पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/४५५

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बुधमापी-पाष्टमी माङ्गलिक कार्योंका अनुष्ठान करते हैं । जगदमें वार्ता बुधहाटा---खुलना जिलेका एक प्रसिद्ध प्राम। यह अक्षा और नयी मात्र अविकल रहते हैं। मनुको न्यायदण्ड- : २२.३२ उ० तथा देशा० ८६.१२ पू०के मध्य अवस्थित नोति अच्छी तरह विराजित होती है। बुध अपने वर्ष : है। यहां सब प्रकार के द्रव्योंका वाणिज्य होता है। अथवा मासमें पृथ्वी पर हास्यज्ञ, दुत, कवि, बालक, नपु-: यहांके भग्नप्राय १२ शिवालय बटन प्रसिद्ध हैं। प्रति. सक, युनिश, सेनु, जल और पर्वतनिवासियों को तृप्ति वर्ष रासयात्रा, दुर्गा और कालीपूजाके उपलक्षमै यहां नया पृथ्वीको औषधियोंसे भरपूर कर देते हैं। बड़ा मेला लगता है। (वृहत्सं० ५६।१०-१०) । बुधा ( म स्रो० ) बोधयति रोगिणं या बुध ( इगुपधेति । बुधजामो : हिं० पु. ) चन्द्रमा, बुधके पिता। पा। ३।१।१३५) इति कस्तनष्टाप । जटामांमो। घुधतात ( सं० पु.) ) बुधस्य प्रहविशेषस्य तानः पिना। बुधान (म पु०) बोधयति बुध्यते वा बुध बोधने चन्द्रमा। ( युधियुधि दृशः किन्न । उगाह) इति आनच किच। बुधदिन ( स० क्ली० ) बुधवार देखो । १ गुरु। २ विज्ञ । ३ ब्राह्मवादी । ४ प्रियवादी। बुधदैवज्ञ -वर्ष प्रदीपके प्रणेता, कृष्ण के पुत्र । ५कवि । बुधपुर-- मानभूम जिलेके अन्तर्गत एक प्राचीन ग्राम । यह बुधाना --१ युक्तप्रदेशके मुजफ्फरनगर जिलेफी तहमील । अक्षा० २१.५८ १५० उ० और देशा० ८६ ४४ पू०के यह अक्षा० २९' १२ से २६ २६ उ० तथा देशा० ७७ मध्य कसाई नदीके किनारे अवस्थित है। यहाँ तथा यहां से ७७४२ पू०के मध्य अवस्थित है । भूपरिमाण २८७ से २ कोस उत्तर पाकबीड़ा प्राममें अनेक जैन-मन्दिरों वर्गमील और जनसंख्या दो लाखके करीव है । इसमें और तीर्थङ्करादियोंकी प्रतिमूर्तियां भग्नावस्थामें इधर : कन्धला और बुधाना नामके २ शहर तथा १४६ प्राम उधर पड़ी नजर आती हैं। बुद्धपुर देखो। लगते हैं। बुधरन (सं० क्ली० ) बुधप्रियं रत्न शाकपार्थिवादित्वात् २ उक्त तहसोलका एक नगर । या, अक्षा० २६१७ समासः। मरकतमणि। उ० और देशा० ७७२० पू० मुजफफर मगरसे १६ मील बुधवार ( सं० पु०) बुधस्य वारः । बुधग्रहका दिन, ' दक्षिण-पश्चिममें अवस्थित है। जनसंख्या प्रायः ६६६४ सात बारोंमेंसे एक वार । इस वारमें शुभ कार्यादि किये है। १८५७ ई०के गदर में विद्रोहियोंने इस पर अधिकार जाते हैं। इस दिन उत्तर और दक्षिणकी ओर यात्रा . जमाया, पर पोछे अङ्गजोंने उनका दमन कर इसे पुन- नहीं करनी चाहिये। इस वारमें जन्म लेनेसे जात रुद्धार किया। बालक गुणी, क्रियाकुशल, मतिमान, विनीत, मृदुस्वभाव बुधाष्टमी (सं० स्त्री०) बुधवारयुता अष्टमी, शाक पार्थिवा और कमनीयमूर्ति का होता है। दित्वात्समासः। व्रतविशेष, बुधवारमें अष्टमी होने पर "गुग्णी गुणशः कुशलः क्रियादौ विलासशीलो मतिमान् यह व्रत किया जाता है। चैन, पौष तथा हरिशयन- विनीतः। कालको छोड़ अन्य मामोंमें इस व्रतको करना चाहिये। मूदुस्वभावः कमनीयमूर्ति बुधस्य वारे प्रभवो मनुष्यः ॥" निदितकालमें यदि बुधाष्टमी को जाय, तो पुगकृत (कोष्ठोप्र०) . पुण्यका बिनाश होता है। बुधसानु (सं० पु.) १ पर्ण। २ यक्षपुरुष । "पतङ्ग मकरे याते देवे जाग्रति माधये । बुधसिंहशर्मा - मूलतानवासी एक ज्योतिर्विद । १७६६ ई० : बुधाधमी प्रकुर्वीत बर्जयित्वा तु चैत्रकम् ।। में इन्होंने ग्रहणदर्श और प्रबोधिनी नामक उसकी टीका प्रसुप्तं तु जगमार्थ सन्ध्याकाले मधौ तथा । लिखी। ये यशोवन्तके पुल और गोपालके पौत्र थे। बुधाधमीं न कुर्षीत कृत्वा इन्ति पुराकृतम् ।।" बुधसुत (संपु०) बुधस्य सुतः पुत्रः। १ पुरुरवा । (वतकालविवेक) बुधस्य बुद्धस्य पुनः। २बुद्धके पुत्र राहुल । कालशुद्धिमें शुक्ल वा कृष्णपक्षकी भष्टमी में बुधवार Vol. xv, 113