पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३५८

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१२ बालिद्वीप तन नेमयुन-राजकन्याके साथ पाणिग्रहण किया था। लनङ्गने राजसेना ले कर जेम्ध्रना प्रदेश पर आक्रमण इस विवाह-सूत्र में आवद्ध हो दोनों राजवंशोंने काशीमन किया और उसको जीता था। जदेराजवंशमें कोई सन्तान नामकी राजधानी बसाई थो । किन्तु इससे भी वे न थी, अतएव १८३० ई०में वे राजसिंहासन पर बैठे। संतुष्ट न हुये। उन्होंने पकेन बदोङ्ग प्रदेशमें जम्बेराज पर उनकी 'गुंडिक' पत्नीके गर्भसे दो पुत्र थे। ये पिताके आक्रमण कर उनको परास्त किया। बाद इसके उन्होंने जीवितकालमें 'पराकन' । राजपरिचारक) नामसे पुकारे वेनपस्सरमें राजधानी स्थापित की और वहीं पर अपना जाते थे। दरबार ले गये। काशीमनमें उनके दूसरे पुत्र राजा __ ये दो राजपुत्र नीचवंशमें उत्पन्न हुये थे, अतएव उनका करते थे। वे युद्ध होमें सदा फंसे रहे, अतएव अपनी राजा होना किसीने भी स्वीकार न किया। इसी बीच राजा सीमा बढ़ा न सके। देनपस्सरमें काशीमनराज अपने प्रभावको भी रखना देन पस्सर राजके तीन पुत्र थे। नन र मदे पञ्चुत्तन चाहते थे। देन-पस्सर और दूसरे भाई भी नीचशसे और ना र जम्बे देनपस्सर हीमें थे तथा द्वितीय नम्र र पैदा हुये थे, इसी कारण अनेक पुङ्गवन उनकी अधीनता काशीमन काशीमन् प्रदेश पर राज्य करते थे। दनपस्सर- स्वीकार न की । किन्तु काशीमनके अभ्युदय होने पर पञ्चु- राजा लोग 'देवतादि क्षत्रिय' इस उपाधिसे भषित होते त्तन-राजवंशमें उनका पूर्ण प्रभाव पड गया। बदोडराजके थे। ये जब गियान्सर और तवानानके सामान्तों के साथ देनपस्सर और पञ्चुत्तन राजवंशके वे ही मुख्य अभिभावक मिल गये तो इन्होंने मार्ग, मंगुइ आदि राजाओंको अपना समझे जाते थे । वर्तमान पञ्चुत्तन-राजका अभिषेक नहीं सामन्त बनाया । इस प्रकार दक्षिणस्थ चार सामन्त होता; किन्तु घे पिताकी मृतदेहके जलनेके बाद सम्पूर्ण राज्यने एकत्र हो १८२६ ई० तक करङ्ग असेम और बोल- विधि करनेके अधिकारी हैं। किन्तु देनपस्सरके राजा लेग राज्यके साथ विपक्षता की थी। अब भी पितृदेहको जला नहीं सकते। वे समस्त आत्मीय ना मदे पञ्चुत्तनके बाद देनपस्सर-राजवंशमें मृतदेहको प्रासादमें रखते हैं । मृतको अवस्था और राजा काशीमन ही सबसे ज्यादा प्रतिभाशाली तथा परा मर्यादाके अनुसार उसको अन्त्येष्टि क्रिया भी होती है। क्रमी थे। उन्होंने अपनी भुजाओंके पराक्रमसे देनपस् बालिद्वीपकी प्रधान पुङ्गवगणकी वंशावली नीचे उद्धत सर और काशीमनमें एकछत्र राज्य किया था। उन्होंने की जाती है। नम्ररमदे पञ्चुत्तनके पुत्र नप रजदे ओकाको देनपस्सरके वदोङ्गराजवंश सिहांसनसे हटा कर तथा निर्वासित कर स्वयं राजदण्ड गोष्ठा न रवोला धारण किया था। जदेओका बदला लेनेके लिये बन बन घूमने लगे और में गुई आदि देशवासियोंको अपने अनक अंगुङ्ग पदेदेकन पक्षमें करनेके लिये कोशिश करने लगे। अन्तमें इन्होंने बहुत बड़ी सेनाके साथ काशीमनकी इकलौती लड़कीको गोष्ठी वहयनतेग गोष्ठीन्यामनतेग गोष्ठी कटूटकदे हर कर उसके साथ विवाह कर लिया। इस विवाहसे गोष्ठीनप्र रजम्बेमिहिक सब झगड़ा टंटा मिट गया सही, पर वृद्ध काशीमनने देनपस्सरमे अपनी प्रभुता अक्षु पण रखनेके लिये खूब अनक अंगुङ्गजदे गलोगोर अनक अंगुङ्गतलरिज़बटू प्रयास किया था । क्रोटक (पञ्णुत्तनमे) ___ पञ्चुत्तन नगुर जदे देवतादि-उकिरणके वंशमें उनके यहीसे गानोगोके राजवंशकी उत्पत्ति हुयी पुत्र देवतादि और उनके बाद देवतादि-गदोङ्ग राज्य पर अभिषिक्त हुये। इन्होंने काशीमनके पिता जौर भाइयोंके न रशक्ति गोष्ठोमदेतगल गोष्ठी कटूटतलव (५०० स्त्री) विरुद्ध बहुत युद्ध किपे थे। उनके भाई अनकमगुग-।