पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/११८

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महम्मद शाह तुगलक रम .. वह अपनी बुद्धिको हो उय समझने लंगा। नीचे लिखी। नगरी मुलतानको मूर्खताके कारण सूनसान 'तया मबार .: पांच वाते हो पठान वंशके मूलोच्छेदका कारण हई। आदि येमरम्मत हो गये। सुलतानने अन्यान्य जगहों . पहला । उसने गङ्गा और यमुनाफे यीचबाले । कारीगरोंको बुला कर दिल्लीको मरम्मत करानेको चेष्ट स्थानों में अधिक लगान धैठाया था। प्रजा कर देने में | को, फिन्तु उसकी यह चेष्टा कार्यरूपमें परिणत 'असमर्थ हो वनमें भाग गई थी। खेतीयारी कुछ भी संको। जो कारीगर.सुलतानके भयसे दिल्ली में अपे धोई जोती नहीं गई। गल्लेकी कहतने लाखों मनुष्योंको | थे, उनमें भी कई मर गये और कई बड़े भाग्यसे घर ‘मार डाला। कितने ही राज्यको छोड़ कर भाग गये। लौटे। ।। . . . . . . . . . . . सुलतानने इसका प्रधान दोपी प्रजापक्षको समझ जो तीसरी वातको पूरी करनेकी चेष्टा करने में उस जङ्गलमें भाग गये उनको चारों ओरसे घेर वन्यपशुओं- | अपना खजाना हो खाली कर दिया। सोने चांदीर की तरह मार डाला। इस बार अत्यधिक लोगोंका | सिपकोंके पजाय तावेके सिकेका प्रचलन भी उसमें "विनाश हुआ। देशमें एकः तरहसे विप्लव खड़ा हो | 'राजा नष्ट होनेका कारण हमा। वाणिज्य-म्यवसाय गया। पठान साम्राज्य.ही नवल हो गया था। इससे | तविका सिमा चलाने से मनापक्ष लाभान्वित और राज राजकरमें बहुत कमी हो गई थी। पर क्षतिग्रस्त होने लगा। अन्तमें अपनो क्षति देख दूसरा--एक पार देवगिरि देखनेके लिये यह आया | उसने हुक्म दिया कि, जिसके पास जितना तायक था और यहांकी सुरम्य प्राकृतिक सुन्दरताको देख कर सिका हो वह सरकारमें दाखिल करे । तुगलकाबाद विमोहित हो उठा था। मन ही मन यह अपनी राज तांबेके सिक्कोंका ढेर लग गया। पर्वतोपन ताम्रखए। धानोको यहां उठा लानेकी कल्पना करने लगा। इस 'यहां एकत्र हो गया। इसके बदले राजकीय सजाने से कल्पनाके अनुसार देवगिरिका नाम दौलताबाद रस | सोने चांदीके सिपके प्रजापक्षको दे दिये गये। इससे कर वहाँ दिल्लीके प्रत्येक आदमीको. यसनेका हुपम | राजकीय सजाना:न्य और दिन्छ, अर्थवान् पन गये। जारी किया । हुपम हुआ, कि जो आदमी राजाका हुक्म | मुसलमान दानों-दानों के लिये मरने लगे। इससे नहीं मानेगा, उसको कतल कर दिया जायगा । जानके ) तुगलकसे सभी मुसलमान रंज रहने लगे। , डरसे सभी गादमी यहां जाने लगे। अमीर उमराय चौथी वात यह हुई, कि एकाएक उसके :हदपर्ने गाड़ियों, छकड़ों और टांगों पर चढ़.कर दौलतावादको चीन फतह करने की इच्छा उत्पन्न हो गई। इसकी जाने लगे, लेकिन गरोय येचारे पैदल भूख-प्यासके मारे ) लड़ाईको तय्यारोमें महम्मद महो पोल कर धन सार्च तंग हो कर भी पैदल जाने लगे। इनमें राहमें ही भूख करने लगा। सैन्यसंग्रह करने के लिये भी उसने बहुत और प्यासको यन्त्रणासे व्याकुल हो कितने ही आदमी धन पर्च किया। इससे भाप: अकोप शून्य-सा हो मर गये । जो देवगिरिमे पहुंचे भी थे घे यहां शाने पीने / गया। उस समय तुगलकी मूर्णतासे किसनों ने ही . का कोई समान न रहने के कारण भूखों को मरने लगे।। नफा उठाया। कुछ फोजे तय्यार हुई और चीनको सुलतानको मूर्णतासे कितनी ही प्रजाके प्राण गये। फतह करने के लिये भेज दो गई। 'सिपाही मासामको सुलतानने दौलतावाद पसाने के लिये प्रयल प्रयत्न किया | राहसे जङ्गल और परत पार कर चीन जाने लगे, किंतु और इसके लिपे यदुत धन पचं भी किया, किन्तु उसको वहांके दिन्तुगों के भुजवलसे सारी फौज मारी गई। इच्छा पूरी न हुई। - पयोंकि उसने देखा, कि उन थोड़े। सुल दर घुपसवार सिपाही किसी तरह जान बचा कर सं मुसलमानोंको ले कर बहु-संख्यक हिन्दुओंके योच | यह दुःसंवाद देने के लिये तुगलको पास पहुंचे। रखना उचित नहीं, गतरा है। वहां उसका माधान्य रह पहले ही कह माये है, कि गलफक - इन सब नहीं सकता था। इसलिये गये हुऐ आदमियोंकि साथ | कामों से यहांके मुसलमान बहुतायर हो गये थे। पक्ष फिर दिल्ली लौट मापा। धनजन पूर्ण दिल्ली। भार उमरा या जागीरदारों को मो इसके प्रति रही