पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३८९

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६६४ लोहारा-लोहार अगरेजोंके हाथसे परास्त हुए, किन्तु उन्होंने आत्मसम- 1 फुट है। उसके ऊपर जो मङ्गल है उसमें सेगुन, शाल. पंण नहीं किया। इस घोर संघर्गाके समय बालोंने महुआ और कुग्नुम वृक्ष पाये जाते हैं। इन सब जगलों. उन्मत्त हो कर यहांके पहाडी प्रदेशको मय डाला, किंतु में लाब, मोम और मधु मंत्रा पर गोंड लोग बाजार पलामू-विमागकी जरा भी क्षति न हुई। इन विद्राहके। बेचने आते है। वजार लोग यहांसे पटसन और कई बाद अगरेज-गवर्मेण्टके शासन-विभागीय जो सब परि खरीद ले जात हैं। यानिज लोह गलाया जाता है। वर्तन हुथा है, वह हजारीबाग जिलेके विचरणमे दिश यहाको अधिकाराने गोंड जानीय रत्नपुरराजा लड़ाई में गया है। हमारीनाग देखो। ग्वामी गदद पहुंचाई थी, इस कारण इस यशो किमी उपरोक्त चुयाड़-विद्रोहके कुछ समय बाद ही चेरो और राजाने १५३८ १०में यह सम्पत्ति जागीर-स्वरुप पाई। खरवार जाति बागी हो गई । १८३२ ई०मे उममा दमन , लोहारा ग्राम ग्वन समृद्धिसम्पन्न है। यहा सरकारी किया गया। तभीसे ले कर सिपाहीविद्रोह तक यहा। विद्यालय, थाना और जनसाधारणके वायुसेवनार्थ सुन्दर और किसी प्रकार की घटना न घटी। उसी साल खर । उद्यान है। चार ज्ञाति स्थानीय राजपूत जमीदारोंके विरुद्ध पडी लोहारा-साइमपुर-मध्यप्रदेश के रायपुर जिलान्तर्गत हुई। उसका दल धीरे धीरे परिपुष्ट होता गया। इस : दुर्ग नरमीलको एक भूसम्पत्ति। भूपरिमाण १६७ वर्ग- समय रामगढके विद्रोही सेना-दलने पलामू नगरमें मील गोर जनसंख्या ६ हजार के करीब है। इसमें कुल थाश्रय ले कर वहाक राजद्वे पो जमीदार नीलाम्बर सिंह: ८५ ग्राम लगते है। शायटिको पहाडका जंगल ढका और पीताम्दन सिंहको सहायतासे विद्रोह की मात्रा धीरे । निम्नप्रदेश ले कर इस जमींदारीका अधिकांश म्यान धीरे बढा दो। २६ नवम्बर मन्द्राज-पदातिक दल और। संगटित है। प्रसिद्ध पढ़ारियायनके साथ यहाके रामगढके कुछ गजमक्त सेनाको सहायताले वह विद्रोह जमीदारोंका सम्बन्ध है। यह स्थान बहुन उपजाऊ शान्त हुआ। सात वरीआ दुर्गके सामने विद्रोहि दल है। यहा तरह तरह की काफो फसल लगती है। परास्त हुआ। नीलाम्बर और पीताम्बर बन्दिरूपमै लोहारा-मादलपुर यहां का प्रसिद्ध वाणिज्य म्यान है। कारागार मेज दिये गये। आखिर अगरेज गवर्मेण्टके लोहारी (म० स्त्री०) लोहारका काम । विचारसे उन्हें फाँसीको सजा हुई। लोहाग नाइग-युक्तपदेशके गढवाल जिलान्तर्गत एक विशेष विवरण राची शब्दमें देखो। जलप्रपात । यह अक्षा० ३७५3३० तथा देशा० ७८ २ रांची जिलेका एक शहर। यह अक्षा० २३२६४४ पृ० मध्य विस्तृत है। कई पहाडको बडी नेजी उ० और देशा० ८४४१ पू० के मध्य रांची शहरसे ४७ से लापता हुआ यह जलप्रपात भागीरथीमे या कर मील पश्चिममें अवस्थित है। जनसंख्या ६ हजारसे मिला है। यहां भागीरथोके किनारे एक चौडा रास्ता ऊपर है। १८४० ई० तक यह रांची जिलेका सदर रहा है। प्रपातसे १० मीट दक्षिण तक नदीतीरस्थ रास्ते की १८८८ ६०में यहां म्युनिम्न पलिटी स्थापित हुई है। यहां एक गनमें ६ रस्सीका झुलेला-पुल है। छोटा कुष्टाश्रम है। लोहारुपजाबप्रदेशके हिसार विभागका फ देशी लोहारा-मध्यप्रदेशके रायपुर जिलान्तर्गत धामतरी तह- राज्य। यह दिल्ली विभागके कमिश्नरके राजकीय सीलकी एक भूसम्पत्ति । भूपरिमाण ३६८ वर्गमील है। नत्वावधानमें परिचालित होता और अक्षा० २८ २१ से इसमें १२० ग्राम लगते हैं। २८.४५ ३० तथा देशा० ७५४० से ७५.५७ पू०के इसके,पूर्व और पश्चिम में तेन्दुला और कर्करा नदी वीच पडता है। भूपरिमाण २२४ वर्गमील और जन- वहती है। इसके सिवा यहाँ और भी कितनी छोटी सस्था २० हजारसे ऊपर है। इसमे लोहार नामक १ छोटी नदियां बहती हैं। उक्त पर्वतमालाका एक अश शहर और ५६ ग्राम लगते हैं। अह्मदवक्स नामक एक दिल्ली पहाड़ नामसे मशहर है। इसकी ऊंचाई २००० । मुगल इस राजवंशके प्रतिष्ठाता थे। १८०६ ई०मे वे अल-