पृष्ठ:हिन्दी विश्वकोष सप्तदश भाग.djvu/१५१

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महाम-पहानदी जाता है। टीहा और यमदुरोगमें यह पर. उत्कृष्ट महान (म०वि०) यहुन वा बिगाल । २ गहमदन- सोपा है। चित्र और यह मादि रोगों में इसका वृक्षा ३ उन् । ४१ मारा मानिधान । स्थानिक प्रयोग भी किया जाता है। किन्तु इममें महापावी (मो० ) भामलको पक्ष । भागकी साह जलन होता है । पर इममें दधिका महानक ( स० पु. ) मागल्यायधिोर, पायीनकार प्रलेप देना उत्तम है। ___ का एक प्रकारका याज्ञा शिम पर गाहा मदा होता था। महाइम (म' पु०) महाश्याली दुमश्चेति । ? यस्य महान। ( म००) १ दोनर, बटा नाम | २ निष, पक्ष, पीपलका पेड़। गृहम, बड़ा पेट। ३ ताल : महादेय। पक्ष, ताडका गाछ। ४ मधुक गृक्ष, महुपका पेड़। ५ महानगर ( म० पली०) मा नगर। नगर । शाकद्वीपपति मध्यके समम पुत्रका माम। । मापयतु. मदानम्न ( स० वि०)?मर प्रकार उन पदम ५३२१) ६ वर्षभेद । (नि. MR) ना।२ अनामडादित, जिरफे गरीर पर करताना महादोण (सं० पु०) गिय, महाश्य । २सुमेरु पर्यंत प्रणयी, प्रेम करनेयाला। ४ उपपति, ग्यो कागार । महाद्रोणा (म० बी०) मदती चासो द्रोणा चेति द्रोणपुग्यो। (पु.) ५ प्राचीनकासका एक कर्मचारी ही बहुत ऊँगे महादीप ( स० पु.) पृथ्योका यह बड़ा भाग जो चारों: पद पर होता था। मोर नैसर्गिक सीमासे घिरा हुमा हो और जिसमें महानग्नी (मनो०) गृहकली, पापर काम काज करने अनेक देश हो भीर अनेक गातियां पास करती हों। याली स्त्री या दासी। जैसे-एशिया, ममिका। महानट (सं० पु. ) महाश्यामी गरः मतपश्नागि, उपरा- महाधन ( स० वि०), बहुमूल्य, पेकिमती। २ नरांकत्यादस्य तयारय। मिष, महादेव । बहुत धनी, दौलनमन्द । (पु० ) ३ स्वर्ण, सोना। मदानद ( स० पु.). मदायिरोग। (मा. ४२१) ४ एपि, पेनी। ५धूप, सुगंध धूप। २नीर्षविशेष। (सामान. २२) माधातु (मपु.) सुपर्ण, सोना। महानदी (मन्त्री०) मदनी नामी मी घेति । पुरतो. महाधिपति (Ago) तालिकॉक एक देवताका माम!' नामशेयके अलगत करा घरमें प्रवादिन एक नदी। महायो (स.वि.) १ महामानो। २ पिजिष्ट युटिसका दूसरा नाम नितोपला है। किसोरपना गाम- मम्पन हानवान् । फी एक दूसरी भी मदी करा जिले में पहनी है। या महाधीर (म0पु0) महाद्वियर्णित दो रासा । महानदी दिपपंतमें निकली है। इसमें स्नान महाति ( स० पु. ) राजपुवभेद ।। करनेसे सभी पाप जाने रहने । (भागपत ह ) “नदोर महापमा निगरिनिता। महाध्यनि (स.पु. ) १ पुराणानुसार एक दानपका । चित्रोत्पलेशदिमाता गांगनारामा " नाम। २वर्य जोरकर शाद । (ोगमा) माध्यनिक (सं०१०) मानि गातोति मध्यन-टर, महानासी राध्यनिकरचेति। पुप्या दिमादयामि । "AFEIनि मत मान भारत मापप गमन द्वारा सम्मादिन मस्य, यद जो पुण्यकार्य Treritage ma" लिये दिमाटयम गया दो और यही मा. गया हो।। "गग्यग्नि सामगानभान नागनिमानिन-महानदी-पना भौर उदीमा मामनरार हो विशार्या मागोमा( स) नही कर पादित कमी। पद रामपुर जिदिक मा. मृत्यु होने पर उदारिरा नया मामाच दोता है। । २०१० सपा शा० ८२ १० दिसल . महाध्यर (म.पु.) मीरा रानाने पर होगा गिरी।