पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष पंचदश भाग.djvu/९८

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फिरता-फिरदौसी पहले पहल यहां उपनिवेश बसाया। वे लोग पहले और ये ही पहले पहल उस बृहत् प्रन्थको कवितामें आराकनके अधीन सैनिकवृत्ति करते थे। मुगल-सेनापति प्रथित करनेके लिये नियोजित हुए। हुसेनबेगने जब आराकनराजधानी चट्टग्राममें घेरा डाला, इस समय फिरदौसी अपनी जन्मभूमि तुष नगरमें तब वे लोग नौकरी छोड कर बङ्गाल भाग आये। फिर- : कवितादेवीकी सेवा करके जयश्री और यशोलाभ कर गियोंके यहां बस जानेके कारण इस स्थानका फिरङ्गी-। रहे थे। वे कवि दकीकीकी चेष्टासे अच्छी तरह जान बाजार नाम पड़ा है। वाणिज्यकी उन्नतिके कारण एक कार थे। सुलतान महमूदका महदभिप्राय भी उन्होंने समय यह नगर विशेष समृद्धिशाली हो उठा था। उस सुना था । अभी सौभाग्यक्रमसे उन्हें एक बास्ताननामा समय इसका आयतन भी छोटा नहीं था। ढाकाके हाथ लगा। कठोर परिश्रम करके उन्होंने समस्त प्रन्थ बाणिज्यकी अवनतिके साथ साथ यह स्थान भी श्रीहीन । भली भांति समझ लिये । थोड़े ही दिनोंके अन्दर हो गया है। जुहाक और फरिदन-युद्धके आधार पर उन्होंने एक फिरता ( हि० पु० ) १ वापसी। २ अस्वीकार। वि०). खण्डकाव्य निक'ला जिसका आदर घर घर होने लगा। ३ वापस, लौटाया हुआ। ____ उस खण्डकाव्यकी सुख्याति सुलतान महमूदके कानों- फिरदौसी एक प्रसिद्ध महाकवि । इनका प्रकृत नाम में पहुंची। उन्होंने फिरदौसीको बुलषा भेजा । सुलताम- अबुलकासीम हसन-विन शरफशाह था । गजनीके का आज्ञापालन कर फिरदौसी गजनी पहुंचे। उनके आग- सुलतान महमूदके आदेशसे 'शाहनामा' नामक मनसे सुलतानने अपनेको धन्य, कृतार्थ और उनके पाद- फारसी ग्रन्थ लिख कर ये जगद्विख्यात हो गये हैं । शाह- स्पर्शसे राजधानीको पवित्र हुआ समझा । कविकी सम्ब- नामाकी रचना किस प्रकार हुई और फिरदौसीने किस ना किससे करेंगे, ऐसी उन्हें एक भी चोज न मिली। प्रकार प्रसिद्धि प्राप्त की, उसका विषय शाहनामाके मुख- सुलतानने कविवरको वास्तान-नामाके आधार पर अपने वंधमें इस प्रकार लिखा है -- पूर्वपुरुषोंकी अनुपम कीर्ति कवितामें लिखनेका आदेश ___ पारस्यके शासनीय राजा यजदेजादने कैमूरवंशसे किया और प्रति हजार स्वर्णमुद्रा देनेका वचन दिया । खुसरो-वंशीय राजाओंका विवरण संग्रह करके अपने कविने भी कहा था, कि जब तक वे ग्रन्थको शेष न कर उद्यम और तत्त्वावधानसे 'सियारउल मुल्क' वा वास्तान-; लेंगे तब तक एक कौड़ी भी ग्रहण न करेंगे। नामा नामक एक इतिहास सङ्कलन कराया था। महम्मद तीस वर्षके परिश्रमके वाद ६०००० श्लोकोंमें उनकी के शिष्योंने जब पारस्य राज्यको विदलित करनेकी चेष्टा शाहनामा सम्पूर्ण हुई। किन्तु इस समय सुलतानका को, उस समय यजदेजाके पुस्तकागारमें वह ग्रन्थ वह उत्साह, अनुराग और प्रतिज्ञा कहां गई ! पुस्तक पाया गया था। १०वों शताब्दीमे शासनवंशीय किसी सम्पूर्ण तो हो गई, पर सुलतानने अपना वचन पूरा न राजाने न्कीकी नामक एक कविको उक्त महाग्रन्थका किया, आशा दे कर चिर निराशामें कविवरको बहा दिया। उद्धार करनेका भार सौंपा। किन्तु १००० श्लोक लिखने-, कविने सुलतानके आचरण पर कटाक्ष करके मर्मभेदी के बाद ही वे अपने कृतदासके हाथके शिकार बने । इसके आक्षेपमें ग्रन्थका उपसंहार लिखा । सुलतानने शाहनामा- बाद किसीने में उक्त ग्रन्थके उद्धारकी चेष्टा न को। में अपने चरित्रकी समालोचना देख आखिर ६० हजार भाखिर संयोगवशतः एक खण्ड वास्ताननामा गजनी- स्वर्णमुद्राके बदले में ६० हजार रौप्य दिरहम भेज दिया। पति सुलतान महमूदके हाथ लगा। गजनीपतिने उस ' जिस समय उनका आदमी रुपयेकी गठरी बांध कर फिर- ग्रन्थसे सात विषय ले कर मात कवियोंको एक एक दौसीके यहां पहुंचा, उस समय धे स्नानागारमें थे। उन्होंने कविता ग्रन्थ लिखनेका हुक्म दिया। उन कवियोंमेंसे उस मुदाको स्वयं ग्रहण न किया, क्रोध और घृणासे अपने कीन प्रधान हैं, इसकी परीक्षा करना हो सुलतानका भृत्योंके बीच छिड़क दिया। वजीरके परामर्शसे सुल- उद्देश्य था। उनमेंसे कवि अनसारिईको पुरस्कार मिला। तानने ऐसा काम किया है, जब यह उन्हें मालूम हुआ,