पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/५९०

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बरज-वरगा घरज (स.लि.) ज्येष्ठ, बना। "Bष प्रामुमो दाता होता च उदरमुख ।" (स्मत) यरज-मोजराज्य मरतगत पर प्राम। कात्यायनन परणको विधि इस प्रकार पतला है। (भविष्य ब्रमम्ब ० ३०४११५४) । पहले यजमान भासन ला पर दे,–'साधु भयान परजानु (R० पु०) ऋषिमेद। शाम्तामचयिष्यामो भयन्त । परणाप माह्मण उत्तर घरमीपो (स.पु०) यणसर जाति जो स्मृतियो म 'सायमासे हरितो हम प्रकार है-अर्चयि गोप गौर सतुयाय सयोगसे उदगम पहा गह। पामो भवन्त' इसके बाद 'सर्पऐसा प्रतिवचन २प्राह्मण भोरम पुत्र जो गुदाके गर्भसे उत्पन्न हो। ! कहना होगा। (सहकारतत्त) पर (सं० लो०) मिपते इति य गरन्, (शकादिम्याऽटन् ।। निस कममें वरण करना होगा, उसमें मिलिक्षित उप १८१) १ पुमपुर, कुमका फूल। पराव सपत प्रारमे साल्प करके यरन मोर उपपीतादि देने होगे। मरोयमिति प्रन सेयाया अरन्। (पु०)२६स।३! जिस परण फरना होगा उसका दादिता मातु स्पर्श पेदिका, मिग, वरें। पर्याय-धोला, परटा गन्धोलि, ! पर 'रिणुरोम् नत्मदोमय अमुक मामि गमुके पक्षे ममुर परला, परलो, दुदा फरा, मयाणा। (राजनि ) । निया अमुकगोत्र मुस्प्रयर थोममुग्यशमार्ण भमुफ पाटक (सं.पु०) कुम्भयोज। कमारणाय एमिर्यसयु पमाल्यादिमिरभ्यर्च भय तमई परटा (स. खा०) यार टाप। १६ सो। २ दुम्मोज । गुणे' पर स्थित एनोऽस्मिक । गाडे यामा - ३ मग्निप्रति कोटभेव, पर नामका उनाग कोहा। "यशायि हित अमुक गर्म पुर।' इमप वाद प्रशस्त्रिकको ४ या रांगा नामरी धातु । ५ मधिया कीटा। 'वधामान करयाणि ऐमा पहना दोगा। पाटो ( स. खा. ) घरट जाती डी । १हसी। २ गम्घोली, मैधिया कीडा) इस प्रकार प्रत्विष का परण हो जाने पर यह अपने परहिका (म० स्रो०) दुम्मान । पर्याप-धारा । गुप-- सदशित कम बारम्ग का द । यजमान यदि अपना फर्म मधुर, स्निग्ध गुरु अपर मोर यायुहर। (मावप्र०)। ग पर सर तो पुराहित आदिको चरण पर मरत है। परण (म०लो०) मा न्युट् । १ किमीको पम दर । पीछे पुरोदितको चाहिये, जिथे पूनादि मा प्रतोदो किमी कायफ रिप नियुक्त का, निमोसो किमा। र उम समाज र दा धियाहमें मो माइका पहले कामफ लिप चुनना या मुकर्रर कर। २मार पाप 'परण पर पीछे पन्यासम्पदान परना होता है। विवादमें पविधान होता मादि हाय रामोको नियत करक' यर । यरणकी मगद पर भार पन्या तीन पुरशे का माम पारादिसे उन मस्कार करना। ३ मगल मायने उन्लेषकर यरपरना होता है। नियत किये हुए होता मादिक मत्काराप दो दुइ यस्तु' in विधाहम परमवापप इस प्रकार होगा। माता पादान या पिशादर्म या महार करना। पश दाहिमा जानु छ र यो १९-गुरम् तन्म रोति। दोमय अमुक मामि अमुपले मानियो मुरगावः होममा जिस सिा विदित म होम भाम्म घाममुपदेशशर्मा अमुगावस्य भरपरम्प गमा रमेक पाल यमगाम अपमातिए मोर यिनातमाय । श्यगर्मणः प्रपत्र मुगावस्य प्रमुER अमुक दियान लिपेमामा प्रतिको म्प यरण र थे। पाव भमुगावाप भगुमरम्प अमु पुष गापार्य प्रभृत परलोप प्रासो गन्धादि वारा प्रमा ममुकगोत्र मगुरुप्रवर ध भगुरुयर्माण पर गमु परम पम करना लिये प्रेरणा पास भाम रोयाण गोवन्य प्रमु प्रपरम्प मायगमणाप्रपा गुग्गा दानगाधन, भग्यारम्म, यसमा म मादिगानी सम्र गमुम्पराम्प समुन्देमाया भागात्रहप पमा दो पाप होगा। पर यह मनुस्प्रयरम्प भमुपदेशमा पुरा ममुगाxt मार मानको पूर्वमुन तथा मामाय मादिको उचामुघ पैठना प्रथरी श्रोभमुगादयों का दामभिधादिमिरम्पर्य होगा। पास्यमयम्तमा पूणे" पा जामाता यतो.महें। Fol 1 161