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हिन्दुवों में यह बहुत छोटे समझे जाते हैं। डोमों और हाड़ियों को छोड़ दूसरी कोई जाति इनका छुवा पानी नहीं पीती। कादर भुइयों और कहारोंका अन्न खा लेते हैं, किन्तु वह लोग इनका अन्न ग्रहण नहीं करते। यह लोग गोमांस, शूकरमांस, मुरगा तथा चूहा खाते और मद्यादि भी पी जाते हैं। कभी कभी कांते और कुल्हाड़ीकी पूजा होती है।
कादर हिन्दू होते भी अपर असभ्य जातियोंकी भांति कुसंस्काराच्छन्न हैं। इनमें कितने ही लोग विश्वास करते कि कुछ विशेष शक्तिसम्पन्न अपदेवता उनकी चारोओर रहते हैं। उन देवताओंमें अनेक इनके पूर्व पुरुषों के आत्मा होते हैं। दूसरे लोगोंके विश्वासानुसार अपदेवता कहीं नहीं, फिर भी नदी पर्वतादिसे शक्ति उद्भूत होती है। उसकी कोई मूर्ति वा प्रतिमा मानी नहीं जाती। कहीं थोड़ीसी रंगी मृत्तिका और कहीं एक खण्ड सिन्दूरलेपित प्रस्तर खण्डमात्र भगवान्के उद्देशसे मार्गके मध्य प्रतिष्ठित रहता है। उक्त सकल प्रतिष्ठित देवतावोंमें कारूदानो, हर्दियादानो, सिमरादानो, पहाड़दानो, मोहन, दूया, लिलू, परदोना इत्यादि प्रधान हैं। इनके मतमें लोग समझ नहीं सकते उक्त अपदेवता कौन कौन शक्ति रखते हैं। कादरोंके कथनानुसार उक्त सकल अपदेवतावोंकी पूजामें अवहेला करनेसे देशमें नाना अमङ्गल होते हैं। पूजाके समय यह लोग शूकरशावक, छागल, कबूतर, और मुरगा काट कर चढ़ाते हैं। शस्यकी शिखा और घृतादिका उत्सर्ग किया जाता है। इनके देवता जहां स्थापित रहते, उन कुञ्जोंको सरना कहते हैं। नापित ही इनके पुरोहित हैं। उपासक पूजाका द्रव्य खाते हैं। यह अपनेको हिन्दू बताते और परमेश्वर महादेव, विष्णु प्रभृति नामोंपर विश्वास लाते हैं।
दाक्षिणात्यके कादर पर्वत विभागमें वास करते हैं। वह पुलियार और मालय आरसार जातिपर प्रभुत्व चलाते हैं। कभी कभी तोप और युद्ध सज्जादि वहन करते भी दासादिके कार्य्यसे अलग रहते हैं। पल्लेदार कहनेसे बुरा मानते हैं। वह बड़े विश्वासी, सत्य-
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वादी और बाध्य होते हैं। कुञ्चित केशोंका बंधाव रहता है। वनसे हरिद्रा, अदरक, मधु, मोम इलायची, रीठा, माजूफल इत्यादि संग्रह कर चावल और तम्बाकूके साथ बदलते हैं। वह अंगरेजी जंगलसे जो चीज लाते, उसका महसूल नहीं चुकाते। कोचिनराजके अधिकृत वनभागसे इलायची संग्रह करनेके लिये केवल वार्षिक १००) रु० राजस्व देते हैं। कादर वनमें पथ प्रदर्शक का कार्य्य करते हैं, किन्तु कभी बोझ नहीं ढोते।
कादलेय (सं० त्रि०) कदलेन निर्वृत्तम्, कदल-ढञ्। कदल निर्मित, केलेका बना हुवा।
कादा (हिं० पु०) जहाज़की एक पटरी। यह शहतीरों और कड़ियोंके नीचे लगती है।
कादाचित्क (सं० त्रि०) कदाचित् भवम्, कदाचित्-ठञ्। समय पर होनेवाला, जो कभी कभी हो।
कादाचित्कता (सं० स्त्री०) कादाचित्कस्य भावः, कादाचित्क-तल्-टाप्। कदाचित् उत्पत्ति।
कादिपुर—अवध प्रदेशके सुलतानपुर जिलेकी एक तहसील। यह अक्षा० २५°५८' ३०" से २६°२३' उ० और देशा० ८२°९' से ८२°४४' पू० तक अवस्थित है। इसके उत्तर अकबरपुर तहसील, पूर्व आज़मगढ़ जिला, दक्षिण पट्टी तहसील और पश्चिम सुलतानपुर तहसील है। भूमिका परिमाण ४३९ वर्गमील है। यहां सुलतानपुर और जौनपुरकी सड़क आ मिली है। राजकुमार जमिन्दार हैं। ब्राह्मण बहुत रहते हैं। तहसीलको छोड़ थाना और स्कूल भी है। एक देहाती बैंक खुला है। बाज़ार बहुत छोटा है। भूमि समान-गुणविशिष्ट है। नाले चारो ओर लगे हैं। बड़ी नदी पर पुल बंधा है।
कादियान—बोरनिओ द्वीपवासी एक अनार्य जाति। आजकल इस जातिने मुसलमान धर्म ग्रहण कर लिया है। कादियान ही बोरनियो द्वीपके आदिम आदिवासी हैं। यह सरल और शान्तिप्रिय हैं। इनकी स्त्रियाँ अधिक सुश्री होती हैं।
कादिर—१ शैख़ अब्दुल क़ादिरका उपनाम। आलमगीरके पुत्र शहज़ादे मुहम्मद अकबरने इन्हें अपना
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