पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३७१

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लोत-लोधि कफपित्तनाशक. बागदोपनाशक, व्रण, गुल्म, श्वास, कास, एक तहसीलदार रहते है। वही यहांक दीवानी और और प्रमहनाशक, गायनागा तथा नेत्ररोगमे दिनकर है। फौजदारी विभागका विचार करते है। इस तहसीलम लोत (सं० पु० ली०) लुनातीवि लु ( हम्मिमृप्रिणिति ! उगा कुल २६२ गाय और दो शहर लगते हैं। अ६) इति तन् । १ स्तेय धन, चौरीका धन । लोन, लोधा-मुसलमान उकैतों की एक शापा। ये अयोध्याके आँस।चिह, निशान। ४ लवण, नममा ५ अयु- मुसलमान डन-चंगले उत्पन्न हुए हे। नेपालकी तराई पात. आंसूका टपकना। और अयोध्या के सीमान्न प्रदेशमे टनका वास है। लोल (सं० लो०) लूनातीति लु सर्वध नुम्बष्टन् । उग्ण लोधिका-बम्बई प्रेसिडेन्सीले काठियावाड विभागक ४११५८इति पून, यहा ला (निनादिभ्य दलानौ। उण हल्लार प्रान्तमें स्थित एक छोटा सामन्त-राज्य । यद्द राज्य ४११७२ ) नि उन। लोन, नेवजल, आँस् । याज कल दो भागों में विभक्त ह । उक्त दोनों राजयोंकी लोध (हिनी) क्सिी प्राणीका मृत शरीर, लाग। कुल आय २५ हजार रुपय दै जिनमेले संगरराजको लोधडा (हिं. पु० ) मांसका बडा नं जिसमें एट्टी न । सलाना १२८७) और जूनागढ़के नवादको ४०५) २० वर हो, मासपिण्ड। देना होता है। लोधिका ग्राम राजकोटसे १५ मील और लोयारी (हिं० स्त्री० ) १ मि पानी से नाव खींचते । गोण्डालसे १५ माल उत्तर पश्चिम पडता है। . या धारे धीरे लेते हुए किनारे लगाना । २ लाचारी लगर लोधि-पिजीवो एक हिन्दू जाति । मध्यभारत, युक्त. डाल कर पानीको तहका पता लेने हुए मार्ग से किनारे : प्रदेश और भानपुरके आस पास स्थानों में इनका वास की भोर नाव घटाना। देवा जाता है। आचार-व्यवहार और सामाजिक प्रथा- लोचारी लंगर (हि. पु० ) सबसे छोटा लंगर। यह उस नुसार ये कुमी जातिसे मिलने जुलते हैं। एक समय जगह डाला जाता है जहां पानी कम होता है और यह ; इस जातिको लोग जबलपुर और सागर जिलेमें बडे जानना अभिप्रेत होता है कि वह न्निारे जाने का मार्ग प्रसिद्ध हो उठे थे। शायद १६वों सदी ये बुन्देलखण्डसे है या नहीं। आ कर मध्यभारतमें वस गये। पीछे कुर्मियोंने राम्भवतः लोद (हिं० लो० ) नेध देखः । १६२० ई० में दोभादसे उस देशमें गमन किया था। महा लोदी- प्राचीन गजवंशभेद। दिल्ली स्वनामप्रसिद्ध राष्ट्र देशमें इसी कारण उत्तर-भारतके लोघि लोग 'लोधि मुसलमान राजवंश! भारतवर्ष देम्यो । परदेशी' नामसे पुकारे जाते हैं। वहां ये ग्वाले यौर । लोध (स० पु०) रुब-यच , रस्य ल. ! स्वनामस्यान वृक्ष ।। वईका काम करते हैं। यह माग्नवर्षके जङ्गलों में उत्पन्न होता है। ये हल्ले-बट्टे, मजबूत और मेहनतो होते हैं। खेती- __ विशेष विवरणा लोटस्टम देखो। वारीम कुर्मियोंके समान है, पर उनके समान प्रान्त लोधरा (हिं० पु०) जापानसे आनेवाला एक प्रकारका स्वभावके नहीं। ये घमंडी, अत्याचारी, परस्खापहरण- तांव।। प्रिय और प्रतिहिंसा परायण है। नर्मदाके निकटवत्तों लोधरान-पक्षाब प्रदेश के मूलतान जिलान्तर्गन एक तह प्रदेशों में ये खेती-दारी तो करने ही हैं, पर इसके सिवाय सील। यह अक्षा० २६२ से ले कर २६ ५६८० ये डकैती कर मी अपना जीवन बिताते हैं। मृगयामें ये तथा देशा० ११२० से ले कर ७२ । पू० नक विस्तृत बड़े पट होते हैं। तीर अथवा बंदूक छोडनेमें ये बड़े है। भूपरिमाण २०१७ है। तेज है । इसलिये ये सैनिक कार्य करने में सब तरहसे यह तहसील गतद्र नदीके किनारे अवस्थित है। उपयुचा हैं । दक्षिणी-भारतमें इस जातिकं बहुतेरे सेनामें यहाँकी जमीन पहाड़ी और बलुई है जिससे यहां अन्नकी भत्तों हो गये है। उपज उतनी अच्छी नहीं है। गेहूं, जुआर, दाजरा, मई, इनमें बहुविवाह और विधवा-विवाह चलता है। जौ और नील यहांका पण्यद्रव्य है । लोधगन नगरमें | विवाहित विधवा पत्नी और शास्त्र के मनमे परिणीता