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उसी समय अफगानस्थानमांध पङ्गलेण्डका मनोमालिन्य बढ़ने के कारण १८७८०को केटासे सर डोनाल्ड टुयाने एकदल सैन्य ले अफगानस्थान राज्यमें प्रवेश किया। सैफ-उद-दीन नामक सेनापतिने तखतौकुछ नामक स्थानमें उन्हें रोका था। किन्तु व हार गये। १८७९.ई. की कान्दाहार गरनोंके तोप छीन ली। अयूब फिर हिरातको भागे। किन्तु अधीन हुआ। शेर पलोके मरने पीछे याकूब खान्ने गण्डमक नामक स्थानमें अंगरेजीसे सन्धि को थो। उससे युद्धादि बंद हो गया। सन्धिके पनुसार कान्दाहार छोड़ पिशिममें जाने के लिये अंगरनीको पदिय मिला। उसी बीचमें सर लुई कैभागनारी कावुलके दरवारमें सदल मिहत हुये। सुतरा बगरेजीने फिर कान्दा. हार अधिकार किया और कान्दाहारकी रचाके लिये खिसात-ए-घिसजाई नामक स्थान भी ले लिया। •१८८०१०कोबम्बईसे मेजर जनरल प्रिमरोजके पहुंचने पर सर टुयाट ससैन्य तौटे थे। सरदार शेर पली खान् अंगरेजों के अधीन कान्दाहारके 'वाखौं नियुक्त हुये। सरदार मुहम्मद अयूब खानने उससे बिगह युधधोषणा की थी। अंगरेज सेनानी वागने पथमें बाधा डाली। किन्तु उनका सैन्यदर एकबारगी ही मारा गया। अयूब खान् कान्दाहारका पथ मुक्का पापग्रसर हुये। उसी बीच प्रवदुर रहमान खान गरेज गवर्णमेण्टके साथ प्रबन्ध कर पमीर बन बैठे उसमे पहले सर राबर्टस कान्दाहारके सहारकी नूतन सैन्य से पागे बड़े थे। सर राबर्टसके पहुंचने पर बाबावाची काटाल और गण्डी-मूला-साहबदाद नामक स्थान परबके साथ भीषण युद्ध हुपा। युद्धमें अयूबका सर्वख गया था। उनका सैन्य, थिविर, तोप, बन्दूक, बारूद, सब सामान् दुधमनके हाथ लगा। अवशेषमे १८८१ ई० को पपरेत मास कान्दाहार प्रदेश में शान्ति स्थापन कर सर.रावर्ट केटा लौट पाये। फिर पमोर पबद उर-रामानने मुहम्मद शाम खान नामक किसी षोड़शवर्षीय बालकको सरदार समस-उद-दोन सान्के पधीन कान्दाहारका.भासनकर्ता नियुश किया। Vol. 98 IV,
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अयुव खान् हिरातमें भाग कर रहे थे। वहां वह जमोदी जातिके अधिपति स्त्रीय खसुरको मार स्वयं अधिनेता बने पौर अमीरके विरुद्ध अग्रसर हुये। उन्होंने पाड़ा कुरन नामक स्थानमें प्रमोरके सैन्यको हरा कर कान्दाहार दखल किया था। फिर प्रमौरने वयं सैन्य के साथ भागे बढ़ धीरे धीरे अयूवको रसद पौर सरदार अबदुल कुडूस खानने उसी बीच हिरात लिये.अयूबको अधिकार कर लिया था। इस लिये.अयूबको पारस्य- रानके शरणागत हो वास करना पड़ा। इसके बाद प्रमोरने गुलाम हैदर खान्के अधीन ७... शिक्षित सैन्य भेन कान्दाहारको रक्षा की। १८८२ ई०को सरदार नर मुहम्मद खान शासन कार्यमें नियुक्त हुये। कान्दाहार नगर देखनेमें पायताकार और साढ़े सौन मौस विस्तृत है। उसके चारो भोर. उपरोध पौर गड़े हैं। मण्ड (गढ़ा) २४ फोट गभीर है। उपरोध और गतके पीछे रौद्रदग्ध मृण्मय. प्राचीर है। उसमें इष्टक वा प्रस्तर नहीं लगा। उसे रौद्र में सुखा पत्थरको तरह कड़ा बना दिया है।वह पश्चिम टिक, १८६७ गज, पूर्वमें १५१० गम, दक्षिणमें १३४५ गज और उत्तरमें ११५४ गन खम्बा है। नगर में फाटक हैं। पूर्वको बारदुरानो तथा काबुस हार दधिषको धिकारपुर द्वार पचिमको हेरात एवं तोपखामा हार और असरको ईदगाह द्वार है। कहो हारीसे नगरको बड़ी राहें गयो । मध्यस्यसमें शिकारपुर हार और बाबुत हारको राह महा मिलो है, वहां चारसु मसजिद खड़ी है। उसके गुम्बनका व्यास ५. गन है। राई ४० गज चौड़ी है। शहरके उत्तर किया है। उसीके निकट तोपखानेका मैदान है। मैदानके पश्चिम अहमदशाह दुरागीको कवर है। वह पति उच्च प्रहासिका है। नगरके प्रत्येक हार और प्रत्येक मार्गमे उसका गुम्बन देख पड़ता है। उसकी चारो पोर अहमदयाके वंशधरोकी दूसरी भो छोटी शेटौ ११ कबरे है। कान्दाहारका : वाणिज्य विवाद ईरानियांक |
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कान्दाहार