पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/४६१

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


बुन्देला-बुमूषा अग्रसर हो उन्होंने पहिले दलिलके शिविर पर आक्रामण : गुमान सिंह इम पर बड़े बिगड़े और उन्होंने कर दिया । अतर्कित अवस्थामें आक्रमण करनेसे मुमल जैतपुर राज्यको मष्टभष्ट करनेका हुन संकल्प किया। मानी-सेना भी आत्मरक्षामें समर्थ न हुये। युद्धमें उन-१७६१ ई०में कुन्द लाके समीप दोनों लेनामें घोरतर को हार हुई। जयलाभके बाद उल्लसित सैन्यमण्डली युद्ध हुआ । इस युद्ध में गुमान सिंह स्वीय मित्र मशाल जला कर राजाको भूपतित देहकी तलाश करने . नवाव नजफ बांके माथ पगस्त हुये। १७६५ ई०में लगा। शषम शिविर लानक बाद गनाक यनले गजा मृत्युशय्या पर शायित हो पहाइसिहने गुमानसिंहको होशमें आये। कहला भेजा, 'मैं ममारका परित्याग कर चला जा दलिल खाँकी मृत्यु और पगभवसे निरुद्यम न हो। रहा ह, यदि तुम्हारी इच्छा हो, तो मसैन्य हमारे ऊपर महम्मदने फिरमे बुदेलम्बराड़ पर आक्रमण कर दिया। आकमण कगे।" पहाइमिट कुलपहाडमें रह निज इस बार निरुपाय देव जगत्गय पेशवा बाजीरावसे सम्पत्तिका विभाग कर रहे थे। इमी ममय वहां गुमान महायताके लिये प्रार्थना की। बाजीगवने कृतकार्यके और उनके भाई सुमानसिह उपस्थित हुये। उन्होंने पारितोपिक म्वरूप बुंदेलम्वण्डके कितने ही प्रदेश पाये थे। . गुमानको बांदा और समानको बारम्याडीका गजपद इस स्थानसे चौथकर संग्रहपूर्वक वै मस्तानी नामकी प्रदान किया। एक मुसलमान बालिकाको अपने माथ ले गये। इमो इसके बाद बुन्देला राजाओंकी विशेष प्रतिपत्तिकी ग्मणीके गर्भसे समशेर बहादुरका जन्म हुआ था। कथा मालूम नहीं । महागद्रके अभ्युदय कालमें ये १८१५ सम्बतमें । १७५८ ईमें ) जगनायका माउ- महका रूपके युद्धकार्यमें ध्यान थे। हिम्मत वांका नगरमें देहान्त हुआ। उनकी मृत्युके पहले उनके पुत्र विवाह और अंग्रेज समागम तथा महाराष्ट्र युद्धानिका कीर्तिमिहकी मृत्यु हो गयी थी और कोनिके प्रार्थनानु। विषय बुन्देलखण्डमें विवृत हुआ है। मार उन्होंने अपने पौत्र कीर्तिके पुत्र गुमानसिंहको वुवुकना ( हि० कि० ) जोर जोरम गेना, डाढ़ मारना। 'दीवान सिरोही' पद पर अभिषिक्त किया। __राजा जगत्रायकी मृतदेह ले उनके पुत्र पहाड़सिंह .बुबुकारी । हि० क्रि० ) उच्च स्वरसे क्रन्दन करना। का जैतपुर में चले आये। पहले उन्होंने घोषणा कर दो, कि कुछ र बुबुधान ( सं० पु० । १ आचार्य । २ देव । ३ पगिउन । बुबुर ( सं० स्त्री० । उदक, जल । गजा मृत्युरोगसे शायित हो रहे हैं, उनको मुक्तिका और डर कोई उपाय नहीं है। इस शवदेहको वे अपने घर में रख बुभुक्षा ( म०स्त्री० ) भोक्तुमिच्छा भुज इच्छाथै मन्, स्वयं मिहासन लाभकी आशामें यडयन्त्र रचने लगे। बुभुक्ष धातु (भः प्रत्ययात् । 'पा ३।३।५००) इति अस्सताए। गुमानसिंहके बदलेमें उन्हींको सिंहासन पर अभि. क्षुधा, खानेकी इच्छा। षिक्त करनेके लिये चे सेनापतियोंको घूस भी देने लगे। बुभुक्षित । म त्रि०) बुभुक्षा भोजनेच्छा साताऽस्य ( नदस्य मंजातं तारकादिभ्य इतन्त्र । पा ५३६ ) क्षुधित, कुमार कडिसिंह, सेनापत् और वीरसिंह देव आदि जिसे भूम्ब लगी हो। ( मनु १०।१०५) उनकी ओरसे गुमानके विरुद्ध युद्ध करनेके लिये राजी बुभुन ( मं० वि० ) भोक्तुः मिच्छु भुज सन-उ। भोजन पहाड़सिंहका सिंहासनाधिकार और राजा जगत्- करनेमें इच्छुक । रायका मृत्युसंवाद पा गुमानसिंहने दूत भेज अपना प्राप्य बुभूरे ( म० लि. ) विभत्तमिच्छुः सन-उ । भग्ण करनेमें जैत रका सिंहासन पानेके लिये अनुरोध किया किंतु इच्छुक । पहाडसिंहने इसे सुनो अनसुनी कर कहला भेजा, कि बुभूषक (सं० वि० ) बुभूष-कन् । यशको इच्छा रग्वने- अपने पिताके सिंहासन पानेके वे ही एक मात्र अधिकारी वाला । हैं। पुनके रहते पौत्रका कोई भी अधिकार सिंहासन बुभूषा ( सं० स्त्री०) भवितुमिच्छा भू-सन्, अ, राप्। पर नहीं हो सकता। । यशकी इच्छा रखना।