पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३२०

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बाप्पा-बायक दूध प्रतिदिन कोई पी लेता था, बाप्पाको इसका कुछ भी से चित्तौर आक्रमण कर अधिकार किया। राज्यप्राप्तिके पता नहीं चलता। एक दिन वे इसी ताकमें लगे और वाद ही वे मर ( मुकुट ), हिंदूसूर्य, राजगुरु, और सार्व- चुपकेसे गायके पीछे हो लिये। अनन्तर इन्होंने देखा-- भौम आदि उपाधिसे भूषित हुये थे। हिंदू और म्लेच्छ- वह पयस्विना संकीर्ण उपत्यका पथसे किसी एक बेतके महिलाओंके गर्भ से उनके अनेक सन्तान उत्पन्न हुई थी। वनमें घुसी ओर वहां एक ध्यानी योगीके सामगेमें प्रति- मारबाड़के अन्तर्गत क्षीरराज्यवासो गुहिलगण बाप्पाकी टित शिवलिङ्गके ऊपर अविरल अमृत पयोधारा बरमाने ही संतान हैं। लगो। वाप्पाके वहां उपस्थित होने पर योगीका ध्यान दलवार सरदारोंसे जो प्राचीन इतिहास-प्रथ टूट गया। इनके आलापसे संतुष्ट हो योगीश्रेष्ठने इन्हें मिला है उससे जाना जाता है, कि बाप्पाने वृद्धा- आशीर्वाद दिया। उसी दिनसे बाप्पा विशेष भक्तिके वस्थामें मुनिवृत्तिका अवलम्बन कर मेरुङ्गाके नीचे साथ योगिवरकी सेवा करने लगे। योगिवर हारीनने शेष जीवन विताया था। संन्यास-धर्मका अवलंबन नीतिशिक्षाका उन्हें उपदेश दिया। पीछे इन्हें शैवमंत्रमें करनेके पहिले उन्होंने काश्मीर, गांधार, इस्पाहन, इराक दीक्षित कर एक लिङका देवयान' ऐसी आख्या दी। इरान्, तुराण और काफ्रिस्तान प्रभृति अनेक प्रतीच्य अकृत्रिम गुमभक्ति और शिवोपासनासे वाप्पाने धर्म-: राजाओंको परास्त कर उनकी कुमारियोंका पाणिग्रहण का विशेष संजय किया। सिद्धि ममीपवत्ती हो गई और किया था। उन सब रमणियोंके गर्भसे बाप्पाके जो सन्तान अनायास ही इन्हें देवानुग्रह प्राप्त हुआ। उस कानना- उत्पन्न हुई वह नौशिरा और पठान तथा हिन्दू महिला. लयका परित्याग कर आने समय चित्तौरके अदूरवती गर्भजात पुत्र अग्नि उपासक सूर्यवंशी नामसे प्रसिद्ध नाहक मुगगगिरिप्रदेशमें प्रसिद्ध गोरक्ष नाथ ऋषिके : हुए। माथ इनका साक्षात् हुआ। योगीश्वरने इन्हें मंत्रपूत शिलालिपि और भट्टकवियोंके वर्णनकी सहायतासे एक खड्ग प्रदान किया। उसी खड़ गके द्वारा वे आगे महात्मा टाउने ७६६६ विक्रम संवत्में वाप्पाका जन्म- चल कर चित्तौर मिहासनलाभमें कृतकार्य हुए थे। काल स्थिर किया है। इससे मालूम पड़ता है, कि बाप्पा ___ उस समय प्रमार वंशीय मोरि राजगण चित्तौरका चित्तौरके राजसिंहासन पर ७४: संवत्में अधिरूढ़ राज्य करते थे। बाप्पाकी माता मोरिवंशीया थी। अतः । हुये थे। राजभवनकी कुलतालिकामें बाप्पावशधरोंके जो वे मामाके नातेसे मोरिराजके समीप उपस्थित हुए। नाम लिखे हैं उनके साथ आइतपुरके ध्वंसावशेषसे बहां राजाके अनुग्रहसे वे अनेक भू-संपत्ति प्राप्त कर प्राप्त १०२४ सम्बत्में उत्कीर्ण शिलालिपि वर्णित राजाओं सामन्त समझे जाने लगे। बाप्पाके प्रति राजाका सम के नाम मिलते जुलते हैं। धिक सम्मान देख कर अन्यान्य सामन्तगण जलने लगे। बाफ (हि.सी.) भाप देखो। आखिर ऐसी अधीनताको अमा जान सामन्तोंने राजाका बाफता (फा० पु.) एक प्रकारका रेशमी कपड़ा। इस परित्याग किया। इस समय शत्रमैन्यने चितौर पर पर कलाबत्त और रेशमकी बटियां होती हैं। यह दोकला आक्रमण कर दिया, पर वाप्पाके प्रवल पराक्रमसे वे सबके भी होता है । सब मारे गये। कहा जाता है, बाप्पा स्वराज्यापहारक ! बाब (अ० पु० ) १ पुस्तकका कोई विभाग, परिच्छेद । २ सलोमको पराजित कर गजनोके सिंहासन पर अधिरूढ़ मुकदमा। ३ तरह। ४ विषय । ५ आशय, अभिप्राय । हुये थे। पीछे इन्होंने पितृवैरी सलीमको कन्याका बावक-एक भण्ड ( भांड) मुसलमान। ८१६ ईमें . पाणिग्रहण किया। इसने अपनेको पैगम्बर बतलाया था। इसका प्रवर्तित चित्तौरसे लौटते समय इन्हें रोषतप्त राजपूत सामान्तों- धर्ममत किसीको नहीं मालूम रहने पर भी एक समय ने अपना अधिनायक बनाया। राज्यलिप्सा वल. इसने आजर-बइजान और इराकवासी सैकड़ों लोगोंको वती होनेके कारण इन्होंने विद्रोही सामानोंकी सहायता- अपने मतमें खींच लिया था। अपना धर्ममत फैलानेके