पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/२९५

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बागलपुर-वागेवर ई० तक सुचारुरूपसे काम चलता रहा था। शहरमें पांच | वाग्देवी ठाकुरानीको पूजा करने माते हैं। प्रति शनि स्कूल हैं जिनमें से एक बालिकाके लिये है। और मङ्गलवारको यात्री समागम होते हैं। रघु- पागलपुर-मध्यप्रदेशके नरसिंहपुर जिलान्तर्गत एक नन्दनके भागिनेय महादेव मुखोपाध्यायके घंशधर यहांके नगा। . अधिकारी माने जाते हैं। बाग्देवी-प्रतिष्ठाके बाद यांद- बागलान-१ बम्बईके नासिक जिलान्तगत एक प्राचीन राय नामक किसी धनी व्यक्तिने यहां एक शिवालय राज्य । इसके पूर्व में चन्दोर, पश्चिममें सूरत और समुद्र, निर्माण किया। अभी चांदरायको अट्टालिका जङ्गलमें उत्तरमें सुलतानपुर तथा दक्षिणमें नासिक और लिम्बक | परिणत हो गई है। जङ्गल भी चांदरायका जङ्गल नाम- हैं। पहले यह राज्य ३४ परगनोंमें विभक्त था। यहांके | | से प्रसिद्ध है। नौ दुर्गामेसे शालहीर और मूलहीर नामक दो पहाड़ी- बागा ( फा० पु० ) अगेकी तरहका पुराने समयका एक दुर्ग दुर्भध थे। दाक्षिणात्यकी चढ़ाई करते समय औरङ्ग- पहनावा जो घुटनों तक लम्बा होता है और जिसमें छाती जेबने इस राज्य पर दांत गड़ाया था । तदनुसार उन्होंने पर तोन बंद लगते हैं, जामा । १६३७ ई में वहां एक दल सेना भेजो। मूलहीरपतिने बागास्रा-१ वम्बईप्रदेशके काठियावाड़ राज्यके अन्तर्गत आत्मरक्षाका कोई उपाय न देख दुर्गकी ताली मुगलों के एक छोटा सामन्त राज्य । यहाँके सामन्त गायकवाड़ पास भेज दो। १८१४ ई०को इरी जुलाईको मूलहीर- और जनागढ़के नवाबको राजकर दिया करते हैं। किला अंगरेजोंके हाथ लगा और बागलान राज्य खांदेशमें २ काठियावाडके अन्तर्गत एक नगर। यह अक्षा मिला लिया गया। इसके बाद यह नासिक जिलेके अन्त- २१२६ उ० तथा देशा० ७१ पू०के मध्य पुनकवाषसे भुक्त हुआ। १५ मीलकी दूरी पर पड़ता है। जनसंख्या ११७८ है। ___२ बम्बई के नासिक जिलेका एक तालुक। यह देवगाम देवलीके बलमन्च भायने इसे १५२५ ई में अक्षा० २०२६ से २०५३ उ० तथा देशा० ७३ ५१ से जीता। ७४२४ पू०के मध्य अवस्थित है । भूपरिमाण ६०१ वग- वागो ( अ० पु० ) वह जो प्रचलित शासन-प्रणाली अथवा मील और जनसंख्या ६० हजारसे ऊपर है । इसमें १५६ राज्यके विरुद्ध विद्रोह करे, विद्रोही, राजद्रोही। प्राम लगते हैं, शहर एक भी नहीं है। वर्षाऋतुके बाद बागीचा ( फा० पु०) उद्यान, उपवन । यहां मलेरियाका विशेष प्रकोप देखा जाता है। बागुर (हिं० पु०) पक्षी या मृग आदि फंसानेका जाल । बागवान ( हिं० पु०) बागबान देखो। इसका दूसरा नाम बागौर भी है। बागवानो ( हिं० स्त्री० ) बागवानी देखो। . बागेपल्ली-महिसुरके कोलर जिलेका एक तालुक। यह बागांचड़ा-नदिया जिलेके अन्तगत एक प्राम। यह अक्षा० १३३७ से १३ ५८ उ० तथा देशा०७७ ३६ शान्तिपुरसे ५ मील पश्चिम-उत्तरमें अवस्थित है। यह से ७८८ पू०के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण ४४७ स्थान गंगाके चरसे निकल कर क्रमशः जङ्गलमें परिणत वर्गमील और जनसंख्या ६५ हजारके करीब है। इसमें हो गया और वहां बहुतसे बाघ आदि बास करने लगे। २ शहर और ३७२ प्राम लगते हैं। इसो कारण 'बाघचर'-से इस स्थानका नामकरण हुआ बागेवाड़-१ बम्बई प्रदेशके कालादगी जिलान्तगत एक है। प्रसिद्ध तान्त्रिक रघुनन्दनका यहीं पर बास था । जन- उपविभाग। भूपरिमाण ७६४ वर्गमील है। साधारणमें वे पूर्णानन्दगिरि परमहंस नामसे प्रसिद्ध थे। २ उक्त उपविभागका एक नगर और प्रधान वाणिज्य- उनके बनाये हुए अनेक ग्रन्थ मिलते हैं, यथा-षट्चक्र । स्थान। भेद, वामकेश्वरतन्त्र, श्यामारहस्यतन्त्र, शाकक्रमतन्त्र बागेश्वर-युक्तप्रदेशके अलमोरा तहसीलका एक प्राम। और तत्त्वचिन्तामणि । अन्तिम प्रथ १४६६ शकमें यह अक्षा० २६ ५१ उ० तथा देशा० ७६ ४८° पू०के या गया था। यहां पर दूर दूर देशके लोग मध्य सरयू और गोमती नदीके मध्यस्थल पर अवस्थित ___Vo xv. 73