पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/२८७

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लालीनदी वावग्यान् तिलमले लगे बाभोर विले rop०, पक्षिकोष, लमान पक्षो । नवा दमा! . हिना दे ने वाला हो र नुशाको युदका धि- ग-माम गुपधु , शु. मलयमारक, पाव, शाय-नाया और युज करने भेजा। बन्दिनार-रणक्षेत्र जोनल और हिदोषनाशक तथा माघमाणके मन बनल इटके निकट वे दलाल साय पराजित र अग्निर, स्निग्ध ले मबईक, उगायी, घानाजन, थे। इसके पद विद्रोही ऐनाचन्द और अत्याचारी प्रजा लघु, विद्रोपजित, शीतल, हदगेग और रक्तपित्तरोग- के मध्य रह पर उन्होंने पण्डिचेरोको वच्चाका संकल्प नाशक कहा गया है। (भावन०)२ल पह, लौंग। किया। महके घर जानेने जय दुर्गवासी यमपुरले मेह लाव ( हि स्वी०) १ वह माटा रस्सा जिमसे चरसा मान बनने लगे, तब लाली आत्मसार्पण करतो बाध्य पीचते या इसा प्रकारका आरोई काम करते हैं, रसा हुए थे। लास । २ रस्सी, डोरी। उतनी भूमि जितनी एक दिन. __इस अवरोधकाल फरासी सेना और नगरवासिगण में एक चरसले सींनी जा सके। (पु०) ४ वह ऋण जो हाथी, घोडे, ऊंट आदिको भार र उन्ही के सामने फिीमी चाज भरने पान र कर उसे दिया जाय। अपना पेट भरते थे। यहां तक कि उस समय २४) रु० सावक ( स० पु. ) लाय पर स्वार्थे वन् । १लाबपक्षी, एक एक देशी कुत्ता फगसियोंके हाथ वेत्रा जाता था। लवा। पर्याव-लघुनाटल। लुबातीति टू-घुल । लाठीके लौटने पर उनमा भारतीय कार्यावलिका २ छेदक। तत्त्वानुसन्धान और विचार होने का। वे राजद्रोही लावा (हि पु०) १ चायलको आडेमी फमिक। और सात्याचारी उ.नाये गये। इस अपराधी उन्हें मैले २ चला । मोट रखीचनेमे बैलोंके एक बार जाने और को गाडीमें बैठा कर राजपधले बध्यभूमिमें लाया गरा , आननकाल । था। वहां उन्होंने चिल्ला रहा था, "जगदीश्रने सावज ( स० पु० ) वधुत प्राचीन कालमा प्रतारमा विचारोको क्षमा करने के लिये मुझो यथेष्ट अनुप्रद प्रदान' बाजा जिस पर उमडा मढ़ा नुआ होता था। रिया है। यदि उन लोगोंले फिर पर वार मेरा गुलाकातलाण (स.दि०) र लत्रण द्वारा रन, जिसका होता, तो मैमोमी उन्हें मना न कर सकता।" यह कार लवण द्वारा हुवा दो। २व्वण-म्वन्या, कहने के बाद उन्हें फांसी पर लटका दिया। गमा , नमरीन । (सी० ) ३ नम्र सुबनी । लालानदी-आसाममे प्रवाहित पक नदी । यह धमा० २८ लाचणिक ( स० ति०, लवण-उत्र। , लवण द्वारा उ० तथा देशा० ६५१ पृ० दक अवर जातिका वासभामा निमा लवण द्वारा संसार हा जंगलायन पर्वतसे निकल कर दिपुङ्गो लाय मिल गई है। लवण सम्बन्धी, नमका । (पु.) लवणविक्रेता, बह लालील (सं० पु०) अग्नि, आग । ( नत्तिरीय आर० १०१११७) जो नाक वेदना हो। (लो०) ४ लवणपात्र, यह वरतन लालका (साखी गठहारमेन, गलेम पहननका पक जिसनमरता जाना है. नम: दान। प्रभरका हार। लाल नन्दलाल-पक चंदीजन। इनके पनाये बहुत म लावषम ( ल लो०) रणम् टवणल, लत्रणका पित्त मिलते है। गाव या धर्म, नमापन | २ लौन्दर्यविश्प, अत्यन्त लाले (हिंदु ) लालसा, सामान। सुन्दरना। लालेर फोर्ट (लामनेर दुर्ग)-गुक्त प्रदेशके बुलन्दशहर सुन्ताको छाती तरलताके समान भङ्गमे जो जिल्के अन्त नागवार। यह अक्षा० २०१३ उदय होता है, उस लावषय कहते है। शरीर अवयवका ७० ना Et०८०समसमान मा प्रष्ट सोन्दर्य र यही लावग्याला मन परान यहाहटा फटा दुर्ग था। पना यहा या फटार्गा३ 'ला उत्तमता, स्वभावका अच्छापन। लान्य (२० लि. ) लल णित् त् । लालनीय, लालग लावण्यगन्-लावण्यमनिन्त और शकुननदोपके फरने योग्य, दुलार करने नायक। प्रणेता।