पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३२

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रोम-साम्राज्य रोमकाने विजय प्राप्त की। इसी समय देववाणी प्रत्रा, 'ट्रेट नियुक्त हुआ। कुछ ममयके ठिये विषन और रित हुइ, कि जो ६००० पुट मुरङ्ग खोद कर अन्यान मेरिशिषनामे शान्ति स्थापित हुई । झोल के जलका सयोग समुह जलस करा देगा, उमौकी लटिन-युद्ध (३४० ३३० ३० पू०)। इस युद्धर्म विनय होगी। इसके अनुसार रोमके डिरेकर इसके बाद लेटियामके प्राधान्य पर रोमके साथ फिउरियम कामिल्लासने उक्त सुरङ्ग तैयार की। भाज, सामनाइट और लेटिनोके दो युद्ध हुए । प्रथम साममा मा यह विधमान है। इसके बाद पद्रास्कान राज्यका ध्यास र युद्धर्म (३४३ ३४१६० पू०) रोमकेनि जीते और हुआ। इस युटर्म विजय प्राप्त कर कामिल्लासने महा मामनाइटोने उनको अधीनता स्वाकार कर ली। लेटिना भासम्बर के साथ सादे घोडे के रथ पर चढ़ पर रोम ने दूत भेज कर क्याया, कि हम लोगार्मसे भी फसल मगरमें प्रवेश किया। जूनो देवताको प्रतिमूति रोमर्म और शामक नियुक दिया जाये। किन्तु रोमयासियोंने ला गइ । इस मूत्तिके रखने के लिये पर विराट मन्दिर इस पर आपत्ति का और इसके फलसे इन दोनो में बनवाया गया। फिर घमासान युद्ध हुआ। (३४० इसासे पूर्व ) भेसेरिस और ट्रेकानाम नामा स्थानक युद्धर्मे रोमक सम्पूर्ण ईसाके ३६१ वर्ष पूर्व कामिललास नियासित हुया रूपसे विजयी हुए। इस युद्ध तोन चौथाइ लेटिन मार और गलगण असरय सनाओंको र र रामको ध्वस साल गये। इस युद्ध में मानलियास टाटम्म सामरिक करनेक लिये चढ आये। भरिया नामक स्थानम घोर रियम इस गङ्घनके लिये व्रटसकी तरह अपने पुतका सर तर युद्ध हुआ। इस युद्धम सहन सहन सैनिक धराशाया ' कार लनेका दुष: बालानपदनस दिया था। हुए। ऐसे समय वचे गुचे लोग पुरोहित और मेष्टलकुमा रियाके साथ फपिटाल परत पर चले गये। गगेने रा सामनाइट महायुद्ध (३२६ ३०४ ६० पू०) इसासे ३३० वर्ष पहले रोमकोंने भलसियानोंके साथ रोमनगरमें प्रवेश कर मार कार मचात आग लगा कर युद्धर्म विजय प्रास किया। रोमकोंक पुना पुना श्रीवृद्धि नगरको भस्म कर दिया। केरल मानिलेयासको सार होत देख सामनाइटोन यूनानियोको सहायतासे फिर धानताले कपिटाल शत्रुहस्तस व गया। इमसे यह रामक विरुद्ध युद्धका घोषणा की। यह युद्ध २२ वर्ष धीर तामस पुकारा गया। तक चला गा। पहले पाच वर्षों तक रोमन ही जीतते अतमें १००० स्वणमुठा पा र गरगण रोम छोड कर गये और सामनाइट हताश हो कर युद्धकी इच्छा परि चले गये। रिन्तु राहम रोम सैनिकों द्वारा भागात त्याग करना सङ्क १ करन लगे। पीछे सी० पाण्डि हो नष्ट भ्रष्ट हो गये। इसके बाद रोमगामी रोमर्म लौट यस नामक एक सामनाइट पोरक अत्यद्भ त समर कर घरद्वार बनाने लगे। कमिल्लास लौट कर फिर | कौशरसे सामनाइटोश भाग्यचक पलटा । उसने प्रभात लपा डिरेक्टर मियुन हुआ। सन् २६९ १० पू० वडाइन कक नामक गिरिसङ्कटमें रोमांकाइम तरहसे गटोन फिर रोम पर आनमण किया। कि तु अर्गो नदी । अपमान और पे इस तरह पराजित हुए, कि वैसा रोमक फे किनारेके युद्ध में मानिलियामी अद्भुत वारतासे । इतिहास में कभी दिखाई नहीं देना। पण्डियासक रण रोमकी रक्षा हुई। इसक लिये राकारस नामक गौरया , कौशलसे रोमको को पारवाहिनिया पहाडक पधर्म म्वित उपाधि उससे मिली थी। किन्तु मरत रोम सम्पूर्ण रूपसे घिर गह। अपश्यम्माी विनाश ऐन यासिपाने पोछे उसको मार डाला। इमो समय पेट्रि कर रोमको 1 बुद्धिपक्क आत्मसमपण किश। पण्ठि शियन और प्लेवियनाम स्वत्व और स्वामित्व पर घोर यासने भो दया र रोमसैन्य और सेनापतियो के प्रति पाद विवाद स्थित हुआ। पीछे इमास पूर्व ३६७) सम्पहार किया। दोनो कसले और दोना सना १०में प्लेवियन एल एल सेक्सटियस सवप्रथम मल! पतियोंन म्वाार किया, कि हम लोग सामनाइटोको हुमा और विचार कार्यक रिये मिटर या एक नया मजि । रामका साथ सब विषयाम समान अधिकार देगे मौर ___You_xx,8