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पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष भाग 4.djvu/५२

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कमीशन—कम्पन
कमीस (अ० स्त्री०) कमीज, किसी क़िस्मका कुरता।
कमुकन्दर (हिं० पु०) धनु भञ्जनकारी रामचन्द्र।
कमुवा (हिं० पु०) नौदण्डका मुष्टि, नाव चलानेके डाँडका कब्जा।
कमून (अ० पु०) जीरक, जीरा।
कमूनी (फ़ा० वि०) १ जीरक-सम्बन्धीय, जीरेसे ताल्लुक रखनेवाला। जीरकके अवलेहको 'जवारिश कमूनी' कहते हैं। (स्त्री०) २ औषधविशेष, एक दवा। इसमें जीरा बहुत पड़ता है।
कमूल, कमलाई देखों।
कमेढ़ी (हिं० स्त्री०) कुमरी, कपोतिका।
कमेरा (हिं० पु०) कर्मकार, मजदूर, नौकर। प्रधानतः खेतीके काम करनेवाले नौकरको 'कमेरा' कहते हैं।
कमैला (हिं० पु०) १ सुना, वध्यस्थान, क़त्लगाह। २ कमैला, एक पौधा।
कमेछरा (हिं० पु०) संस्थानविशेष, एक साँचा। यह मट्टीका होता है। इसमें कसकुटकी चूड़ियां ढाली जाती हैं।
क मोदन (हिं० स्त्री०) कुमुदिनी, कोकावेली।
कमोदपुष्प (सं० क्ली०) जलपुष्पविशेष, पानीमें होने-वाला एक फूल।
कमोदिक (हिं० पु०) १ कमोदराग गानेवाला। २ गायक, ग्वैया।
कमोदिन (हिं० स्त्री०) कुमुदिनी, कोकावेली।
कमोना—युक्तप्रदेशके बुलन्दशहर जिलेका एक ग्राम। यह काली नदीके दक्षिण तटसे थोड़ी दूर अवस्थित है। यहाँ एक प्रसिद्ध दुर्ग विद्यमान है।
कमोरा (हिं० पु०) १ मृत्पात्रविशेष, मट्टीका एक बरतन। इसका मुख प्रशस्त रहता है। इसमें दुग्ध

दुहते और रखते हैं। यह दही जमानेके काम भी आता है। २ घट, घड़ा।

कमोरी (हिं० स्त्री०) क्षुद्र मृत्पात्रविशेष, मट्टीका एक छोटा बरतन। इसका मुख प्रशस्त रहता है। यह दुग्ध दुहने तथा रखने और दही जमानेके काम आती है।
कम्प (सं० पु०) कपि भावे घञ् इदित्वात् नुम्। १ स्फुरण, थरथरि, थरथराहट, कपकपी। इसका संस्कृत पर्याय—वेपथु, वेपन, वेप और कम्पन है। २ उच्चारणविशेष, एक तन्त्रफ़ुज़ून। यह स्वरितका एक संस्कार है। स्वरितके आगे उदात्त स्वर आनेसे इस स्फुरणकी आवश्यकता पड़ती है। ३ वेपथु, बुखारकी कपकपी। ४ अनुभावविशेष। यह शृङ्गार-रसका सात्त्विक अनुभाव है। इसमें शीत, कोष, भय-प्रभृतिसे अकस्मात् शरीर कंपने लगता है। ५ कंगनी, उभरा हुआ दीवारका किनारा। यह मन्दिरों औत्-स्तम्भोंके नीचे रहती है।
कम्पज्वर (सं० पु०) कम्पयुक्तो ज्वरः, मध्यमपदलो०। शीतज्वर, विषम, तपज्वरज्, जुड़ो। यह ज्वर वायुसे उत्पन्न होता है। ज्वर देखो।
कम्पति (सं० पु०) समुद्र, सागर।
कम्पन (सं० त्रि०) कपि-युच् इदित्वात् नुम्। १ कम्पयुक्त, कांपनेवाला, जिसको कपकपी लगी हो या जो कांपता हो। इसका संस्कृत पर्याय—चलन, क्रम्य, चल, लोल, चलाचल, चञ्चल, तरल, पारिप्लव, परिप्लव, चपल और चटुल है। २ कम्पकारक, कंपानवाला। (पु०-क्ली०) ३ कम्प, कपकपी। ४ शीतऋतु, जाड़ेका मौसम। ५ एक राजा।

 "काम्पोश्राणः कनठः कम्पनम्त महाबलः।
सततः कम्पयामास यवनानेक एष यः॥" (महाभारत १२।४९)

६ अस्त्रविशेष, एक हथियार। ७ सन्निपातजन्य ज्वर-विशेष, एक बुखार। भावमिश्रने कफोल्बण सन्नि-पात ज्वरको ही कम्पन कहा है,—