पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२०७

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२१२ लवण - ८ कोङ्कर्णा लवण-बम्बई-उपकूलसे उत्पन्न । था। उन होजोंने चुसिन वा न्युमुलिटिकस्तरम-सिलि ६ कर्कच और वनवार (कर्कच ) लवण-मन्द्राज उरीय युगस्तरमें, पेलियोजोइक स्तरमें, जिपमम् स्तरमें उपकूलमे प्रस्तुत होता है। तथा प्राचीन और आधुनिक टासियारि-युगस्तरमें संग्धव १० पङ्गा ( पांशु ) लवण वगालके समुद्रोपकृलमे लवणस्तर ( yuds of rock-salt ) पाया था। आज भी 'जो लवण साधारणतः प्रस्तुत होता है। कोहट आदि स्थानोंको लवणको बानसे सैन्धव लवण ११ वारा (क्षार) लवण -लवणाक्त मिट्टोसे जो लवण निकाला जाता है। प्रस्तुत किया जाता है। युगान्तरीय मिट्टोको तहसे प्राप्त लवणको छोड कर १२ पाकया वा नमक शोर-सोरा (Saltypetic)से जो भारतवर्गके समुद्र और हदके किनारे स्थानीय लोगों के लवण बनता है। व्यवहार्थं जो नमक प्रस्तुत होना है उसका संक्षिन हाल - १३ नेफुरफुली अर्थात् लीभरपुल-लवण-इङ्गलैण्ड, : नीचे दिया गया है। जर्मनी और फ्रान्स राज्यसे जो लवण भारतवर्ष में मन्द्राज-इस प्रेसिडेन्सीमें पहले समुद्रके बारे आता है । यह साधारणतः Lincipool Salt कह . जलको वाप्पाकार में परिणत कर लवण तय्यार करते लाता है। वर्तमानकाल में इसी परिष्कृत लवणको भारत-' थे। स्थानविशेपमें वारी मिट्टी अथवा भस्मको जलमें वासी काममें लाते हैं। कहीं कहीं कच और सैन्धव सुवो कर उससे लवण प्रस्तुत करने थे। किन्तु अभी लत्रणका मी प्रचार है। कट्टर हिन्दू और हिन्दू विध- । यह प्रथा विलकुल उठ गई है। प्रथमोक्त प्रणालीसे जो वाएं सैन्धव लवणका हो व्यवहार करती हैं। लवण बनता है उसीका स्थानीय लोग थ्यवहार करते १४ सुफरो-लवण-सिंहलद्वीपमें पाया जाता है। हैं। इसके सिवा बम्बईसे भी कई प्रकारके लवण १५ अयोध्यापुरी-लवण-लोहित्सागरके किनारे दूसरे दूसरे देशोंमें भेजे जाते हैं। प्रस्तुत होता है। ____ वडाल-पहले मेदिनीपुर और यशोहर जिले में लवण २६ मादेन लवण-आदेन नगरके समीप पाया। तैयार करनेका कारखाना था। कलकत्ते के निकटवती जाता है । इस लवणको प्रतिवर्ष प्रायः ३३ हजार टनकी सोरेको कलों में सोरेसे लवण निकाला जाता था। आमदनी होती है। विहार और उड़ीसा-उड़ीसामें आज भी धूपमें ग्वारे १७ मस्कट और मस्कटसेन्धा-पारस्य उपसागरके जलको सुखा कर नमक तैयार करते हैं । पहले कृत्रिम किनारे तैयार होता है। उपायसे मी पांगा लवण वनाया जाता था । विहार, १८ लेनचा लवण-तिब्बतदेशमें मिलता है। भागलपुर और मुगरके विभागमें लवण तय्यार होता १६ मणिपुर आदि छोटे छोटे देशोंमें मिलनेवाला था। । लवण । वेरार-यहां लोणारहदके जलसे तथा अकोलाके ____ ये सब लवण भारतवर्ष में प्रचलित रहने पर भी अन्तर्गत पूर्णा विभागके लवणजलपूर्ण कूपसे लवण लोभरपुल शहरसे जो 'cheshire Salt' कलकत्ता, प्रस्तुत होता था। लेकिन अभी नहीं होता। चट्टय़ाम, रङ्गन और ब्रह्मके प्रसिद्ध वन्दरोंमें भाता है। राजपूताना-शाम्भरहद, दिदवानाहंद और काचोर- उसका परिमाण सबसे ज्यादा है। . रेवासा हदके जलसे नमक काफो तैयार किया जाता था। भारतवर्ष के भूतत्त्वकी आलोचना करनेसे मिट्टीकी बम्बई--समुद्रके खारे जलको धूपमें सुखा कर बहुत तहमें लवणका रहना निर्णय किया जा सकता है। पहले हीसे उपकूलदेशमे लवण प्रस्तुत करते आ रहे हैं। भूतत्त्वविद् ब्लानकोई और मेडलीकोटमे कोहट, काङ्गड़ा, काम्बे उपसागरके किनारे कच्छके रणप्रदेशमे, सिन्धु- वहादुरखेल, मण्डि लवणपर्वत और हिमालय सन्निहित प्रदेशमें और थोनामें लवण तय्यार करनेके कारखाने शिवालिक पर्वतभागमें प्रचुर लवणका अस्तित्व देखा हैं ( Thana salt-rrorks) | अगरेजराजने लंबणका