पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/४९०

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४८९ बेगमपुर-बेगमाबाद यहां सम्राट औरङ्गजेवको कुमारी कन्या बेगामीका ! काश्मीरको एक युवती नर्तकीको देख कर उस पर मोहित समाधि-मन्दिर विद्यमान है। जव औरङ्गजेब दाक्षि- हो गये और आखिर उससे विवाह कर ही लिया। णात्य जीतनेकी इच्छासे हम प्रामके दूसरे किनारे मयान- : वही रमणी आगे चल कर बेगम समरू नामसे मशहूर पुरमें छावनी डाले हुए थे, उसी ममय उस कन्याकी मृत्यु हुई थी। इस कारण औरङ्गजेबने इस स्थानका ___ स्वामीको मृत्युके बाद बेगम समरू स्वामीके अर्जित अपनी कन्याके नाम पर बेगमपुर माम रखा। यहां सरदानहा राज्यको अधीश्वरी ।। १७८१ ई०में वह खादाका छोटा मोटा कारवाना है। . कैथलिक गिर्जामें हृष्ट-धर्मसे दीक्षित हुई। अनन्तर बेगमपुर यशोहर जिला तर्शन एक समृद्धिमम्पन्न गण्ड-! उसने १७९२ ई०में पुनः मूसो ले बाई-सिउ नामक किसी ग्राम। यहां बहुतसे वि शीय ईसाइयोंका वास है। फरासी अदृष्टान्वेषीसे विवाह किया। यह व्यक्ति अपने स्थानीय अधिकांश मनुष्य हो काहे खुन कर अपना स्वभावके दोषसे प्रजावर्गका अप्रिय हो उठा । सभी गुजाग करते हैं। प्रजाने विद्रोही हो कर रिनहार्डके पुत्र जाफर याव खाँ- बेगमसमरू काश्मारवामिनो एक मुसलमान रमणी।। के नेतृत्वमें वाइसिउका काम तमाम करनेकी ठानी। यह सामान्य नर्तकीमे अपने अदृष्ट गुण और बुद्धिके सुचतुरा समरूने प्रजावर्गके मनोवादसे अपना सर्वनाश बलसे राजमहिषी हो गई थों । फ्रान्स राज्यके द्रिभस : उपस्थित देख नवपरिणीत स्वामीको आत्महत्या करनेकी पलोवामो वालटा तिराई नामक एक फरासो युवक सलाह दी। बाइसिउके निहत होने पर जार्ज टामस नौ सेनादल में सूत्रकारका काम करता था। कुछ समय ! नामक बेगमके एक विश्वस्त कर्मचारीने विद्रोहका दमन बाद नौसेनाके साथ वह भारतवर्ष आया। यहाँग्मे वह ; किया। १८०२ ई में जाफरयायको मृत्यु हुई। उसकी नौविभागका परित्याग कर विभिन्न स्थानोंके देशीय कन्याके एकमात्र पुत्र डेभिड अक्तरलोनी डाइस सोम्न - सामन्त राजाओंके अधीन काम करने लगे। बङ्गालके को येगम समरू अपनी मृत्युकं वाद १८३६ ई०में अपनी नवाब मीरकाशिमके अधीन निगरो नामक जो आर्मेणोय : सम्पत्तिका उतराधिकारी बना गई । उसने कैथलिकधर्म- सेनापति था, रिनहाई शुभ अवसर देख कर उसके मन्दिरों तथा विद्यालयों के लिये प्रायः तीन लाख चौहत्तर अधीन सेनाविभागमें भत्ती हो गया। मीर काशिमके हजार रुपयेका दान किया था। कौशलसे पटनामें जो अहरेज कैद रखे गये थे उनकी : बेगमसुलतान - एक मुगल-राजकुल-ललना। आगरेके इति- हत्या कर रिनहार्ड नवावका प्रिय हो गया था सही, पर माद उद्दौलाको मसजिदके बगलमें इसका समाधिमन्दिर- थोड़े ही दिनोंके अन्दर अङ्गजोंसे नवावकी दुर्दशा और विद्यमान है। इस समाधिमन्दिरके गावसंलग्न शिला- पतन अवश्यम्भावी जान कर उसने वङ्गालका परित्याग फलकमें लिखा है, कि सम्राट् हुमायूके समय १५३८ किया और भरतपुर राज सरकारका आश्रय लिया। यहां ईमें उनकी समाधि हुई। यह शेख कमालकी कन्या थो। भी वह सरदारका काम छोड़ कर नजफ खाँके अधीन बेगमहम्मद (तोकबाई) सम्राट अकबर शाहके एक सेना- सेनानायकके कार्यमें भनी हआ। ११७८ ई में उसकी नायक। मृत्यु हुई और आगरा नगरमें दफन किया गया। बेगमाबाद -युक्तप्रदेशके मेरठ जिलेका एक नगर। यह नजफ खा देखो। अक्षा० २६ ५४ ३८” उ० तथा देशा० ८१ ५३ ३५०पू०- कोई कोई कहते हैं, कि रिनहार्डने अङ्ग्रेजी समाइर्स के मध्य मेरठ सदरसे १४ मील तथा दिल्लीसे २८ मील ( Summer - ) नाम ग्रहण किया था । यही कारण है, दूर प्राण्डद्रङ्क रोड नामक रास्ते पर अवस्थित है। करीब कि इतिहासमें यह समरू नामसे प्रसिद्ध है। उसने डेढ़ सौ वर्ष हुए ग्वालियरकी राजमहिषी रानी बालाबाई- विभिन्न राजसरकारमें तथा शेषकालमें नजफ खाँके अधीन ने यहां एक सुन्दर देवमन्दिरकी प्रतिष्ठा की थो । नगरके कार्य करके प्रचुर सम्पत्ति अर्जन की थी। एक दिन वह बाहर नगरस्थापयिता नवाब जाफरअली द्वारा प्रतिष्ठित