पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/७२७

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भद्रा-मद्राचल ७२१ उत्पन्न हुए थे। (भाग०) २७ काक्षीवानकी एक कन्या भद्रा---मध्यप्रदेशके बालाघाट जिलान्तर्गत एक सामन्त जो व्युषिताश्वको व्याही थी। विवाहके कुछ समय बाद राज्य । भूपरिमाण १२८ वर्गमील है। १८वीं सदीके हो ये विधवा हुई। व्युषिताश्वने अपने शवमें आवि. : शेष भागमें लञ्जीके सूवादारने यह भूसम्पत्ति पठान- भूत होकर अपुत्रग के गर्भ में पुत्र उत्पादन किया था। वंशीय जैनउद्दीन खाँको जमींदारी शर्त पर प्रदान की। ( भारत आदिपर्ण १।१२१ अ० ) २८ सुभद्राका एक नाम । वह सरदारवंश आज भी इस सम्पत्तिका भोग कर रहा २६ विष्टिभवा । कृष्णपक्षकी तृतीया, दशमीके शेषाद्ध, है । बेला प्राममें सरदारका आवास-भवन विद्य- सप्तमो और चतुर्दशीके पूर्वाद्ध, शुक्लपक्षकी एकादशी। मान है। और चतुर्थीके शेषाद्ध तथा अष्टमी और पूर्णिमाके भद्राकच्चाना--एक बौद्ध भिक्षु धर्माचारिणो । पूर्वाद्ध को विष्टिभदा कहते हैं। कर्कट, सिंह, कुम्भ और भद्राकरण ( स० क्ली० ) भद्र डाच, कृल्युट। मुण्डन, मोनराशिमें भद्रा होनेसे पृथ्वीमें ; मेष, वृष, मिथुन और सिर मुंडाना। वृश्यिकराशिमें होनेसे स्वर्गलोकमें तथा कन्या, धनु, भद्राकापिलानी--बौद्धधर्मावलम्बिनी एक भिक्षु-रमणी। तुला और मकरराशिमें होनेसे पाताललोकमें विष्टिभदा- ये सभी मठस्थोंको धर्मोपदेश दिया करती थीं। का अवस्थान होता है। स्वर्गमें विष्टिभदाके रहने के समय भद्राकुण्डलकेशा-- बौद्धभिक्षुणीभेद। जो कोई कार्य किया जाता है, वह अवश्य सिद्ध होता | भद्राङ्ग ( स० पु०) भद्रमङ्गमस्य । बलराम । है, पातालमें रहनेके समय धनागम और मर्त्यलोकमें भद्राचल-१ मन्द्राज प्रदेशके गोदावरी जिलान्तर्गत एक रहने के समय सभी कार्य विनष्ट होते हैं। भद्राके | तालुक। यह अक्षा० १७२७ से १७५७ उ० तथा शेष तीन दण्डका नाम पुच्छ है । इस पुच्छमें समस्त देशो० ८०.५२ से ८१ ४६ पू०के मध्य अवस्थित है। कार्योकी सिद्धि होती है। विष्टिभदाके समय यात्रा भूपरिमाण ६११ वर्गमील और जनसंख्या ५० हजारके अथवा और कोई शुभकार्य नहीं करना चाहिये। करीब है। इसमें भदाचलम नामक एक शहर और ३२० विष्टिभद्रा देखो। ग्राम लगते हैं। ३० पिङ्गलमें उपजाति वृत्तिका दशवां भेद । ३१ १८६० ई०में जब निजामने इस स्थानको अङ्गरेजोंके. कामरूप प्रदेशकी एक नदीका नाम । ३२ बाधा, अड़- हाथ समर्पण किया, तब यह गोदावरी कलेकृरोकी एजेन्सीमें मिला लिया गया। १८७४ ई० में रेकपल्ली भद्रा-१ महिसुरराज्यके अन्तर्गत एक नदी। तुङ्गानदीके और रम्पाप्रदेश इसके अन्तर्मुक्त हुए। साथ मिल कर यह तुगभद्रा नामसे बहती है। पश्चिम- | २ उक्त तालुकका एक प्रधान नगर। यह अक्षा० घाट-पर्वतमालाके गङ्गामूलाशिखरके पाददेशको धोती १७१४ उ० तथा देशा० ८१ पू०के मध्य अवस्थित है। हुई यह कदूर जिलेमें आई है और दक्षिणको ओर घूम इस नगरकी तटभूमि हो कर खरस्रोता गोदावरी नदी कर कुदालीके समीप तुङ्गामें मिलती है। इसके दोनों बहती है। निकटस्थ एक पर्वतशिखर भद्डूर यज्ञकुण्ड पार्श्ववत्तीस्थान वनमाला और पर्वतपरिशोभित है। नामसे प्रसिद्ध है। यहां जो रामचंद्रजीका मंदिर है, वह बेड़ीपुरके निकट इस नदोके ऊपर एक पुल बनाया गया दाक्षिणात्य-वासियोंके निकट एक पवित्र तीर्थ समझा है। पुराणादिमें भी इस भद्रा नदीका उत्पत्ति-आख्यान जाता है। प्रवाद है, कि कपिकुलको साथ ले कर देखनेमें आता है। बराहरूपी विष्णुफे दक्षिण दन्त द्वारा भगवान् रामचन्द, लङ्का जाते समय गोदावरी पार कर भद्राकी उत्पत्ति हुई है। तुङ्गभद्रा देखो। इस स्थान पर ठहरे थे । उन्होंके उस शुभागमनके स्मर. २कामरूपके अन्तर्गत एक महामदो। यह अजद-: नदके ऊध्र्व में अवस्थित है। इस नदीमें भादमासकी। . नार्थ आज भी नगरवासिगण वर्णमें एक वार महामेला- शुक्ला चतुदशीको स्नान करनेसे स्वर्गलोकको प्राप्ति होतो का आयोजन करते हैं। ऋषि-प्रतिष्ठ नामक किसी है। (कालिकापु० ७८३२) ३ नदीविशेष । । साधुपुरुषने चार सदी पहले इस मन्दिरको पहिले पहल Vol. xv. 181 चन।