पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/४३२

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। पके घर गौरदेश में र नाम एक पात्र है। उस , शेव सपाझार है। तोपरी रक्षा के लिये महा क्षेत्रमा म्मरण दररोले मनुष्य सभी पापति मुन | देव यदा वास करते हैं। उदार उस महातपा चकने होते हैं। तपय की धौ। सय पातीपति मुनि प्रति अत्यन्त इस यश्वरको उत्पत्ति किस प्रकार र, उमा प्रसन्न हुए थे। सफमुनि यहा आराधना की धी इम सक्षित निसरीचे लिपा जाता है- 1 या ण यहा पर महादेव पावर से प्रमिद्धप । सत्ययुगर्म मदातपा अष्टारका नाम था सुमन। उनके प्रभावसे अष्टारमको अभी प्राप्त हुमागा। रोकर ऐश्वयकी सास्पदोभूत लक्ष्मीय स्वयमरमें सक्षेत्रों का पीर तो तथा डा मय लोधाम देवसमामें मनोहर नया था। इच, गधय, सिद्ध । किस प्रकार पूनादि करना होती है, घने वाली ती चारण मादि सभी उम स्वयम्बरम उपस्थित थे। यहा परिसमामें इस प्रकार लिया। भामरपति नचाहने मस पदर लोपिको इस घर परक्षेवक दक्षिण क्षारयुएगरि सारी पाच, मध्य और आचमनाय पण शिया। यह दे ममा यात्रा करना होती है। पहले नश्वरना पर भगवान् सुनत बडे बिगडे किन तपन हो । क्षौरक्स, म्नान मार गिरके दर्शन और प्रणाम कर पञ्च भय उदोन फोह शाप नही दिया । मोरके कारण उन. तार्थ विधानसे यात्रीको परिमना करनी चाहिये। पीछे का मशाग यम हो गया। उसी गिरी उना अटायम क्षारकुग में स्नान कर शोदा यि र यथाविधा। नाम पर इस प्रकार या रे नि स । सदाप पराक यादम नपाठ कर। भा कर कटोर तपस्या भारम्म कर दानाकी तपस्यामे म झारफुगडवे पूर्व में सियसहित मापाश समोर उत्सत हो उठा। दादमा पर्ष तक पल भैरएड है। तीर्थयात्री भक्ति इस भैरवाएदम जर पोर, पाछे दश हजार वप वर पेक्षा पसिया पाकर जठरपा परना चाहिये। पाकर और उम्मेद दश हजार यर यागु भक्षण पर भैरवपदके पूरम सयपापना मदापुण्याद भनि निद्रिय मुनियरन क्टोर तपस्या की थी। गरि । मह है। पले यात्री पुनमयुन अग्नियुगप जल द्वारा य, समिर रश पादक थाकारक ती युग निर मापे । उदीपुरा । अग्निकुएउप पू जाप ( दूसरा नाम आत पाम दक्षिणाग्नि गाहपत्याग्नि मोर वादनीयाग्नि । एड) ६ । सय पापना और मरोग निवारण है। ये नानो अति तर आमक पानार अस्ति । अग्निपुएडसे इम जीवाद र मर्यादा है। उनका सर म्पर्गप्रदायर है। वहा भोगी पर साधतानपरे। प्रयादित जिमना पर गुमर है डा घाट म मा। नापण्डसे दक्षिण सामीमापद सीमाम्य मा मदायको भा पापित म उनसरी अध पुरा। सब पाप विचार और सम भाम्परामर टास पल 177 पर तार धानक साथ उमर रिये यात्राको सौभाग्यपूण्डम म्नान वादा गया है। पापा उप पायो पालन कर ण अग्निपुग दक्षिण पापमोचना धैतरणी है। या तोपा तगला नपर्म बदन | मी महाका जर पश वरनसे मतुप पाप मुश होन। या भी रिसाने भोगवती पौर गिफै मारामार पान परता दाता है। रातम क्षारयुग पिण श्व रमाम ता । पर पाता घरयपर पापहरा नगर पा सयापापररा मरिन् । तर और गन्दी चरम 117 पाडे पानि और मिका पार कर यदा नान करना सिर IIT AI नदी पर समयिका म्नान रा! मर बाद BEITRL माना होगा। आyme परदक्षिणा मार पर भर पाना न प शेपमें नड। यद दुगड माया ग पार पर पाret धैतरणी नार र उमरे माम मा सपना माना गया है। प्राट मारोप शिरा पर दोता। पर FIR में ग्नान होता है। _fol TL 110