पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/७१९

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महा-भद्रकारक ७१३ भहा (हिं० पु०) १ जिसकी बनावटमें अंग प्रत्यंगकी ८६१८४० से ८० पू०के मध्य अवस्थित है । भूपरिमाण सापेक्षिक छोटाई बड़ाईका ध्यान न रखा गया हो । २ जो १०६ वर्गमील है। भद्रक, वासुदेवपुर, धर्मनगर और देखने में मनोहर न हो, बेढंगा। . चांदवासी यहांके प्रधान वाणिज्यस्थान हैं। भहापन (हिं० पु०) भद्दे होनेका भाव। २ उक्त विभागका सदर और प्रधान नगर । यह भद्र (सं० क्लो०) भन्दते इति भदि कल्याणे ( मृज्वन्द्राग्र- : अक्षा० २१३ १० उ० तथा देशा०८६३३ २५ पू०के वन विप्र कुछ चुत्र खुर भद्रोग्रेति । उण २।२८) इति रन् निपा- मध्य विस्तृत है। कलकत्तासे कटक जानेके रास्ते पर स्यते च ।१मडल, क्षेमकुशल । २ ज्योतिषोक्त बब आदि। स्थापित होनेके कारण यह एक वाणिज्यकेन्द्र में गिना करके सप्तम करण। ३ महादेव । ४ खञ्जरीट. खंजन जाता है। पक्षी । ५ वृषभ, बैल । ६ कदम्बक, कदंव । ७ करिजात- भद्रक - सह्याद्रिवर्णित एक हिन्दूराजा । ये लोग अम्बादेवो- विशेष, हाथियोंकी एक जाति जो पहले विन्ध्याचलमें के भक्त और वृद्धविष्णु मुनिके कुलजात थे। होती थी। ८ नवशुक्ला-वलान्तर्गत जिनभेद । ६ वामन्चर । (सह्याद्रिख० ३३।७८ ) १० सुमेरु । ११ स्नुहो । १२ चन्दन । १३ साध्य-मौलिकों में भद्रक दाक्षिणात्यके सुगवंशीय एक राजा। की पद्धतिविशेष। (पु.) १४ वसुदेवके एक पुत्रका में भद्रक (सं० क्ली०) भद्र-संज्ञायां स्वार्थे वा कन् । १ भद्रमुस्तक, नाम । ( भाग ६।२४।४६ ) १५ सरोवविशेष । १६ तृतीय नागरमोथा । २ देवदारु । ३ वृत्तरत्नाकरोक्त छन्दोभेद । उत्तममनुके अन्तरमें देवगणभेद । १७ पुराणानुसार स्वायंः । ३ इसके प्रति चरणमें २२ अक्षर रहते हैं। इस छन्दके भुव मन्वन्तरके विष्णुसे उत्पन्न एक प्रकारके देवता जो १, ४, ६, १२, १६, १८, २२ अक्षर गुरु, शेष लघु होते हैं। तुषित भी कहलाते हैं । १८ पर्वतभेद। १६ कर्मविभाग- ५ एक प्राचीन देशका नाम । ५ चना, मूग इत्यादि अन्न। स्थ मध्यदेशवासी मनुष्य । २० सुर्वण, सोना। २१ भद्रकण्ट ( स० पु०) भद्रः कण्टो यस्य । गोक्षुर, गोखरू । मुस्तक, मोथा । २२ दिकहस्तिविशेष, उत्तरदिशाके भद्रकन्या ( स० स्त्री० ) मौद्गल्यायनको माता। दिग्गजका नाम । २२ रामचंद्रकी सभाका वह सभासद

भद्रकपिल ( स० पु० ) शिव, महादेव ।

जिसके मुंहसे सीताकी निन्दा सुन कर उन्होंने सोताको । भद्रकर्ण ( स० पु० ) भद्रस्य वृषस्य कर्णो यल। गोकर्ण- वनवास दिया था। २४ विष्णुका वह द्वारपालजो उनके रूपतीर्थभेद। दरवाजे पर दाहिनी ओर रहता है । २५ एक चोलराजका में भद्रकणिका ( स. स्त्री० ) गोकर्णकी दाक्षायणीका एक नाम । नाम । २६ बलदेवजीके एक सहोदर भाई । २७ एक भद्रकर्णेश्वर ( स० पु० ) भद्रकर्णस्य ईश्वरः। १ गोकर्ण- प्राचीन देशका नाम । २८ विष्णुके एक पारिषदका नाम । । तीर्थस्थित शिवलिङ्गभेद । स्त्रियां ङीष् । २ तीर्थभेद । २६ रामजीके साखाका नाम। ३० स्वरसाधनको एक भद्रकल्पिक ( स० पु०) पक बोधिसत्त्वका नाम । प्रणाली जो इस प्रकार है: -सा रे सा रे ग रे, ग म ग, म भद्रका ( स० स्त्री० ) इन्द्रयव। प म, प ध प, ध नि ध, नि सा नि, सा रे सा । मा नि भद्रकाम ---मणिकूट पर्वतके पूर्वदिकस्थ तीर्थभेद । सा, नि ध नि, ध प ध प म प, म ग म, ग रे ग, रे सा भद्रकाय (सं० पु० ) १ नाग्नजितीके गर्भसे उत्पन्न रे, सा नि सा । ३१ ब्रजके ८४ बनोंमेंसे एक वन । (त्रि०) श्रीकृष्णके एक पुत्रका नाम । (त्रि०) २ मङ्गलदेहक । ३ ३२ सभ्य, सुशिक्षित। ३३ कल्याणकारी। ३४ श्रेष्ठ । सुन्दर आकृतियुक्त। ३५ साधु । भद्रकार (सं० त्रि०) भद्रं करोति कृ-अन् उपपद स०। भद्र (हि पु० ) सिर, दाढ़ी, मूछों आदि सबके सब | १ मङ्गलकारक । (पु०) २ एक प्राचीन देशका नाम बालोंका मुंडन। जिसका उल्लेख महाभारतमें आया है। भद्रक-१ बङ्गालके बालेश्वर जिलान्तर्गत एक उप- भद्रकारक (स० वि०) भद्रस्यकारकः। मङ्गलकारक, विभाग । यह अक्षा० २०४४ से २१.१५ उ० तथा देशा०, कल्याण करनेवाला । Vol, XV, 179