पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/१४५

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लखनऊ से २७ उ० तथा देशा० ८०३४ से ८१ १३ पू०को । ठियाओंको भगा कर अपनी गोटो जमाई। उन लोगों मध्य अवस्थित है। भूपरिमाण ६६७ वर्गमील है। इसके के अधीन इकोनावासी जनवारोंने यहां आ कर उपनि- उत्तरमें हरदोई और सीतापुर, पूरबमें वाराबंकी, दक्षिण में वेश बसाया था। राययरेलो और पश्चिममें उनाव जिला है। ___पाई और चौहानने बिजनोर जीता। इसके बाद इस जिलेका अधिकांश स्थान उर्वर तथा श्यामल | वाई लोगोंने छोरी जीत कर अपना प्रभाव फैलाया था। शस्यसे परिपूर्ण है। घीच वीचमें ग्राम और वनमाला जनवार और राइकराडगण मोहन-औरस नामक स्थान. विराजित विस्तीर्ण मैदान रणक्षेत्रकी अतीतकीर्ति | में आ कर बस गये। इसके बाद निकुम्म, गाहरवाड़, वहन कर जनसाधारणके हृदयमे वीरकीर्तिका उद्बोधन गौतम और जनवारगण मलिहाबाद परगनमें धीरे धीरे कर देता है। स्थानीय नदीमालाकी वालुकामय सैकत फैल गये। पनवार और चौहानोंके महोना आक्रमण भूमि भूर तथा अनुर्वर खारी जमीन ऊपर कहलाती है। और जीतने के बाद जनवारोंने उत्तरमें फुमी और देवाको गोमती और साइनदी शाखा-प्रशाखामें फैल कर यहा फतह किया । अनन्तर उन्होंने कुसी से कल्याणी नदीके वहती है। इनमेंसे वेहता, नागवा, लोनी और वाका नदी उत्तर तोर पर्यन्त भूभाग पर अपना अधिकार जमाया हो प्रधान हैं। था। पीछे याई लोगोंने उनसे देवाशे छोन लिया। इस जिलेका उतना प्राचीन इतिहास नहीं है। इसके बाद मुसलमानोंका अभियान शुरू हुआ। शाहबुद्दीन द्वारा परास्त (१९६४ ई० ) प्रसिद्ध कसोज- १०३० ई० में सबसे पहले सैयद मसाउदने इस स्थान राज जयचांदके शासनकालसे पहले लखनऊ नगर पर चढ़ाई की। किन्तु वह यहां मुसलमान-प्रभाव प्रतिष्ठा नहीं हुआ। इस भागमें योपनिवेशिक राज फैला न सका । पर हा किसी किसी परगने के प्राचीन पूतोंके आगमन-प्रसङ्गको आलोचना करनेसे मालूम होता नगरादिमे मुसलमानोंकी टूटी फूटी कीर्तिफा निदर्शन है, कि मुसलमानी आक्रमणके बाद ही यहां नाना राज देवनेसे मालूम होता है, कि उसने जिस जिस स्थान हो पूत शाखायें बस गई थीं। कर जिले में प्रवेश किया था, वहां वहां उसके अनुचरने मुसलमान जातिके अभ्युदयसे पहले जनवार, परि. गाव घसा दिये थे। मोहनलालगञ्जके नग्राम और अमेठी हार और गौतम यहां आ कर बस गये थे। जनवार प्राममें वह छावनी डाल कर दलबल के साथ वहां रहा। जातिका इतिहास भर और बहराइच जातिके साथ सभित्र नगरमे उसका सटर था। छावनी छोडनेके बाद मिला है। गौतमोंकी प्राचीन किंवदन्तीका अनुसरण सेनादलको सदरसे वहां आकर रहनेका साहस न फरनेसे ज्ञात होता है, कि वे लोग कन्नोजराजवंशके साथ हुआ। संश्लिष्ट थे तथा वाई जातिने इस देश में आ कर भी ____ अनन्तर शाहबुद्दोनके जमाने में १२०२ ई०को खिलजी- कन्नोजराजकी प्रधानता स्वीकार नहीं की थी। पनवार पुङ्गव महम्मद-इ-वरिन्तयारने इस स्थान पर चढ़ाई कर और चौहान राजपूत दिल्लीश्वरके अधीन इस प्रदेश पर दी। उसके मायकी कोर्ड कीर्ति यहां नहीं है । अधिक आक्रमण करने आपे और उन्होंने नाना स्थानोंमे उप सम्भव है, कि उसने मसिहावादके निकटवत्ती बख्तियार निवेश स्थापन किया। नगरकी प्रतिष्ठा कर इस नगरमे एक पठान उपनिवेश ___पठान राजाओंके आक्रमण तथा धर्मनाशके भयसे | वसाया हो, किन्तु व सब पठान ककोरोके वाई-राजा बहुतेरे राजपूत परिवार यहां माग आये । वे लोग साधनाके विरुद्ध युद्ध करके यहां पटान प्रभाव फैला कर धीरे धीरे एक एक स्थान जीत कर वहांके सरदार हो दूसरी जगह उपनिवेश स्थापन न कर सके। गये। मोहल, लालागा और नियोवन परगनेमें अमे १३वीं सदोके मध्यसागसे हो वहां मुसलमानोंका उप- ठिया और गीतमोंने इसी प्रकार प्रभुत्वलाभ किया था। निवेश प्रतिष्ठित हुआ। औपनिवेशिके मध्य परगनोंके १६वीं सदीके मध्यभागमें शेखोंने अमेठी परगनेसे अमे फसमन्दोरवासी शेख और सलिमावादके सैयद हो प्रधान