पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/८१

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रोम-सामान्य साम्भ्रान्त रोमकों के साथ कर दिया था। टेद्रिकास और शकजातिक साथ मिल कर पारस विजयका प्रस्ताव उसके पुत्र फिर राजसम्पद् भोग करने के अधिकारी हुए। किया था । अकस्मात् समाट की मृत्यु तथा रोममें अरा पूर्वके विद्रोहका दमन और विभिन्न स्थानोंको जीन कर जफताका स्वप्न देख तथा पारसकी यात्रा स्थगित होने उसने समूचे रोमसाम्राज्यों शान्तिका साम्राज्य देख बदर गेमसोमान्न पर चढ़ पाया। मालानियोंने फैलाया था। इसके बाद २७४ ई०के अोवर महीनेमें सन्धिके गर्त्तानुसार अर्थ न पाने पर पल्टाम, झापाडो. भालेवियानके फैटका बदला चुकानेके लिये पारस किया, सादलिसिया और गैलेसिया प्रदेश पर अधिकार चला। इस समय उसने अपने मन्त्रीक अयथा अत्या- कर लिया। टासिटामने सलानियाको उस समय सन्धि- चार और प्रजा सर्वस्व हरणसे क्रुद्ध हो कर उसको , शन के अनुसार धन दे कर अन्यान्य ज्ञानिक आक- मार डालने की धमकी दी । उस समय उक्त राजकमचारी , मणकारियों को पराभून और राज्याने भनाया । इस वृद्धा- ने प्राण बचाने के लिये और भी कई कर्मचारियोंको मिला' बस्थामे अन-परत युद्ध करने में असाधारण परिश्रम कर एक दल संगठन किया। इस पर नाट्ने इन करने में समार का स्वास्थ्य मगर हो गए। ६ महीने सवोंको मार डालने का भय दिग्वा कर अपराधमे दण्डित ' २० दिन राज्य कर वह कापाडोकिसमें मर गया। यह सन् (प्राणवध ) होनेवालोंको एक एक फिहरिस्त उन सबों- २७६ ६०की घटना है। टिटासके भाई फ्लोवियानास छो दिखलाई। जिपने देखा, उसने यह समझ लिया, सिंहासन पर बैठे सही, किन्तु पूर्व विभागके प्रसिद्ध कि सम्राट ने मेरे प्राणनाशके लिये ही यह भयावह रमृति सेनापति प्रोवास उसके प्रतिद्वन्द्वी हो उठा। नीन मास कराई है। यह सोच कर उन सबोंने सम्राटको विदुरित राजत्व फर फ्लोवियानास अपने उड़न सैनिकों द्वारा करने का उपाय योजना आरम्भ किया। वैजन्तीसे हरा- टासँस नगरमें मार डाला गया और इल्लिरिकामवासी किया आते समय सन् २७५ ६०की जनवरी महीने में कृषकसन्तान सेनापति प्रोवान रो अगस्तको समा अपने विश्वस्त सेनापति भुकोंपोरके हाथले रोमपति निर्वाचित हुमा । सैन्यगण अफ्रिका, पण्टास. राउन, मारा गया। रोम-वासियोंने इतने दिनोंके बाद एक डेन्यूब, युफ्रेटिस और नीलनदके किनारे के प्रदेशों मे उदारचेता राजाह को अपने हाथ से खो दिया। उसकी वीरता देख पहलेसे ही उसके प्रति श्रद्धावान्

  • फौजों और सेनेटको जब खेमपतिकी मृत्युका कारण थी। उन्होने उसको मान्यस्पतिापक अगष्टमकी उपाधि

मालूम हुआ और अपनी क्षतिकी ओर उनका ध्यान प्रदान की। गया, तव-उन कण्टी और विश्वासघातक राजकर्मः। ___ औरेलियनकी मृत्यु के बाद रोमके शत्रु अधीश्वरोको चारियोंको यथोचित दण्ड दिया गया। लीजनने पलहीन समझ कर शिर ऊंचा कर रहे थे । अगष्टस घोपणा की-"एकके पापस्से और वहुनेरोंके प्रलोभनोंसे मोवासने उनके गर्वको सर्व करने के लिये सेनेटके हाथ आज हम लोगोंने अपने प्रियतम अधोश्वरको लोकान्तर । राज्य शासननार समर्पण कर स्वयं उनके विरुद्ध युद्ध में भेज दिया है। उनकी आत्मा स्वर्ग में शान्ति लाभ-याला की। रिटियावासिगोने तथा सौरमतीय जाति और करे। अब हमें चाहिये, कि उसकी जगह एक उपयुक्त इसरियान जातिने उससे पराजय स्वीकार कर ली। अधीश्वर मनोनीत करें।" यह सन् २७५ ई०को ३री कोप्टास और टलेमीप्रदेशके नगरों तथा जर्मनीके मन्त. फरवरीकी घटना है। इसके बाद फौजोंने अपने दलसे | र्गत ७० समृद्धिशाली नगरोंको वारोंके हाथसे उसने एक आदमीको चुन कर अधीश्वर बनानेको प्रार्थना की। छीन लिया। अपने अधीनस्थ सेनानायक साटानिनास कोई ८ महीने सोच विचार करनेके बाद इसी वर्गके | पूर्वाञ्चलमे और गलराज्यमे वोनासस और प्रोक्युलासके २५वीं सितम्बरको सर्वसम्मतिसे प्रधान सेनेटके विद्रोही होने पर उचित शिक्षा प्रदान कर राज्यको सासिटास ७५ वर्षको अवस्थामें सिंहासन पर बैठा। सुघडला स्थापन करने में वह यत्नवान् हुआ था । ईस मार औरेलियनने मृत्युसे पहले भालानी नामक समय उसने कृपिकार्यमें विशेष उन्नति की थीं।