पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/३८५

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बासिष्ठो-बाहड़ी ३७६ ३ उक्त उपविभागका एक तालुक। यह अक्षा० पठारी राजा और महम्मदगढ़ : पूर्वमें सौगर जिला और १६.५२ से २०२५ उ० तथा देशा०७५४० से ७७२८ भोपाल तथा दक्षिणमें भी भोपाल है। पू०के मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण १०४६ वर्गमील और १८वीं शताब्दीमें कोरवैवंशके महम्मद दिलेर खाँ जनसंख्या १७७२५० है। इस तालुकमें बासिम नामक नामक एक बारकजै फिरोज खेल-अफगानने इस राज्यको एक शहर और ३२४ प्राम लगते हैं। यहांकी जमीन स्थापित किया। उनकी मृत्युके बाद यह राज्य उनके बहुत उपजाऊ है। दो लड़कोंमें विभक्त हुआ। बड़े लड़केके हिस्सेमें कोरवै __४ उक्त तालुकका एक शहर। यह अक्षा २०१७ पड़ा। छोटे लड़के अहसन-उल्ला खां पहले ग्वालियर- उ० तथा देशा० ७७११ पू०के मध्य अवस्थित है। राज्यके राख और पोछे बहादुरगढ़में बस गये । किन्तु बहु प्राचीन कालमें वत्स नामक किसी ऋषिने इस नगर मराठोंसे तंग आ कर वे १७५३ ई०में अपनी राजधानीको को बसाया। उन्हीं के नामानुसार यह स्थान बच्छ- बासोदामें उठा लाये । १८१७ ई०में यह राज्य सिन्धिया- गुलिन नामसे प्रसिद्ध था। पीछे लोग उसके अपभ्रशमें के हाथ लगा, पर अंगरेजोंके दबावसे १८२२ ईमें फिर बासिम कहने लगे। नगरके बाहर पनातीर्थ नामक लौटा दिया गया। एक पुण्यसलिला पुष्करिणी है। प्रवाद है, कि बासुकि अहसन उल्लाकी १७८६ ई०में मृत्यु हुई । पीछे नवाब नामक कोई राजा इस पुष्करिणीमें स्नान कर कुष्ठरोगसे बकाउल्ला खां और आसद अली खां राज्याधिकारी हुए। मुक्त हुए थे। उसी माहात्म्यके लिये आज भी सैकड़ों वर्तमान सरदारका नाम हैदर अली खाँ है। ये १८६७ कुष्ठरोगी इसमें स्नान करने आते हैं। १७वीं शताब्दीमें ईमें राजगद्दी पर बैठे। इनकी भी उपाधि नवाब है। बासिमके देशमुखोंने मुगल सम्राट्से काफी जमीन और इस राज्यमें कुल २३ प्राम लगते हैं। राजस्व १६००० रत्न पाया था। नागपुरके भोंसलेके बाद यहां निजाम रु. है। यहांकी जमीन खूब उपजाऊ है। राजाने सेनानिवास और टकसाल खोली थी। भोंसलेके २ उक्त राज्यकी एक राजधानी। यह अक्षा० २३. सेनापति भवानी कालू- प्रतिष्ठित बालाजीका मन्दिर और ५१ उ० तथा देशा० ७७५६ पू०के मध्य अवस्थित है। पुष्करिणी देखने लायक है। जनसंख्या १८५० है। यहां एक सरकारी डाकघर, बासिष्ठी (हिं० स्त्री० ) बन्नास नदीका एक नाम । कहते कारागार, एक स्कूल और एक निकित्मालय है। हैं, कि बसिष्ठजीके तप-प्रभावसे ही वह नदी प्रकट बासोली- काश्मीर राज्यके अन्तर्गत एक भूभाग और उस हुई थी। देशका एक नगर। यह अक्षा० ३२३३ उ० स्था देशा० बासी (हिं० वि०) १ जो ताजा न हो, ढेरका वना हुआ। ७५२८ पू० के मध्य हिमालयके दक्षिण इरावती नदोके २ जो सूखा या कुम्हलाया हुआ हो, जो हरा भरा न हो। किनारे अवस्थित है। १७२५ ई०में यह स्थान सिखोंके ३ जिस पेड़से अलग हुऐ ज्यादा देर हो गई हो । ४ जो अधिकारमें आया। कुछ समय तक रखा रहा हो । ५ बसनेवाला, रहनेवाला। बासौंधी (हिं० स्त्री० ) बसौंधी देखा। पासोदा-मध्यभारतके भोपाल एजेन्सीके अन्तर्गत एक बास्त (सं० वि०) वस्त वा छागसम्बन्धीय । सामन्तराज्य। भूपरिमाण ४० वर्गमील और जनसंख्या | वास्तायन (सं० पु०) वस्तका गोत्रापत्य । पांच हजारके करीब है। यहांके सामन्तगण पठान- वाह ( स० पु०) बाहु, बाह । वंशीय और नवाब-उपाधिधारी हैं। १७वीं शताब्दीमें बाह (हिं० पु०) खेतको जोतनेकी क्रिया, खेतकी जोताई । भो के राजा वीरसिंहदेवने बासोदा नगरको बसाया वाहट-एक प्रन्धकार । मल्लिनाथने रघुवंशटीकामें इनका था। यह राज्य नवाब-बसोदा नामसे मशहूर है। इस नामोल्लेख किया है। राजाके पश्चिममें टोडराजाका सिरजों जिला और ग्वा- वाहड़ी (हिं० स्त्री० ) वह खिचड़ी जो मसाला और कुम्ह- लियरका कुछ अंश ; उत्तरमें मध्यप्रदेशका सौगर जिला, डौरी डाल कर पकाई गई हो।