पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/७०७

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वसईद्वीप ७३२ पत्थरकी बनी कुमारी 'मेरी' की एक सुन्दर मूर्ति धी। कि यहांकी मडके यथेष्ट चौड़ी थीं, विपणी के मध्य हुने पुर्तगीज उले "Nossa Scnhor da Pensa" काने थे। ऊचे भवन बने थे। नगरके चारों ओर आम्र, ताल तथा गोछे पुर्तगीजोंके अधिकारकालमे करअडीप उक्त पुतं । इन प्रवृनिका उयान था, ग्रामोंके चारों पामि हरे भरे गीज नामले ही विख्यात हुआ। शम्यनेन थे। खन्तान, मुसलमान तथा हिन्दू इन दोनों १५०६ ई०मे पुर्तगोज वणिकगण वसद उपकृलमें जानिरीकी प्रजाके उद्योगमे यहांका कृषिकार्य सम्पन्न दिग्बाई पड़े। इसके १७ वर्गके बाद यहाँ पुत्तगीजानहोला। गोपनिपयोगी उलट झाप्रपत्र ग्यापारकी शोठियां बनाई। दुभामि वासाका विवरणी तथा दानेदार पत्थर उत्पन्न होते हैं। म्यानार नया से जाना जाता है, कि उस समर वमई शहर गुजरातके गोयामबहान गिजांवर पा प्रासादादि यहांक पन्धमें मुसलमान राजाके अधिकारमुक्त एक वाणिज्य केन्द्र शाहीवन न बर्नमान समयमै निमनगद लोग प्लेगमे दृर दूरके देशों में जहाज आ कर यहां ठहरता था। मालया। मरने वशीय १७ वी शतादी शेषमागमें टमी तरह- के उपकुलसे नारियल तथा नाना प्रकारके गरम मसाले। का प्न्टेग बांद्वीपमै दिग्बाई दिया था. उसम्म कुछ ही यहां आते थे। दिनों अन्दर वसई-नहर पक, ममय प्रायः जन शून्य हो १५३० ई०मे पुर्तगीजोंने वसई द्वीप,या कर धास्थान गया था। उसके बाद फिर मनहरमे लोगोंके समागम नथा कल्याण पर आक्रमण किया एवं उन पर अधिकार होने पर भी इसका उत्तर भाग (समस्त नगरका प्रायः जमा कर कर वसूल किया। इमसे गुर्जरपति वहादुर तिहाई अंश) बहुत समय तक जनमान्य था। शाह के साथ उनकी लडाई हुई ! बहादुर शाह प्रतिपय ! पुर्तगोजोंको आधिएतद्धिके माय माय वृस्तान अनुविधाए देख कर सम्धि करनेको बाध्य हुए। इस धर्माकी भी यथेष्ट उन्नति हुई। ये अपने धर्मावलम्बी सन्धिमें वहादुरगाइने बम्बई, महीम, होऊ, दमन, चे उल व्यक्तियोंके अतिरिक्त सभी जानियोके लोगोंको घृणाको नया बसई द्वोप पुर्चगाजोंके हस्तगत हुए एवं अरब समुद्र दृष्टिले देम्बते थे। खस्तानोंके मध्य भी जो लोग धर्म- मे वाणिज्यकर वसूल करने का अधिकार प्राप्त हुआ। पालन नहीं करते थे. उन्हे ये लोग कागरुद्ध र वहुन १५३६ ई० में नूनू भाई कुन्हाने वसईद्वीपक, इक्षित कष्ट देने थे। यसई कारागारमें इस प्रकार बहुनसे णांनमें एक दुर्ग निर्माण कर अपने जाला गार्सिरा डोसा वृस्नान तथा अन्य धर्मावलम्बो लोग कट नोगते थे। को दुर्गाध्यक्ष बनाया। ज्वावं डी काष्ट्रको मृत्युके दाद क्रम यहांके शासनकर्त्ताने नियम बना दिया, कि. म्वृस्नान- उक्त दुर्गाध्यक्ष ही १५४८ ई०में पुर्तगीज अधिकारके के सिवाय और किसी जानिके लोग इस शहरमें वान गवर्नर-जेनरल हुए। नहीं कर सकते। सम्भ्रान्त हिन्दू मुसलमानोंको भी इस पुर्तगीजोंके लिरखे हुए टतिहासले जाना जाता है. कि शहरमें प्रवेश करनेका अधिकार नहीं रहा। यहां तक कि बमई दुर्ग मुदृढ़ पत्थरकी दीवारोंग्ने घिरा था। वह खस्तानके अतिरिक्त और किसीके माथ पुगीजी क्लिा ११ वुडौले सुशोभित था एवं उसमें १० कमान जमीन तथा जमाका दन्दोवम्त एवं ऋण आदान-प्रदान संयोजित ये। इसके अलावे इस द्वीपमे और भी जितने वा किसी प्रकार वैपयिक अधवा राजनैतिक कार्य कोई छोटे छोटे क्लेि थे उनमें १२७ कमान रहने थे। यहांके नहीं कर सकता था । स्वस्तान लोग सुविधा पा कर क्या अन्दरगाहकी रक्षा करनेके लिये २१ कमानवाही समुद्र. हिन्दू क्या मुसलमान, दोनोंको बलपूर्वक मुस्तान बना पोत हमेशा तय्यार रहते थे, एक एक पोतमें १६ से १८ लेते थे। जो खुस्तानधर्मको आचार-विधि पालन नहीं तक कमान लेने थे। . पुर्तगोज अधिकारमें भी वहट्टीप बहुत उन्नति पर करता था, उसे दण्ड देने थे। यहांके अधिवासियोंने इस प्रकार पीडित हो पर दिल्लीश्वर के निकट खुस्तानों पर था। यहां बड़े बड़े धनी वणिकोंका निवाम था। उस अभियोग चलाया । दिल्लीश्वरने उन धर्मान्ध पुर्तगोजोंको समय यहां जितने विदेशी पर्याटक नया लेखक उपस्थित दण्ड देने का भार मगठोंको दिया । । हुए थे, उनकी लिखा हुई विवरणी द्वारा जाना जाता है। मराठी सेना ने पहले अनल नहीके पारयत्ती नामक