पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष विंशति भाग.djvu/९३

विकिस्रोत से
Jump to navigation Jump to search
यह पृष्ठ शोधित नही है


रोग-साम्राज्य अटोगात दयने दयापरवश हो कर हतभाग्य गुलामके, उन्च शिक्षामात और सम्यक समुन्नन पारसवालों छुटकारे नये कानुनका प्रचार किया | वे छुट कर साथ वारंवार युद्धरे रोमकोंशा उत्तरोत्तर बरक्षय होने राजानुग्रह लाभकी यात्रा विशेष विश्वासके साथ दिन लगा। चिग्गल ना रप कर वे दोनों ही अपनी रक्षा विताने लगे। इस तरह गुलामोंके छुटकारने रोमक रनमे समर्थ नहीं उप । पारम्पवालों के वार्यवल और होनची हो गये थे । राज्यलिप्सा और आपसकी धपिल चिग्नि होने से नाथ नाय रोमों के भी याम्य. प्रतिद्वन्द्विता फिर उनके मनको लभा न सकी। न्तरिक प्रभाव और धर्मप्राणना कम हो हीन नेज हो समग्र साम्राज्यमे काव्य और साहित्यको उनरनिमें रही थी। इसी समर रोमों के अधिटन पेलेस्ताइनमें लिये पूर्वोक्त तीनों सम्राटोंने यथासाध्य बेष्टा की थी।। ईनाई धर्म के प्रनिष्ठाता महात्मा ईनामनीह मात्मवादा सुदूर वृटेनराज्यले उत्तरी किनारेले प्रदेश अलङ्कारशाम्बा प्रचार कर धन-लोलुप गेमकोंके दृदयमें शान्तिवारि ध्ययन्का शेन्द्रस्थान बन गया था । डेन्यूव और राइन प्रवाहित कर रहे थे। सम्राट् करतान्ताइन प्रथम और नदी के किनारे होमर और मार्जिल की ओजम्बिनी गीत | वियोडासियाराने ईमाई चमकी विमल प्रतिमा प्राप्त कर प्रतिध्वनित होती थी! यूनानियों ने पनार्थ-विद्या और मूर्तिपूजा अनाचार बन्द कर दिया। ज्योति आलोचनामे शीर्षस्थान अधिकार कर लिया खोसनकी यो शताब्दीको अन्नमें सम्राट नालि था। टलमी और गालेनका नाम, आज भी प्राच्च और मनरे अभ्युदय और उसकी सहानुभूनिसे समूचे प्रतीच्य जगत्में उनकी स्मृति जगा रही है । लुसियान- युरोपमें ईमाईधर्मम प्रचार दुआ या। ईसाई-बर्गका की कवित्व-प्रतिग अब नहीं । पूर्वपुन्यों की वैसी प्रभाव पश्चिम साम्राज्यमें जिस तरह फैटा था, पूर्या- असाधारण प्रतिभा ले कर रोममें और किमीने जन्म चलने वैसा प्रभाव फैला नहीं था। रोमका ईमाई-धर्गम ग्रहण नहीं किया। शोफिष्टोंने मुवत्ता का स्थान ग्रहण आस्था कायम कर धोरे धीरे स्वयं दी धर्मस्रोतमें प्रया किया था। दिन हुप थे । रोमृतान जगालामरे ४५६ मे राजामन ईसाकी तीसरी शताब्दीके मध्य भागमें उत्साह-। छोटनेसे जितने दो प्रजातन्त्रका प्रचार होने लगा, उतने सम्पन्न पाश्चात्य रोम जातिके बीच अवसाद और हो नवधनी दीक्षिन माई-मम्प रायका माधिपत्य अधःपतन लक्ष्य पर पूर्वाञ्चलवासी निक्षित गुलाम । रोममें फेल गया। नाई रोम- प्रज्ञान मुनिक्षाके गुणसे लोनासने कहा था- लौकिक राज्यमे राजासे बदले धर्मगुरुको ही आध्या. - In the same manner ( saxe hc ) as some | त्मिक जगन्ना समय कता बना डाला। धर्म प्रचार children always remam pi.zmies Whose inlanti श्री विस्तारके साथ साथ क्रमाने दे रोमक-समाजम limbs has been too closely confined , thus our । 'राजगुरु' वन फर पूजित हुए। tender minds, tottered by the prejudices and सृष्टान, ईसा ( यीशु ) और पोप शब्द देग्यो। habits of an unjust serritude, arc tunable to expand themselvcs or to attain that well इस नये धर्म वलसे रोमक प्राश्वमें होनबल न proportioned greatness which re admire m! होने पर भी धर्माभिव्यक्तिको कोमलताले उनको उद्दाम the ancients, who living under a populari वित्तियां शिथिल हो गई । युद्धविद्यामे वे सम्पूर्ण. government, wrote with the same freedom as ' रूपसे अनम्यस्त और अशिक्षित हो गये। ऐसे समय they acted" (Gibbon, Chap.I.) सन् ५७० ई०मे मका नगरमे इसलाम धर्मका अभ्युदय • इस तरह दर्शन और काथ्यामोटसे जितने ही हुआ। शीघ्र ही अरवबासी पवित्र इसलाम धर्मसे लोगोंका मन पागल हो गया, उतने ही वे पूर्वपुरुयोंके दीक्षित हुए। सुयोग्य अली धर्म गुरु और सम्पदायके शौर्यवीर्यको छोड कर कोमला-कलाविद्योझोंका याश्रय । अधिनायक हुआ। इसने क्रमसे अरती और सोरासेनी लेने पर वाध्य हुए। नये उद्यम और बलसे पारस, सिरिया, मिस्र, अफ्रिका