पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/७१५

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७४० वसन्तराय--वसन्तरोग कर उन्हें जागीरदार कायम किया। । वैज्ञानिक नाम Variola है। यह एक संक्रामक तथा प्रतापने फौगलसे १८ वर्षकी उन्नमें पिता और चचा- स्पर्शकामक सम्फोटक ज्वर है। इस घरका विष को उक्त पदसे मुक्त किया। इसके बाद विक्रमादित्यकी शरीरमे प्रवेश करने पर कुछ दिनों तक गुप्त रहता है मृत्यु हुई। उन्होंने पुत्रको दश आना तथा भाईको छ एवं धीरे धीरे प्रवल ज्वर तथा चर्ममें एक प्रकारका आना सम्पत्ति वांट दी थी। भतीजे प्रतापको रोज्या- फण्डु उत्पादन करता है। ये फण्डु पहले पेप्युल, भिपित कर वसतराय वुढापेकी वजहसे गंगातीर पर इसके बाद भेसिकेल तथा पप्टिउलके झपमें परिवर्तित रायगढ़ नामक स्थानमें रहने लगे। प्रतापकी कन्या विदु होते देखे जाने हैं एवं अन्तमें शुष्क होने पर वहांका कच्नु मतीको विवाह-उपलक्षमें वे यशोहर आये। इस समय अर्थात् चमडा गिर जाता है। यह रोग एक बार हो जाने रामचंद्र रायके भाग जाने के कारण चचाके साथ प्रतापको पर फिर नहीं होता। इस रोगका संक्रामक विष रोगोके टुश्मनी हो गई। जब वसंतराय यशोहर हीमें थे, तभी रत, स्फोटक तथा चमडे में फैल जाता है, यह ममय पिताके वार्षिक श्राद्धका दिन उपस्थित हुआ। इसमें | समय पर पसीना, पेशाप, प्रश्वास एवं अन्यान्य नपत्राव उन्होंने प्रताप और आत्मीभ ग्वजनको निम तण किया। द्वारा भी परिचालित होता है। वस्त्र, गाडी तथा गृधादिमें प्रताप भी सानुबर निमत्रणमे पहुचे। दुर्भाग्यवश उक्त पदार्थ वात दिनों तद वर्तमान रहता है एवं गह प्रतापने पुत्र सहित वसतरायको यमपुर भेज अधिक दूर दूर तक फैल सकता है। वसन्तरोग द्वारा दिया। मृत्यु होने पर मृत शरीरमे जीवित शरीरमें भो उक्त ___ राघबराय, चंद्रशेखर राय आदि वसंतरायके दूसरे विप प्रवेश कर जानेको सम्भावना रहनी है। मवाद पैदा लडके सब बाहर रहने के कारण बच गये थे। इस होनेके समय इस रोगकी मंशामणशक्ति बढ डानो है। ज्ञाति शव ओंके पडयनसे प्रतापका सर्वनाश हो गया। कोई काई प्रयकार कहते हैं कि उक्त स्फोटक, एक मानसिंह यशोहरजित् उपाधिके साथ कचरायको यशाहर प्रकारका अति सूक्ष्म पदार्थ रहता है। वहीं दूसरे व्यलिके को गद्दी पर बैठा कर दिल्ली चले गये। कचरायके शरीर में फैल जाता है। सोई लडके न थे, किंतु उनके भाई चंद्रशेखरके बंगधरगण जो टीका नहीं लेता है, उन्ने प्रचं काफरी जाति तथा आज मी तुलना जिलांतर्गत नूरनगर और वसिरहाट कृष्णकाय व्यक्तिको ही यह रोग अधिक होने देखा जाता उपविभागके मध्यस्थित सोडगाछीम वास करते हैं। है। इसके अलावे गन्द रहनेसे नया गन्दे पदार्थका भक्षण राजा वसनराय एक उत्कृष्ट भावुक कवि थे। पदकर्ता करनेसे भी दस रोग होनेकी सम्भावना रहती है। गोविन्ददासके साथ उनका वरावर ही लडाई दंगा किसी किसी व्यक्तिको शारीरिक अवस्था ऐसी होती है, हुआ करता था। कि उसके शरीरमे यह विषयुक्त संक्रामक रोग आसानीले चमन्तराय-एक प्रसिद्ध वैष्णव कवि। ये नरोत्तम ठाकुर प्रवेश नहीं कर सस्ता । उत्तमरूपस टोका देने पर कभी महाशयके शिष्य थे। नरोत्तमविलासमें कवि नरहरि यह रोग होते देखा नहीं जाता। इन्हें महाकवि कह कर यसिदित कर गये हैं। इस रोगके कारण कई स्थानोंके चमडे में सीमाग्द्ध भक्तिरत्नाकरसे हम लोग जान सकते हैं, कि ये प्रदाहका चिन्ह पाया जाता है एवं उस वीव पहले वैव्य ल अन्तिम अवस्थामें वृन्दावन में रहते थे। वीचमें जीव नजर आता है। प्रकृत चमड़े में नये नये कोप उत्पन्न होने गोम्वामीका पत्र ले कर एक बार श्रीनिवासोचार्यके से एपीडार्मिसके नीचे तरल रस, तत्पश्चात् लिम्फ पव' पास आये थे। पदकल्पतरुमें वसन्त रायके पद उद्धत मवाद पैदा होता है। परिपक्व अर्थात् मातवें दिनको गोटी. को फोड र अणुवीक्षणयन्त्र द्वारा देखनेसे उसके मध्य वमन्तरोग-मसूरिका । व्रणोदमरूप साघातिक क्षतरोग छिद्रशून्य वा संकुचित देखा जाता है, किन्तु उसका प्राचीर विशेष। अंग्रेजीमे दमे 'mall Pox कहते है। इसका कौपिक विधानके छोटे छोटे खंड द्वारा चमडे से मिला