पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/४५०

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वरदेश ४५५ इस देश में कूए सुदधानेके सिवा दूसरा कुछ उपाय नहीं। तृतीय रिमाग-ब्रह्मपुरकं पूर्वी तटसे नवाखाली चट्ट पोखर सुनाने पर बालू गिर कर गहढा भर जाता है। प्राम आदि प्रदेश और पश्चिम ओर नमोलुकक निकट फलन रम्या चौडा तालाब खुदवाया ना मक्ता है। के स्थान | नर्गिक कारण विशेष* समुद्र हट जाने पर कि तु छोटे बेटे पोखरे नहीं। निस तरह प्रतिका भूभाग ऊपर उठ जाता है, भवि बडे ही नाश्वथ्यका विषय है कि समुद्रले 'तनी। कल उसी तरह प्ररतिविशिष्ट भूमि ले पर इन सब दूर पर और दिमालयके नीचे इतनी वालुका पहास आइ ? स्थानोंका उत्पत्ति है। समुद्के घट जाने पर स्थानविशेष भूतत्वविदों पहना है कि पृथ्याफे भूपजर धनने में नो वालुकामा स्तूप जमा हो गया है (जिसको 'यूमिन' युगा दिमायक तटदेश त समुद्र पय हुआ | साया वह मरते हैं। इन सब नवोदित स्थानके था। केवल तटदायों-उसको इस समय ऊचाइ प्राचानका कारण है। यह मय स्तुप नहीं पएड का प्राय पक तृतीयाश तक उस समय भी समुद्रमें डुबा एड परतार विधमान है। यही छाटे छोटे कुछ हुआ था। सिनर वाद म्योसिन, लिमोमिन और उचे पहाड श्रेणाम परिणत हुआ है। रितु स्थान उसके बाद भूपक्षरके चौथे युगके स्तर निर्माणका क्या विशेष अव मोकिल टोटेक आकारमं बालू रह गया घल रही है। इसमें म्योसिन स्तरमें ही प्रथम मनुष्य है। तमोलुकले निक्टके राले इस ममय यालुरास्तूप सृष्टिकाचिद्ध प्राप्त हो नाता है। उममें भी फिर निम्न है जितु चग्राम आदि मञ्चलम ये पर्वताकारण परि भ्योमिनमें प्राप्त चिद मति अस्पष्ट और सदेहजना है। णत हो गये हैं। इन सय परतोंके शहरी आवरण फाट ऊपर म्योसिनसे ही के माननीय मस्तित्व स्पर घर फेक देनेस भातर ठाब भी बालुकारतूप दिसाइ चिह्न प्राप्त होनेसे उसको मानतीय युगका आरम्मशाल देता है। कि तु वहीं दहीका पालुकास्तर पत्थरये कहा जा सकता है। इस तरह एक एक स्तर गठिन | सरम परिणत होने लगा है। इन म पचतोंके पीजमें होने में कितने लाख वर्षात नात है। अनपत्र उम सब जगह सामुद्रिक जलज या जर जीका पक्षर समयके समुद्र परित्यन बालू याज भी प्रस्तरावस्थाम | दिखाई देता है। चट्टग्राम प्रदशक साताण्ड सीधये परिणत न हो कर जो अपनो अवस्था विद्यमान है, यद। IFट जो पर्वतमारा है, वह कितने अशर्म आगेय कमा सम्मनपर नहा विचित होता। ___ यद्द वापाराशि हिमालयके गात्रविधीत प्रस्तर म्यभार हा पर भी उमको उत्पत्ति और परिणति रेणुका सिया भार कुछ भी नहीं। एक तो हिमालय पु म शर्म उक्त मारक सामुद्रिक बालुकासे हो हुर ढाल प्रदेशकी वजह प्रस्तरपण भासाहका भमि है । यह मुक्त कण्ठसे म्योकार पता होगा। ब्रम सुतरा बाल जमा होनर्म असुविधा ! इस विभाग को पूर्ण सामा पर दक्षिण उत्तरसे और जो पर अर्थात् उत्तराशकी जमीन प्रथम विभागके साथ पयतमाला पा कर हिमालय मिट गह है उन मद सम पुरातन और निनाशकी मीन उसको अपेक्षा कुछ पर्वातास यह बालू निर्मिन पतमालाकी प्रति सम्पूर्ण आधुनिक होन पर भी दूसरे दो विभागोंका अपेक्षा पुरानी | रूपले म्यतन है। ये सब पतिमारा वहुत युग है इसम सन्देह नहीं कि आश्चर्यका विषय है, कि तृतीय और चतुर्थ निभागकी जमान जैसा पठोर दखी। ___ यूमिन युगमें ना सागर नल हिमालय तक विस्तृत था, बतायुगमें लद्वाध्य वरनरे याद वह स्वाभाविक नियम्स जाता है, इस पुरापमोनके रिसा भागमें वैसी नहीं दिमाइ देता। इस दाल भूमिर्म अन सरिरका प्रबल हिमानयका छोद प्रमश नहाम चला गया । छहादीपका बाद किया निरन्तर सम्पादित हानसे हा इसका एक ) यहस्तृित भूतपद भी इस समय प्राकृतिक नियमसे स्थापित मात्र कारण है। फिर यह भो खत सिद्ध है, कि इन सव | पृथ्वाम गिन्तिम राम माम और नगरका याकार बन गया। भभागोंक उत्पन्न होनके वहन समय पहले यह घालुका दियों का यह साक्ष्य यन्नवान है। भनुमान हाता कि इसस सोली भूमि पर ARIK थी। ही या प्रमस निम्न वनका उत्पत्ति है।