पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/६२२

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


वगमू-वर्गमूलधन प्रसार नया मान्य ६३६ हो गया। फिर इस सख्या । पूर्णाङ्क भाग वगमूलक पश्चात् हा रख देना चाहिये। के अन्तिम अटुको छोड़ कर उसे इम निकले हुए वर्ग । यद हात होगा, मि यदि क्मिो दशमलका वर्ग मूर दूनेसे भाग दो और भागफल ६ को निकले हुए। निकाला नाय, तो फलमें दशमलर स्थानोंकी मपया सम वगमूलका दादिगो आर रखो और ज्ञान भाजक रम होगी। इस कारण दशमलब मिन्नम वर्गाशि होने के लगा दो जो १०६ हो गया। फिर माज १०६शो लिये दशमलय स्थानोंको समस्या होनी चाहिये और घगमूल के उस अडु में जो पीछे रखा गुणा परो। जव वर्गमूल में दशमलय स्थानों को सख्या वर्गसण्यासे माधो इम गुणनफरको ६३६ मेसे घटानेमे शेष कुछ नहीं होनी चाहिये। रहना, इमसे बात हुआ कि ५६ वर्गमूर ३१३६ | यदि दी हुइ दामलय भि न पूरी धर्मराशि न हो, तो का है। वगमूल मन त दशमलय होगा और वगमूल जितने दश यदि अधिक अश उतारने हों, तो पूर्ण विधिक | मल्य अड्डो तक चाहे निकाला ना सकता है। अनुमार क्रिया करते नाओ से अगले उदाहरण में दशमलवके वर्गमूल निकालने में दशमलन अड्डोकी की गई है। सस्था सम होनी चाहिये और यदि आवश्यकता हो तो १५६२५ (१०५ इममें जब दो ग वर्गमूमें शुन्य बढा देना चाहिये। निकर आये तो शेष १२ रह वगमूलधन (स० को०) मजातोयान्नयस्य धातः धनः। २०) ५६ गपे। इसमें तीसरे प्रश मजातीय तीन अड्डोंश परस्पर गुणनफल अथवा विसी को मिलनेसे १२२५ माय पकरातिके वर्ग फलके साथ उस राशि द्वारा फिर २४.) १२२ धन गया। गुणन | इसीको मूलराशिका धनफठ ( Cubic root) १२२५ कहते हैं। लीलावती में यह घनमूल प्रकरण खतन है। इम सब्याके दाहिने अन्तिम अङ्कको छोड कर प्रथम इसका करणसूत्र विसत्तात्मा है। निकले हुप मूलके दुगने ले माग दो ( अर्धात १२२सो २४ ___६२७ १०५ इन तीन राशियोक यथाम गुणन द्वारा से) ५ भागफल निकला। फिर ५ो वर्गमून और ] घनफल ७२६, १९६८३ धौर १९५३१२५ होता है । अपरा नाप भाजक दोनों मोरको रख दो, इत्यादि। राशिको ४ और ५ सएड मान कर दिसाय करनेसे भाग द्वारा वर्गमूलके दुमरे अड्डू निकालने में कमी दूमरे उरायस यह सिद्ध होता है । अर्थात् ह तथा ४ और ऐमा भागफल प्राप्त होता है जो ठीक उत्तरसे कही । ५रानि, इन तीनों राशिर्योका परस्पर गुणनफल १८० अधिक होता है। ऐसी हालत में वर्गमूल । मह जाबमे होता है। इसका तिगुना ५४० हुआ। दोनों सएड प्रतीत होता है। रागिर्मस एक एकको घन ममष्टि == ४४४४४-६४, नव जाउ माजा उम सख्यासे वहा हो जिमपा ५४५४५-१२५ ६४+१२५% १८६। दोनों रब्ध इसस भाग दना है । या पब मागफर १ हो परन्तु उत्तर राशिका योगफल ५४०+१८६-७२६ | यहा राशि अधिक हो नाय ) तो घगमूग शय पढा देत हैं और का घनफल है। अथरा २७ राशिका एड २० और ७ दूसरे को उतार देते हैं तथा माधारण रोतिसे क्यिा | होता है। इनका परस्पर गुणनफल तथा विामन सख्या परते हैं। | २०४२०४७-३७८०४३-११३५०, दोनों बएडराशिके मर मिन्नका यगर निकालनेका रीति-दाम | घनफली सटि-२०४२०४२०-८०००+७४७४७ पमिन यर्गमृट निवारनमें वही क्रिया को जाती है,। ८३४३-८३४३। इस धनसमष्ट तथा पूरोत राति को पूण राशि वगमूल निकालने में। रिदुग्यनेम का योगफल ११३९०+ ८३९३ - १९६८३ है। पाहा बिन्दु कारक अटू पर रपना वादिपे या रखा हुआ अथवा ४ रा1ि-इमा वर्गमूर २ और घनफा +पना कर लेना चाहिये। वर्गमूलमें दामल्यपि | होता है। इनका स्वप्न यथात् परस्परक गुणनफा ४ Vol 3 159