पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२५७

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लामा २६२ का भाविकार किया था। यही पीछे नियतीय यण -। उन्हें असय दे पर कहा है कि तुम लोग मी मेरे आदेश माला कहलाई। | से पूजा और बलि पायोगी।' हमसे स्पष्ट जाना जाता है, ___ योन्मिने बौद्धधर्मप्रन्धके अनुवादमे सारा जीवन । कि नाग्नकी असभ्य और सभ्य आतिको जय वीड़ा विताया सही, पर वे यथार्थ धर्मप्रचारक या बौद्धयति न चान बौद्धधर्माम दीक्षित करनेकी कोशिश की थी तर हो सके; किन्तु राजा नोट्-त्सन गम्पो बौद्धधर्मक उन्हनि देखा था, कि ये लोग दुसरकार तथा पर्वत, प्रतिष्ठाना कह कर बोधिसत्त्व अवलोक्ति अयनार, क्ष टार भृत आदिकी उपासना ले परतने मोहिन हो माने जाने थे। उनकी पत्नी श्रीनगजदुहिता वेनछे गये हैं, कि उनके हृदयले यह पुरस्काररूप बुरसेको अवलोकिटकी पली नारादेवीक. नामसे श्वेतादिनी नारा; हटा पर निर्वाणमुक्ति और प्रतीत्यसमुत्पादरूप म्हा तथा नेपालराजकन्या भ्र कुटी तारादेवी कद्द कर पृजिना धर्मवीजको बोना बडा दीपटिन है। पीछे वे देवरुपमै हुई। न.टो नाराका वर्ण नीला और मृर्ति वडी ही। पूज्य उन्हीं सर मीपण दृश्य अपदेयताओंको प्रहन डरावनी थी। वह रात दिन अपने पति बेनछेके माथ देवपमे गिन कर "न देवाः सृष्टिनाशकाः" वाफ्यकी कलह किया करती थी इसलिये इसकी उपमृति कल्पित साशंकताको रक्षा पदमे प्रयासी गए। वे इस दातका प्रचार करने लगे,-"यही नथ पिशाच, यक्ष, डापिनी, सम्भवत: ६.० ६०मे राजा म्रोट सन् गमांक ! योगिनी आदि बुद्धको महलमय परणासे मन्दकारी परलोक सियाग्ने पर उनके पात्र मङ्गबाट नित्मनने शक्ति विसर्जन कर अभा जीयकी मदनकामनामें राजाके बौद्धधर्मयाजक माजरे के प्रतिनिधित्व में गर लगी है। वे अब किमी गी जीवोंका अपक र न करेंगी। किया। उसके बादसे नियनने 'हसंस्काराच्छन्न भूतो- वर जिमसे जायाका महाल और मुक्तिलाम हो, उसीमे पासक पामान धर्मका प्रभाव फैला। प्रागः क सी वर्ग: सहायता करेगी। इसलिये वे साधारणको पूज्य है और बाद उक्त बंशी राजा थि नोड-देवत्मानके राजत्यकाल उन्हें बलि देना उचित है।" इस प्रकार जैसे भारतमें में पुनः बौद्धधर्मकी प्रधानता हुई । चीनसम्राट लड्न बौद्धनान्त्रिक युगमे माधरणको चिवत्ति कण करने- त्सोगकी पालिन कन्या छिन् छेङ्गके गर्भसे दस गज की इन्द्रास दशबाहुशालिनी दुगा, लोटरसना कराल कुमारका जन्म हुआ। दौडधम मानाशी आसक्ति वदना काली, विस्फारितनेत्र विन्वाक्ष, रकवर्णा भीषण रहने के कारण पुत्र भी बौद्धधर्ममें दीक्षिन हुमा । उन्होंने दृश्या गोतला. करालदंष्ट्रा यारादी यादि देवदेवीका कुल पुरोहित मारतीय वायति शान्तरक्षिनके परामर्शसे भाविभाव हुआ था, वैसे यौगुरु पद्मसम्भवने भो भारतवर्गस गुरु पद्मसम्भवको लानके लिये दृत भेजा। निव्वत पहुंच कर कुसंस्काराच्छन्न निम्वतवासीको पूर्वतन पद्मसम्भव उस समय विहारके नालन्दामटने तान्त्रिक धगम विश्वास दिलाते हुए उनके हृदयमे' वुद्धका योगाचार्ग शाखाम बड़े प्रतिष्टित हो उठे थे । कहने प्राधान्य स्थापन कर बोइधर्मका बीज बोया था। यह है, कि गुरु पद्मसम्भवने शान्तरक्षितकी भगिनी मन्दारवा पौत्तलिकमिश्रित बौद्धधर्म मृलधर्म के साथ मिल कर से व्याह किया था। लामा (ब्लम ) वा ब्रह्मधर्म नामसे प्रसिद्ध हुआ। राजाको बुलाहट सुन पमसम्म फूले न समाये। तिव्वतीय भाषामे लाना शब्दसे परम पुरुष समझा जाता .उन्होंने नेपालराज्य हो कर तिब्बतको यात्रा की !७४७ है, वुद्ध हो परम पुरुष थे अर्थात् जिनकी महीयसी ई०मे उन्होंने राजधानी पहुच कर अपनी यात्राका विव., शक्तिके प्रभावसे अपकर्मा भूतगण भी वशीभूत हो कर रण लिखा था । गस्तमे उन्होंने किस तरह डाकिनी जनसाधारणकी भलाई के लिये तैयार हो गये थे। और यक्षिणीका प्रभाव चूर किया था, राजाको सुनाते गुरु पद्मसम्भवसे वौइधर्म का प्रसन मर्म और प्रभाव हुए कहा था, "उन लोगॉन बुद्धका प्रभुत्य स्वीकार कर जान कर तथा तिब्बतीय प्राचीन भौतिक क्रियाकाण्डॉम लिये अब वे किसीका अपकार न करेगी। मैंने भी उनका अटल विश्वास देख राजा थि-त्रोड्-देसन तत्प्र-