पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/३९२

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लोहिताती-लो ३९७ ( मारत ४११३१२) ४ सर्पभेद एक प्रकारका साप लोहितास्य (स.नि.) रकरण मुग्नविशिष्ट, लाल ५सन्दानुवरभेद । (मारत ६) ६ अपिभेद । (नि.) मुंहशाला । २ रचा मुख, सून लगा हुआ मुंह। ७रक्यणं चायुक्त, जिमको आम्बे लाल हों। रोहिताहि (स० पु० ) रतवर्ण सर्ग, लाल साप। । लोहिनाक्षी (स ० स्त्री०) रोहिताश लिया टीप् । १रत | लोहितिका ( स० स्त्री०) १ रक्तवहा नाडी, यह धमनी लोचना, यह जिसकी मापे लाल हो। २ सान्दानुचर जिस हो कर रह वहता है।२ मअिष्ठा, मजीउ। मतभेद (भारत सल्याव) ३ जासन्धि र पाहु लोहितिमन् ( स० पु०) रोहित्य लाल रंग। सघि, घुटना और फेहुनि । ४ जानु और पाहुश सन्धि | लोहितीभूत (M० दि०) रतरतामात, जो लाल हो स्थान। गया हो। लोहितागिरि (स.पु.) पर्वतभेद । ( पा ६।३।११७) | लोदितेक्षणा (स० पी०) रत चक्षु, लाल आपे । रोहिता (स.पु.) रोहित अङ्ग यस्य । १ मङ्गल प्रह। १ महल प्रहलोहितत (स.वि०) लालचिहविश्लिष्ट । २१म्पिल पृक्षा कमीला नामा पेह। लोहिनोत्पर ( स० को०) रक्त पदम, लाल कमल । लोहितान (स. पु०) लोहिलमानन मुख यम्य | लोहिताद ( स० पु०) १ पुराणानुसार छोस परकॉमिस १ नकुल, नेग्ला। तर मुख लाल मुह। एक नरपका नाम । (त्रि०) रोहित उदक यत्र । २ लाल लोदितामुन्नी ( स० सी० ) मरमभेद, एक प्रकारका हथि सका पीलाल हो।३रचा । यार। लोहितोर्ण (स० वि०) लोहितानि ऊर्णानि यस्मिन् । लोहितायन ( स० पु०) गोत्रप्रवर्तक पिमेद रोहितके | साल्वर्ण अणविशिष्ट जिसके का लाल हो। गोलापत्य । लोहित्य (मा० पु०) लेाहित ध्यत्र । १ धान्यविशेष, एक लोहितानि (सरसो०) ठोहितापनस्य गोतापत्य यो प्रकारका धान । २ एक प्राचीन नामका माम । ३ लोहितायनकी यशोद्भवा । यह शायद लौहितानि धाल्मीकिने कपिचती नदीका इसमें हो पर पहना लिखा शब्दका अपमयोग है। है। ४ ग्रह्मपुत्र मद । ५पक समुद्रका नाम | पुराणानुमार लोहितापस् (स .कॉ० ) लोहितमय । तान्न, नाया। | | यह पुशदीपने पास है। लोहितापस (स की०) लोहित शायसम्। १रत लोहित्या (NO सा०) ११५ बी नाम । २१ पण लोहजाति १२ ता ताया। (नि.) ३ ताम्रनिर्मित, | अप्सराका नाम । तावाका बना हुमा। रोहित्यापनमा ( रनो०) देवीभेद । लोहितार्ण (सपु०) घृतपृष्ठ पर पुता II लोहिनिका (N० स्रो०) १ रतयां प्रा, डाल रगशे (भाग० ५।२०१२१) | औरत । २शिराभेद । माहितक देवा । लोहिताट (स.वि०) रसार, सूनसे वरायो। रोहिनी (स० स्त्री०) रोहिता (षणादनुवादिति । पा लोहितार्मन् (म क्लो० ) यह रवगुरिया या फुसिया १३६) इति डोप तारस्य नकारादेशश्च । रत रो। जो आपको पुतलीफे पास सफेद चमडे के ऊपर में उत्पल लोहनिश (सं० ग्रो०) रकरण दो मविशिष्टा, हाल होती हैं। ज्योतिश। लोहिताउ ( स० पु०) रस पिएहाल राल रतालू लोदिन्य ( स . पु० ) गोत्रप्रवर्तक ऋषिमेद । शायद लोहितायभास (स.नि) राम, लला स्पिा पहलौरित्या प्रमादिक पाठ है। लोहिताशीष (स०पू०) रकाशोक, यह शोषका पेड लोहिपा (हि.पु.) १लोहेगी चीजोंका यापार परो जिसमें लाल फूल उगते हैं। घाटा । २पनियों और मारवाडियोंका पर नातिका लोहिताय ! R० पु.) रोहितवर्ण मधारोही, लाल | माम । ३लाल रगत थैल। ४ लोकी बनी हुइ गोला। घुडसवार। लोहि पु० । र, खून। ___rol xx 100