पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२७९

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लालपी --लालसाहवान सतमान मात्र जाता। यजीर्ण गेगमें विचीनी, लाट लालकिारी दी गरेनी जिशिन एक बंगाल मन्नान । मिर्च वीर लोट गान भागमे पीस कर गोलो बना मानसाधर्म ग्रहण कर परेण्ट की उपाधि पाई थी। जरगंबन रे। विगचिका रोगग्रस्त रोगीको भडीम- ये अंगरेज-गवर्मएट द्वारा म्यापित हुगली कालेज मिश्रित लालमिर्च का के साथ रिगुर्वज मिला, अंगरे नी अध्यापक थे। इन्दौने गोविन्दमामन्त और र थोडी पानाम बिलानेसे व तलास पहुचना है। बंगालमा गल्पगुन (mobind Saamant, IPengal Pras प्रदण्डिज द्वीपपुओं में आरक्तव्यरमें (cash kana) इसी! ht life और Iolitook offengal) नामक दोग . प्रकार एम. लाल मिर्च का काढा बना कर सेवन करने को रेजो पुस्तक सना र स्टा नाम कमाया। इसके बटाया REPा है। चाय पीने के चमचेसे दो चाचा लालमित्र । चे भार भी दान-लो स्कूटपाट्य संगरेजी पुस्तकं दना का चूर्ण और दो चमचा लवण परलो अच्छी नशीम गये। १८६४१०में उनकी मृत्यु हुई। कर उसमें एक पारण्ट (Pint) गरम जाल डाला छंदा लालावारी-एग्भिापेन्दुशेगाटासा प्रणेता। होने पर मूनी उप छान कर उमंग फिर आध पाण्ट लालशकर (खिो०) यिना माफ की हुई चीनी, गांड मिनिगार मिला दे। प्राप्ताको पक्षमें चार चार टेमें , लालम ( मं० पु०)न्दालमा, चाह। १२ चनना और नालों पक्षो उनकी उगर और रोग- लाट सकरी ( पु.) ममद । बलावल विचार कर देना उचित है। लाटम्मुन ( पु०) गनमागर देम।। १८१४१० ध्याए- Buchol/ और 10omotलामर (दि. पु० ) एक प्रामा पक्षी । दमकी गरदन लालमिर्च ( Capsicum )ले रासायनिक विटेपण द्वारा और मि लाल, छाती चितपवरी और पीठ काली होती Cpn 11 नामक एक पदार्थ का आविष्कार किया है। है और ना मुनहरे रंग का होना है। यही मिर्चमा साप वा बटुन्न ( .ersity ) है। लालसा ( म० सी० लल यड नतः (म. प्रत्यपात् । पा लालमी ( हिं० पु० ) खरबूड़ा। ३१३१०२) इनि टा, टाप। १ महाभिलार, किमी लाल मुहा (हि • पुल ) एक प्रकारका निनावाँ जिममे पदार्थको प्राप्त उपनकी बहन अधिक उ-ठा या अभि- 'उरके अदर छाले पड जाने है और उसका रंग लाल लाप। २ औत्सुक्य, उत्सुकता। ३ याचना, विसोन हो जाता है। । कुछ मागना या चाहना। ४ दादन, वह अभिलाया जो लालमुकुन्द्र- सापा-पायि । इनका जन्म सन १७३४में गर्भिणी सी के मन में गर्भावर यामें उत्पन्न होतो है । (त्रि०) हवा प्रा। ये कवि नरम तथा मधुर कविता करते थे। लोल, चञ्चल। सोलुप, लालची! । उनको कविता प्राय गाररम हीसी पाई जाती है। लाल साग (हिं० पु०) मरमा नामका माग। लागुगा -go)2 प्रकारका पक्षी निम्या लाठमागर (हिंपु०) भारतीय महानागर का वह अंश जियार किनारकापीसे भामानक पाया जो अग्य और अनिका मध्यमे पडता है और जो बाय जाता है। पाटन अधिक लंबा होना है।३मया पल-मंदयसे रबैज तक फैला हुआ है। यह प्रायः १४०० ३YER नामक पौधा। मील या है और इसकी अधिकसे अधिक हाई २३० मटी ( सा) शलजम, सलगम । मी है। इसके गिनारों पर बहुत छोटे छोटे टापू और लालयितव्य (२०नि०) लल णिच-त । लालन करने के प्रयालद्वीप है जिनके कारण जहाजोंको इसमेसे हो कर लायका आने जगनेम बहुन कठिनता होती है। पहले यह उससे लालरी (हि स्त्री०) लालडी देग्यो । मिल गया है। इसके पानी में कुछ ललाई झलकती है लाल लाइ (हि पु०) दक्षिण-मारतमे होनेवाली एक! इसीसे से लालस गर कहते हैं। प्रकारको नारंगी। लालसाहबाज-एक मुसलमान-महापुरुप। सेहवानमे लालयन् (सं०नि०) लाला। | उनका मरवरा भाज भी मौजूद है। मुसलमान लोग