पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/१०१

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रोशन पारा-रोशेनिया मान, चमकदार। ३ प्रकट, जाहिर। ४ प्रसिद्ध, | ५८६ वर्गमील है । पहाडी लिपुराके राजा इसके अधि. कारी है। वृटिश-सरकारको सालाना १५३६१०) राजस्व मशहर। रोशन आरा (वेगम)-मुगलसम्राट शाहजहानकी छोटी | देना होता है। लड़की । १६६६ ई०में दिल्लीराजधानी में ही उनकी रोशेनिया--मुसलमानधर्म सम्प्रदायभेद। वयाजिद अनं. मृत्यु हुई। शाहजहानाबादळे स्वरचित रोशन आरा सारी नामक एक मुसलमान-साधु इसका प्रवर्तक है। उद्यानमें उनकी समाधि मौजूद है। वह पीर-इ रोशन नामसे परिचित था। राशन उद्दौला रस्तम जन-सजाट महम्मद शाहका वयाजिदने कन्धार सीमान्तवत्ती कानिगुरम जिले- अनुगृहीत एक उमराव । इनका प्रकृत नाम था जाफर के वुमुदवंशीय अफगान जातिके मध्य अवदुला नामक खां। इन्होंने १७२२ ई०में दिल्ली र जधानीके कोत- एक विद्वान् और स्वधर्मनिरत मुसलमानके पुत्ररूपमें वाली चबूतरेके समीप सुनहरी मसजिद बनवाई थी। जन्मग्रहण किया। पिताले यत्नसे वह उपयुक्त पा कर इसके वाद १७२५ ई०में इन्होंने मुसलमानोंके पढ़नेके | गर्वित हो गया। पोछे वह घोड़े का व्यवसाय करनेके लिये दिल्लोके काजीपाड़ाके पास एक और मसजिद लिये समरकन्द राज्यमें गया। यहासे भारतवर्ष लौटते वनाई जो रोशन उद्दौला मसजिद नामसे मशहर और | समय कालिञ्जरमें मुल्ला सुलेमान साथ उसकी भेंट सोनेके पातसे मडित थी। इस मखतवकी छत पर | हुई। तभीसे उसका धर्मविश्वास वदलने लगा । खडे हो कर पारसपति नादिरशाहने दिल्लीवासियोंकी | पिताने पुलके इस अधर्माचरणसे क्रुद्ध हो उसके शरीर- हत्या करनेका आदेश दिया था। १७३२ ई०में रोशन | में अस्त्राघात किया और उसे इस्लाम धर्मका आदेश उहौला इस लोकसे चल बसे। पालनके लिये कबूल कराया। किन्तु इससे भी पुत्रका रोशन उद्दौला ( नवाब )-हैदरावाद निजामके भाई। ये | विकृत चित्त परिवर्तित न हुआ। क्षतस्थान आरोग्य सुशिक्षित और सदाचारी थे। १८७० ई०में इनकी मृत्यु होते ही वह जन्मभूमिका परित्याग कर निनगहर नामक स्थानमें गया और वहा अपना धर्ममत फैलानेकी कोशिश रोशनचौकी (फा० स्त्री०) फूक कर वजानेका पक वाजा, करने लगा। वह हुमायू वादशाहके पुत्र मिर्जा महम्मद शहनाईका वाजा। इसे प्रायः पांच आदमी मिल कर हकीमका समसामयिक था । मुगलशाह अकबरके समय बजाते हैं। एक सिर्फ स्वर भरता है, दो उसके द्वारा ६४६ हिजरीमे उसने प्रधानता लाभ कर अपना धर्ममत राग रागिणीका गान करते हैं, एक नगाड़ा या दुक्कड स्थापन किया । स्वान् दौरानने इसके पहले कावुलमें वजाता है और झांझके द्वारा ताल देता है। यह वाजा मिर्जा महम्मद हकीमको सभामें सिया क्याजिदके साथ प्रायः देवस्थानों या राजा चाबुओं के द्वार पर पहर पहर | तर्क वितर्कमें उस समयके मुसलमान साधुओंको परास्त पर बजाया जाता है इसीसे चौकी कहलाता है। होते देखा था। रोशनदान (फा० पु०) प्रकाश आनेका छिद्र, गवाक्ष, | ___ प्रवाद है, कि वयाजिदने पाठशालामें वर्णविन्यास भी नहीं सीखा था । किन्तु पूर्वजन्मके सुकृतिगुणसे रोशनाई (फा० स्त्री०) १ अक्षर लिखनेको स्याही, काली। दर्शनादिका मीमांसातत्त्व उले कण्ठान था। वह कुरान २प्रकाश, रोशनो। के प्रसिद्ध वाक्योंको अत्यन्त सरल घ्याख्या कर लोगों- रोशनी (फा० स्त्री०) १ उजाला, प्रकाश । २ दीपमालाका को समझा देता था। उसको हर एक बात उपदेशपूर्ण प्रकाश, दीपकों की पंक्तिका उजाला। ३ज्ञानका प्रकाश, | होतो थी। वह 'आत्मवाद' का प्रचार कर गया है। शिक्षाका प्रकाश। ४ दीपक, चिराग। उसके मतसे जिस हिन्दूने आत्माका स्वरूप समझ लिया रोगेनायाद-त्रिपुरा जिलान्तर्गत एक भू-सम्पत्ति। ५३ है वह मुसलमानसे भी पूज्य है। जिस व्यक्तिके आत्म- परगने ले कर यह विभाग गठित हुआ है । भू-परिमाण | बान नही हुमा है तथा जो आत्माका अविनश्वरत्व मोसा