पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१४९

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पहादेवावोगाचायसरस्वती पसंदेवगाव १३७ रहने फोटूणराज सोमेश्वरको परास्त कर कोपराग्य पुर मार धोरण्ठ दीक्षित शिष्या इन्होंने न्यायोग जीगा था। अलाया सफे. इन्होंने कांट-राम और नामक निनामपि प्रत्यक्षमा विवरण निमा है। गुजराति पोशारदेयके विरुद्ध युदयात्रा को योनिलिहमालाया इसको भयागन्दी प्रकाश, मोपकारिणी भया को काकतीययंगफी धीरतारी महाराणी रद्रमा नको नन्दी टीका, प्लॉगाशी भास्कररत पदाप्रमागका पदार्थ समसामयिक थी। प्रकाशमाप्य और गिलभारिणी नानश म्यारतिरती है। चतुयंगचिन्तामणिये प्रणेता हमाद्रि ना. श्री. महादेयमणि ( म पु मदामधा। करणाधिप और मन्त्रणादाता थे। महायपोगरा -पालका पर गिरि महादयायोगाचार्य सरस्वती दान लिकौमुदीफे रय मदायमह दिनार-पक निगपात नापित, यारा यिता। पुत्र और मीटकपट. शिष्य। इन्होंने अपने पिकाम महादेयकोलि-सादि-उपत्यकावासी निम्न यांनी महायता ले कर न्यामिक्षाममुनाबलिप्रमान पा दिन. जानिविशेष। पूनासे थूसा पर्यन्त पिस्तीर्ण माविष्ट, करी ( सरोका ) की रचना की। घोड़ा, नादिर, दङ्ग भादि उपत्यकामें इनका यास देगा महादेय भी पधारम१ फीन्द चन्द्रोदयोउ न एक जाता है। ये कुल २४ योकोंग यिमता है, फिर प्रत्येक पथि। थोकने स्वतन्त पीयिभाग है। अपने अपने योफर्म महादेय-मद्गलम् १ उतर पर जिला एक प्रागीत मादान प्रदान नहीं चलता। ग्राम और पालित गो सधा प्राम। पद पोटुर तालुक मदरसे ३५० फोग पूर्णम मूभरको छोड़ कर ये लोग अन्यान्य अन्तुमा गांस भाम्धिन है। यह वाटप और चोल रासाका पमापा हुमा शुभ प्राचीन मन्दिर विधमान है। . महादेयगोसी--प्रदेश शान्तिविधानके रचयिता। २ उत. तालुकमे ४० फोस यक्षिण-पश्चिमी महादेयतीर्थ-एक योगी, धोयाएठनीयफे गुग। अवस्थित एक या ग्राम। महादेवरियेदिन-एर विण्यात टीकाफार । इन्होंने गदादेयग्मपनवासिंग विवाद गर्गमा एक कात्यायन-धीतस्यको रोका, श्रीनगसनि, पानिदेयरन मागन्त । कास्पायगीतमूलपतिको टीका मार लिपिमान महादेव गोमयी--मुवापिनी नामक पौधायन लार. 'विपरण नामक प्राय लिग हैं। भाष्यप्रणेता। दान भवामौका मतानुसरण का महादय दीक्षित-पौधायनसोगप्रयोग के प्रणेना। उगम लिगा। बाहर से मध्य में। महादेव देवा--गोसनिर्णयफे पचविता । महादय यादीन्द्र - रगमार गुणकिरणापली टीसाफ रय. महादेव परिडत-रिवंशोधोनका रचयिता ।२दि पिता, मदर शिष्य। • मरप्रकाश और हिकमतप्रदीप नाम मन्थफै प्रगा। ३ महादयति--गिलारण, पा. गिता, पासशिरा, रसपमति नाग पन्धको टोकासे रचयिता पुर। आप पालनियमिताल प्रसा ma महादेय पदार--मध्यप्रदेश दोरामायाद शिलालगन एक प्रनियापार में। गिरिधे पो। गतपुरा गिरिमालाय एनांगा निकल, महादेव पिधायगीगमानन्द नहटीका भार नग्धारित • फरममा सा नाम हो गया है। पुर्णाया और टोज प्रजेना। मापन नामकी दो मदिया पर्वतको at हुई हैं। मायामा -विरा हिस्सा मागका प्रातिर मौन्दर्य उटना सराय नहीं है। पालिक-निजविगोर नामक रोमाना । 'पांचपदोका ग्यासायास प्रायः हमार कुटर ने मपाईपामार मारा । पर मामा महापानी पर मारपरमपिता। २ गाय पुष्परमार-कविण्या पिर, मुन्दपनामानमाना । Foil 2013