पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/६२

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फ़रशबद-फराजी फ़रशवद (फा० पु०) वह ऊंचा और समतल स्थान फरहरना (हिं० कि० ) १ फरफराना, फरकना। २ फह- जहां फ़रश बना हो। राना, उड़ना। फ़रशी ( फा० स्त्री० ) १ फूल, पीतल आदिका बना हुआ फरहरा (हि० पु० ) १ पताका, झंडा। कपड़े आदिका बरतन । इसका मुंह पतला और संकरा होता है। वह तिकोना वा चौकोना टुकड़ा जिसे छड़के सिरे लगा इस पर लोग नैचा, सटक आदि लगा कर तमाकू पीते कर झडी बनाते हैं और जो हवाके झोंकेसे उड़ता रहता हैं। २ वह हुफ्का जो उक्त वरतन पर नैया आदि लगा है। (वि०) ३ स्पष्ट, अलग अलग । ४ शुद्ध, निर्मल । ५ कर बनाया गया हो। प्रसन्न, खिला हुआ। फ़रसा (हि.पु.) १ तेज और चौड़ी धारकी एक फरहरी ( हिं० स्त्री० ) फल। प्रकारकी कुल्हाड़ी । यह प्राचीनकालमें युद्ध में काम आती फरहा (हि० पु०) धुनियोंको कमानका वह भाग जो चौड़ा थी। - होता है और जिस परसे हो कर तांत दूसरी छोर तक फरसी ( हि स्त्री० ) फरी देवी। जाती है। इसका आकार बेने-सा होता है और धुनते समय आगे बढ़ता है। फरहटा ( हि पु.) चौड़ी और पतली पटरियां जो चरखी आदिके बीचकी नाभिसे बांध कर या गाड़ कर फरही ( हिं० स्त्री० ) लकड़ीका वह चौड़ा टुकड़ा जिस पर ! ठठेरे बरतन रख कर रेतीसे रेतते हैं। बड़े बलमें लगाई जाती है, फरहा । फरा मथुराजिलेका एक नगर। यह अक्षा० २७ १६ फरहत ( अ० स्त्री० ) १ आनन्द, प्रसन्नता। ३ मनः- . उ० और देशा० ७७°४६ पू० यमुना किनारेसे प्रायः शुद्धि। । १ मील दूर तथा मथुरासे १३ मोल दक्षिणपूर्वमें अवस्थित माहिए०) वडालमें समुद्र के किनार हानवाला है। पहले यहां तहसीलका सदर था। एक पेड । यह पेड़ थोड़े दिनमें बढ़ कर तैयार हो जाता फरा ( हि० पु० , एक प्रकारका व्यञ्जन। इसके बनानेके है और न वहुत बड़ा और न बहुत छोटा, मध्यम लिये पहले चावलके आटेको गरम पानी में गूंध कर आकारका होता है। इसमें पहले कांटे निकलते हैं, पर उसकी पतली पतली बत्तियां बटते हैं और फिर उन जब यह बड़ा होता, तब उससे जो छिलके उतरते हैं उसीके बत्तियोंको उबलते हुए पानीकी भापमें पकाते हैं। साथ सभी काटे जाते रहते हैं। अन्तमें स्कन्ध बिल- फराकत (फा०वि०)विस्तृत, आयत । २ फरागत। कुल चिकना हो जाता है। परन्तु डालियों के कांटे दूर फरागत देखो। नहीं होते, वे सब दिन रह जाते हैं। जिस प्रकार ढाक फराख (फा०वि०) विस्तृत, लंबा चौड़ा। पेडको एक नालमें तीन तीन पत्तियाँ होती हैं, उसी प्रकार फराखी ( फार स्त्री० ) १ विस्तार, चौड़ाई । २ आन्यता, इसमें भो। इसके फूल लाल और सुन्दर होते हैं। सम्पन्नता । ३ घोड़े का तंग। यह उसकी पीठ पर कंबल फूलोंके झड़ते ही फलियां लगती है । फूला तथा छालस गरदनी आदि डाल कर या यों हो उस पर लगाया जाता लाल रंग निकाला जाता है। छालको कूट कर है। यह चौडा तसमा या फोता होता है और उसके दोनों बोसो जाती है। इसको लकडी फटती वा सरों पर कड़े लगे रहते हैं। चिटकती नहीं और नरम तथा साफ होती है। पुरा- फरागत ( अ० स्त्री० ) १ मुक्ति, छुटकारा । २ निश्चिन्तता, णों में इसे पञ्च देवतरुमें माना है। पारिभद्र देखा। बेफ़िकी। ३ मलत्याग, पाखाना फिरना। फरहर (हिं० वि० ) १ जो एकमें लिपटा या मिला हुआ न फ़राज़ (फा० वि० ) ऊंचा। हो, अलग अलग हो । २ शुद्ध, निर्मल । ३ तेज, चालाक। फराजी--मुसलमानोंका धर्मसम्प्रदायविशेष । फरिदपुरके ४ जो कुछ दूर दूर पर हो । ५ स्पष्ट, साफ। ६ प्रसन्न, अन्तर्गत दौलतपुरनिवासी हाजी सरितुल्लामे इस नये हराभरा। मतका प्रवर्तन किया। महम्मदीय कुरान शास्त्रके प्रसिद्ध