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आम-फल दही, अश्र, वातनाशन, उष्ण एवं पित्त-कर रहता, किन्तु पक जानेपे मधुर तथा अम्ल -लगता और बल, पुष्टि एवं रुचिकी वृद्धि करता है। (वैद्यकनिघण्टु) यह छर्दि, तृष्णा, घाम और कफ तथा -वातनाशन है। (भावप्रकाश) कमरख एक क्षुद्र वृक्ष है। इसके पत्र एक अङ्गुल प्रस्थ, दो अङ्गुल दीर्घ तथा ईषत् तीक्ष्णाग्र रहते और रुचिर दीखने लगते हैं। पञ्जाबमें यह १२/२० चौड़ाई अधिक नहीं बढ़ता। भारतमें कमरखको कवि बहुत होती है। जब उसकी झाड़ी अति स्वादु लगती है। यह उत्तरांशमें विशेषतया मिलता है। कच्चे फलोंका रस रंगनेमें खटाईकी तरह छोड़ा जाता और सम्भवतः काटका काम दिखाता है। इसका वस्त्र, मूल और फल शीतल औषधकी भाँति व्यवहृत होता है। सूखा फल ज्वरमें शिफ़ा बख्शते हैं। कमरख दो प्रकारका होता है—मीठा और खट्टा। मीठा कमरख खू़रके लिये उपयोगी है। किन्तु कच्चा खानेसे स्वर जाता और वक्षःस्थल दुःख पाता है। पक्का फल चटनी और तरकारीमें भी पड़ता है। कमरख वर्षामें फूलता और शीतकालमें पकता है। उस प्राप्त १ इञ्च लम्बा होता है। समीप दूरी यथा भी जाते हैं। इसका मसल मृदु, सरस और पच्छेदन है। इसको अगरेज और गोड़ा दोनों ही लोग पसन्द बनाते हैं। यह मर्वत पीनेमें बहुत अच्छा लगता है। कमरखका मुरब्ब भी उमदा होता है। इसका झाड़ हलका, लाल, कड़ा और दानेदार रहता है। सुन्दरतामें इसे अस्मानी और वाद्य सामान बनानेमें व्यवहार करते हैं। कमरखी (हिं० वि०) १ कर्मेरङ्गाकार, कमरख-जैसा, फाँसदार। (स्त्री०) २ कर्मेरङ्गकार रचना, फाँसदार कटार।
कमरच्छेदे (हिं० अव्य०) पहुंरा, तलवार।
कमरटूटा (हिं० वि०) १ भग्नपृष्ठ, खम्मीदापुश्त, कुबड़ा। २ नपुंसक, नामर्द, कमरका ढीला।
कमरतोड़ा (हिं० पु०) मल्लयुद्धका एक हस्तलाघव, कुश्तीका कोई पेंच।
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कमरतोड़,)कमरतोड़ा देखो।) कमर-दियाल (हिं० पु०) चर्ममेखला, चमड़ेका पट्टा। इसमें पक्के हतियार पर्याप्त कसा जाता है।
कमरपट्टी (हिं० स्त्री०) कटिबन्ध, कमरकी पट्टी। इसे चपरास वगैरहमें कमरके ऊपर बाँधते हैं।
कमरपँेटा (हिं० पु०) १ व्यायामविशेष, एक कसरत। इसे नाम कमरपर लगाते हैं। यह कसरत बेंत लपेट और पालो छाप—दो प्रकार किया जाता है। 'कमरपेंटेकी कसौटी' भी एक कसरत है। २ मल्लयुद्धका एक हस्तलाघव, कुश्तीका एक पेंच। एक पहलवान् नीचे भागिने कश्चित् अपनी दाहिनी टाँग नीचेवालेकी कमरमें डाल अपने बायें पैरकी काँध और पिण्डलीके बीच रखता तथा बायें हाथका पच्छा बनके बाँयें हाथके हुटमीपर भीतरसे धंसता है। फिर दाहिने हाथसे उसका दाहिना डालूं खींच उड़ा पकड़ता और उसको आसमान दिखाता है।
कमरबन्द (फ़ा० पु०) १ मेखला, फँटका, पटुका। २ कटिकी पारो और लपेटा हुआ वस्त्र, कमरकी चारो ओर कसा जानेवाला कपड़ा। (वि०) ३ कटिबद्ध, तैयार, कमर बाँधे हुए।
कमरबन्दी (फ़ा० स्त्री०) १ सुसज्जता, लड़ाईकी पोशाक। २ युद्धके लिये सल्लोन्नह, लड़नेकी तैयारी।
कमरबाज़ (फ़ा० पु०) मल्लयुद्धका एक हस्तलाघव, कुश्तीका कोई पेंच। यह वक्षःस्थल और बहुपर बस होता है।
कमरभङ्गा (हिं० पु०) लाक्षणाद्विशेष, एक लकड़ी। यह खपड़ेके पटानमें दोरँबा वाले नीचे तहपर जड़ता है।
कमरमजबूत (फ़ा० वि०) १ चस्त, उद्यत, तैयार, कमर बाँधे हुए। (पु०) २ कमरकसा, लड़ाईमें बननेवाले एक लकड़ी।
कमरा (अं० पु०—Camera) १ कोठ, आगार, कोठरी, ओठा। २ पाली-सन्निवेश-यन्त्रविशेष, जिससे तस्वीर उतारनेके बनवा एक औज़ार। उस समय ट-कटक बनता और सुखकर प्रतिबिम्ब लेनेका गोलाकार स्फटिक लगता है। इसको प्रदीपन करनेमे घटा-
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कमरखौ—कमरा