पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/४२२

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वशवितति-भारलेह ४२७ पर यशर और परमार असे पणाम वनसमाचार (स. पु.) यस्य समाचार | यशा परता थी। एवान। १.०४ मारय ARE TRE पुत्र रामदेय पर RTI (म. ल.) तिष्ठाति NTERTI को मिधारे। उन पुत्रदेव भो १२ मा १ वरियन (पु०) २ पारद पणा वर्णगृत्त । य 4rnमाममदाहुगा पीना। मृत्यु मान! इसमयपहार सम्रन पाया धिा मिलता। याद रानी पदरीकामनाराना पनी नागजमो) इसाई जगण तगण गण भोर गण आत है। इस दारो मयुसे पु पालि परम मेधरी । वायरि भी सदन । सारे नाम गमगर गागि प्रपत्र राना यस्यचित (म मा०) व शरय दम्मा पूर्ण दुदव उरे-य और भूपे व य

ाभिष मेरा यशम्गिति (स० प्रा० ) यशस्य स्थिति प्रति

Parयु विय गर्य। रिति । यशो गयादा य नाति ।। रघु० १८३०) १२७ मा कनिष्ठ भूपेन्दया १३०३ मामेवदो- (रा. लि.) १ निना, जिम में पोरा १५या जायणको ज्याठ गजा पूणे देखा और मध्यम | | हो। अपुत्र। सुरेन्द्रदेवका १३०४ मालकी यी जो देहान्त | गागा ( स० वि०) १ पुरुषपरम्परामा। २ प्रमागर मिति (गोगु २ श्रीमानलया (सनी)स्य भम् प्रधाज्ञातत्यात् । ३साचा यादूर शाम कोपर। पपियर (10पु0) निमित मन्द तिला यामी चार (म० पु.) यम् । यशारीर गिटो। पामा पोपल । पयायमा परादर। यह गिदारिणो (ETO PRIN) यश पिदारयोनि गा पिट टु, निन अपाय, रघु और गौतर तथा विपर णिगिरिदारणामपो। मीर पित्तात्र दादरममा गया है। परिशु" (वि.) पानि पिणालय परि !दाता (Hrio) पशरला था या पार पनविशिगिता २यितुन पुगगन । परिपा देना। नम्तिर (म.पु.) पिE } मग परम (१००) भनुषा II धारा यसर यसाग (10 त्रि.) य11 ता । २ तात्यारम घपनि (१० मी. ) Tम्प पुदि । पुत्र कादि। । मध्य भागा । (दमक १३) ३पा पम जम्नम पारिनार यजममृति HTTमायु (म० पु० } य ननिगित मारतको । .. , दम पम मागला17म्मा)। गाग बाम पेश धाम गुण मिता यात (0) EITE- मरितम् IIRIT रातो पासपोलो तपितः । - रायो ! पुगों manor, (रा. २ परि०) प" H: नाति (10 पुगणोप्रा " 11पुराणात प्रागा और TET (210 प्रा.) या न मापुITEL प्रामान। नामरो . प ण याशारा या नर(म० पु.171 जोधामननाहीयafer, यय, मुमधुर पा (म) पानादि गणार, भर करमानी गई। मादा (पा०६०) RTI (PRO) REVवा। रग(१० नार) पूमपुरा नमाय गि १ मिनार प्राnि .7 पा र पुलोना मिशिना घTHEIRaj.) निगा।