १५६१८ वर्गमीलके करीब है जिनमें से १८८० वर्ग मील जो शर्त थीं उसे तोड़ देनेके कारण वे लाहोर दुर्ग में स्थान प्रदेश है। इसके उत्तर-पश्चिममें सिन्धु और आबद्ध हुए। यहां १८६२ ई०में उनका प्राणान्त हुआ। शतद् नदी बहती है। बड़े के यथेच्छाचार और उत्पीड़नसे तंग आ कर बहल नगरमें लुगी, सूफी आदि रेशमी कपड़े प्रजा १८७३ और १८६६ ई०में बागी हो गई । नवाब- बुननेका कारवार होता है। नील, रूई और धान्यादि ने वीरोचित साहससे दोनों ही दफा विद्रोहियोंको शस्य ही यहांका प्रधान वाणिज्यद्रष्य है। स्थानीय उपयुक्त शिक्षा दी थी। १८६६ ई०में षड़यन्त्रकारियोंने खेती-बारीकी सविधाक लिये नाना स्थानों में नहर काटी विषयोंगसे उनके प्राण ले लिये। पीछे उनका चार गई है। इण्डस भेली रेलवे लाइन इसी राज्य हो कर वर्षका लड़का सादिक महमद खाँ (४थे ) राजतख्त पर बैठा। बालक राजके शासनकालमें तथा पूर्वविद्रोहमें दुरानी साम्राज्यकी उच्छड्वलता और शाहसुजाके काबुल राज्यभर अशान्ति फैल गई थी। अङ्गारेज गवर्मेण्टने से भागने पर यहांके राजवंशके पूर्व पुरुष सिन्धुप्रदेशसे राज्यनाशकी आशङ्कासे बालकका राज्यकार्यभार अपने आ कर यहां स्वाधीनभावमें राज्य करने लगे। पञ्जाबमें हाथ ले लिया। पीछे १८७६ ई०में बालिग होने पर रणजिसिंहके अभ्युदयसे उर कर यहांके नवाब बहवल राज्यभार उन्हें लौटा दिया गया। १८७८-८० ई० खाने अङ्गरेजोंसे आश्रय मांगा । परन्तु अगरेज लोग उन्हें | अफगान-युद्धके समय नवाबने धनजनसे अगरेजोंको आश्रय देने राजी न हुए। १८०६ ई०में लाहोरमें जो सहायता पहुंचाई थी। १८६६ ई० में उनको मृत्यु हुई। सन्धि हुई उससे रणजितका शतद्र के दक्षिण सीमान्त पीछे महम्मद बहबल खाँ (५म ) राजसिंहासन पर गत स्थानों तक अधिकार कायम रहा। १८३३ ई० में अधिरूढ़ हुए। राज्य-सुख इनके भाग्यमें बदा नहीं था। वाणिज्य-व्यपदेशमें अन्रेजोंने नवाबके साथ संधि कर चार वर्ष समुद्रयालामें मक्काकी तीर्थयात्रा करते समय ली। फिर १८३४ ईमें शाहसुजाको काबुल-तख्त १९०७ ई०के फरवरी मासमें उनका प्राणान्त हुआ। पोछे पर बिठानेके लिये बहलपुर-राजके साथ अगरेज गव- उनके लड़के हाजी सादिक महम्मद खाँ अम्बासी राज-